{"_id":"612544878ebc3e31e62f736b","slug":"there-are-many-forms-of-hindi-language-each-form-has-its-own-brightness-panipat-news-knl809784169","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदी भाषा के कई रूप हैं, हर रूप की अपनी अलग चमक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदी भाषा के कई रूप हैं, हर रूप की अपनी अलग चमक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी भाषा के कई रूप हैं और हर रूप की अपनी अलग चमक है। क्या यह चमक इस आधुनिक युग की भाषा की मांग के सामने फीकी सी पड़ रही है? जिस देश में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक कभी हिंदी का ही बोलबाला रहा हो, वहां आज इस भाषा को अपने अस्तित्व के लिए जूझना पड़ रहा है। लोग शायद यह भूल चुके हैं कि ब्रिटिश नौकरशाह लार्ड मॅकाले ने अपनी कूटनीति के तहत ही भारत पर अंग्रेजी थोपी थी और हमारी भाषा संस्कृति पर सुनियोजित ढंग से प्रहार किया। इसका असर यह हुआ कि अंग्रेजी शासक की भाषा बनी और हिंदी को गुलामी का दर्जा मिला, जो आज तक बदस्तूर जारी है।
शिक्षाविदें के अनुसार आजकल के युग के हम भारतीय विशेषकर नौजवान अपनी हिंदी भाषा को बोलने से हिचकिचाते हैं। उन्हें हिंदी का कोई भविष्य दिखाई नहीं देता है। उनका मानना है कि नौकरी पाने के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। हम बाकी भाषाओं को न बोलें या बोलना ही बंद कर दें, ऐसा नहीं है, लेकिन जैसे हम आज अंग्रेजी भाषा को महत्व देते हैं, वही स्थान हिंदी भाषा को क्यों नहीं दे सकते। आज युवाओं को हिंदी तकनीकी रूप से भी सक्षम हो चुकी हिंदी के विकास पर फोकस करना होगा।
आर्य समाज के लिए यह गर्व की बात है कि हिंदी को आर्य की भाषा के रूप में जाना जाता है। आर्य समाज ने अपने ग्रंथों की रचना भी हिंदी में की है। स्वामी दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश की रचना भी हिंदी में की। कुछ वेदों का अनुवाद भी हिंदी में किया। आर्य समाज ने हिंदी सत्याग्रह किया। हिंदी देश को एकता के सूत्र में बांधने का काम करेगी। सभी को श्रद्घाभाव से हिंदी को बढ़ावा देना चाहिए।
विज्ञापन
अभय आर्य, निदेशक, आर्य बाल भारती पब्लिक स्कूल, पानीपत।
हरियाणा जैसे हिंदी भाषी राज्य में हिंदी मातृभाषा मानी जाती है। अब समय बदल रहा है, शिक्षाविद अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी का महत्व समझने लगे हैं। लेकिन फिर भी अंग्रेजी भाषा पूरे संसार मे संप्रेषण करने का माध्यम मानी जाती है। बच्चे की प्राथमिक शिक्षा हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी में हो ताकि बच्चे का आधार या नींव सुदृढ़ हो सके। जिसे बच्चा अच्छे से समझ और बोल सके।
-हीरामल भार्गव, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, उझा, पानीपत।
पिछले कुछ वर्षों में हिंदी की स्थिति में काफी सुधार आया है। लगभग पांच वर्ष पूर्व तो ऐसा लगता था जैसे हिंदी खो ही जाएगी। पर सरकार व कई संस्थाओं के प्रयास से हिंदी को जैसे एक नया जीवन मिला है। यदि हिंदी को बचाना है, सहेजना है तो सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। सिर्फ मुट्ठी भर लोग लाख चाहने के बाद भी कुछ विशेष नहीं कर पाएंगे।
-सरोज बाला गुर, पूर्व शिक्षा अधिकारी।
भाषा मनुष्यों को आपस में जोड़ती है। मनुष्यों के आपस में मिलने जुलने से परिवार बनता है। परिवारों के जुड़ने से समाज बनता है। समाज मिलकर गांव बनता है, गांव-गांव मिलकर शहर और शहरों से महानगर और महानगरों के मिलने से एक देश बनता है। अर्थात ये सभी एक दूसरे पर निर्भर करते हैं। इसलिए जब तक अपनी हिंदी भाषा को महत्व नहीं दिया जाएगा, तब तक देश का विकास नहीं होगा।
-संजू अबरोल, प्राचार्या, राजकीय महाविद्यालय, पानीपत।
विज्ञापन
शिक्षाविदें के अनुसार आजकल के युग के हम भारतीय विशेषकर नौजवान अपनी हिंदी भाषा को बोलने से हिचकिचाते हैं। उन्हें हिंदी का कोई भविष्य दिखाई नहीं देता है। उनका मानना है कि नौकरी पाने के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। हम बाकी भाषाओं को न बोलें या बोलना ही बंद कर दें, ऐसा नहीं है, लेकिन जैसे हम आज अंग्रेजी भाषा को महत्व देते हैं, वही स्थान हिंदी भाषा को क्यों नहीं दे सकते। आज युवाओं को हिंदी तकनीकी रूप से भी सक्षम हो चुकी हिंदी के विकास पर फोकस करना होगा।
विज्ञापन
आर्य समाज के लिए यह गर्व की बात है कि हिंदी को आर्य की भाषा के रूप में जाना जाता है। आर्य समाज ने अपने ग्रंथों की रचना भी हिंदी में की है। स्वामी दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश की रचना भी हिंदी में की। कुछ वेदों का अनुवाद भी हिंदी में किया। आर्य समाज ने हिंदी सत्याग्रह किया। हिंदी देश को एकता के सूत्र में बांधने का काम करेगी। सभी को श्रद्घाभाव से हिंदी को बढ़ावा देना चाहिए।
विज्ञापन
अभय आर्य, निदेशक, आर्य बाल भारती पब्लिक स्कूल, पानीपत।
हरियाणा जैसे हिंदी भाषी राज्य में हिंदी मातृभाषा मानी जाती है। अब समय बदल रहा है, शिक्षाविद अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी का महत्व समझने लगे हैं। लेकिन फिर भी अंग्रेजी भाषा पूरे संसार मे संप्रेषण करने का माध्यम मानी जाती है। बच्चे की प्राथमिक शिक्षा हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी में हो ताकि बच्चे का आधार या नींव सुदृढ़ हो सके। जिसे बच्चा अच्छे से समझ और बोल सके।
-हीरामल भार्गव, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, उझा, पानीपत।
पिछले कुछ वर्षों में हिंदी की स्थिति में काफी सुधार आया है। लगभग पांच वर्ष पूर्व तो ऐसा लगता था जैसे हिंदी खो ही जाएगी। पर सरकार व कई संस्थाओं के प्रयास से हिंदी को जैसे एक नया जीवन मिला है। यदि हिंदी को बचाना है, सहेजना है तो सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। सिर्फ मुट्ठी भर लोग लाख चाहने के बाद भी कुछ विशेष नहीं कर पाएंगे।
-सरोज बाला गुर, पूर्व शिक्षा अधिकारी।
भाषा मनुष्यों को आपस में जोड़ती है। मनुष्यों के आपस में मिलने जुलने से परिवार बनता है। परिवारों के जुड़ने से समाज बनता है। समाज मिलकर गांव बनता है, गांव-गांव मिलकर शहर और शहरों से महानगर और महानगरों के मिलने से एक देश बनता है। अर्थात ये सभी एक दूसरे पर निर्भर करते हैं। इसलिए जब तक अपनी हिंदी भाषा को महत्व नहीं दिया जाएगा, तब तक देश का विकास नहीं होगा।
-संजू अबरोल, प्राचार्या, राजकीय महाविद्यालय, पानीपत।