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फिर बढ़ने लगा एक्यूआई, दर्ज किया गया 204
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पानीपत। कई दिनों से पानी का छिड़काव न होने से शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) फिर बढ़ने लगा है। दिसंबर में दूसरी बार एक्यूूआई 200 पार पहुंचा है। शनिवार को एक्यूआई 204 दर्ज किया गया । बुधवार को एक्यूआई रेड जोन में था जब यह 311 दर्ज किया गया था।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को छोड़ किसी भी विभाग ने शुक्रवार व शनिवार को ग्रैप के नियमों के तहत काम नहीं किया है। सड़कों व पेड़ पौधों पर जल का छिड़काव नहीं कराया गया। उधर, खेतों में पराली भी जलाई जा रही है। फैक्टरियों से काला धुआं निकलते दिखाई दे रहा है। इस कारण शनिवार को एक्यूआई दोबारा ओरेेंज जोन में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर सीपीसीबी ने कोयला संचालित उद्योगों के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित कर दिया है। ऐसा न होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
डाई हाउस नहीं मान रहे नियम
सेक्टर 29, पार्ट-2 स्थित कुछ डाई हाउस नियम नहीं मान रहे। चिमनियों से काला धुआं निकल रहा है। कुछ जगहों पर तो रबर, कबाड़ आदि जलाई जा रही है। ये भी एक्यूआई बढ़ने का बड़ा कारण है।
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स्मॉग से बिगड़ सकता है स्वास्थ्य
बढ़ता प्रदूषण का स्तर काफी परेशान कर रहा है। सांस के रोगियों को काफी परेशानी हो रही है। फेफड़ों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। ये स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। बच्चों को सुबह शाम से घर से बाहर निकालने से बचें। सुबह व शाम को घर पर व्यायाम करें, बाहर निकलते वक्त मास्क का प्रयोग करें।
डॉ. रितु, डॉक्टर सिविल अस्पताल
किसी भी विभाग ने नहीं निभाई जिम्मेदार
नगर निगम को शहर के अंदर सड़कों के किनारे, पीडब्ल्यूडी को स्टेट हाईवे के किनारे व एएनएचआई को जीटी रोड पर सड़कों के किनारे पानी के छिड़काव का काम सौंपा गया था, लेकिन किसी भी विभाग ने जिम्मेदारी को ईमानदारी से नहीं निभाया। नियमित तौर पर सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं हुआ। हवा में धूल के कणों व धुएं के कारण ही शहर का एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है।
यहां जारी की थी पाबंदी-
ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, शिक्षण संस्थान, मॉल आदि में जेनरेटर सेट पर पाबंदी के निर्देश दिए गए थे। ईपीसीए ने पहले ही साफ कर दिया था कि हाउसिंग सोसायटी में सिर्फ लिफ्ट के इस्तेमाल में छूट रहेगी। भवन निर्माण के कार्यों पर रोक लगाई गई है। इन निर्देशों का भी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
प्रदूषण स्तर का कम करने के भरसक प्रयास कर रहे हैं- आरओ
प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। एनजीटी के निर्देशों पर प्रदूषण के कारकों पर कार्रवाई भी की जा रही है। ग्रैप के नियमों का पालन हो रहा है।
कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को छोड़ किसी भी विभाग ने शुक्रवार व शनिवार को ग्रैप के नियमों के तहत काम नहीं किया है। सड़कों व पेड़ पौधों पर जल का छिड़काव नहीं कराया गया। उधर, खेतों में पराली भी जलाई जा रही है। फैक्टरियों से काला धुआं निकलते दिखाई दे रहा है। इस कारण शनिवार को एक्यूआई दोबारा ओरेेंज जोन में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर सीपीसीबी ने कोयला संचालित उद्योगों के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित कर दिया है। ऐसा न होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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डाई हाउस नहीं मान रहे नियम
सेक्टर 29, पार्ट-2 स्थित कुछ डाई हाउस नियम नहीं मान रहे। चिमनियों से काला धुआं निकल रहा है। कुछ जगहों पर तो रबर, कबाड़ आदि जलाई जा रही है। ये भी एक्यूआई बढ़ने का बड़ा कारण है।
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स्मॉग से बिगड़ सकता है स्वास्थ्य
बढ़ता प्रदूषण का स्तर काफी परेशान कर रहा है। सांस के रोगियों को काफी परेशानी हो रही है। फेफड़ों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। ये स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। बच्चों को सुबह शाम से घर से बाहर निकालने से बचें। सुबह व शाम को घर पर व्यायाम करें, बाहर निकलते वक्त मास्क का प्रयोग करें।
डॉ. रितु, डॉक्टर सिविल अस्पताल
किसी भी विभाग ने नहीं निभाई जिम्मेदार
नगर निगम को शहर के अंदर सड़कों के किनारे, पीडब्ल्यूडी को स्टेट हाईवे के किनारे व एएनएचआई को जीटी रोड पर सड़कों के किनारे पानी के छिड़काव का काम सौंपा गया था, लेकिन किसी भी विभाग ने जिम्मेदारी को ईमानदारी से नहीं निभाया। नियमित तौर पर सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं हुआ। हवा में धूल के कणों व धुएं के कारण ही शहर का एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है।
यहां जारी की थी पाबंदी-
ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, शिक्षण संस्थान, मॉल आदि में जेनरेटर सेट पर पाबंदी के निर्देश दिए गए थे। ईपीसीए ने पहले ही साफ कर दिया था कि हाउसिंग सोसायटी में सिर्फ लिफ्ट के इस्तेमाल में छूट रहेगी। भवन निर्माण के कार्यों पर रोक लगाई गई है। इन निर्देशों का भी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
प्रदूषण स्तर का कम करने के भरसक प्रयास कर रहे हैं- आरओ
प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। एनजीटी के निर्देशों पर प्रदूषण के कारकों पर कार्रवाई भी की जा रही है। ग्रैप के नियमों का पालन हो रहा है।
कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड