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Panipat News: शिव-पार्वती विवाह की झांकी से श्रद्धालु भावविभोर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 02:00 AM IST
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The tableau of Shiva-Parvati marriage moved the devotees.
संवाद न्यूज एजेंसीपानीपत। मॉडल टाउन स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के चौथे दिन मंगलवार को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की भव्य झांकी निकाली गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर झांकी का स्वागत किया और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव तथा जय शिव शंभू के जयघोष से गूंज उठा।
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कथा व्यास स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज ने व्यासपीठ से शिव महापुराण का महत्व बताते हुए कहा कि पारिवारिक सुख, शांति और संस्कारों की पुनर्स्थापना के लिए भगवान शिव और माता पार्वती के आदर्शों को जीवन में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माता पार्वती की निष्काम तपस्या यह संदेश देती है कि त्याग, संयम, अनुशासन और धैर्य के बिना न तो ईश्वर की प्राप्ति संभव है और न ही जीवन में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
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स्वामी दयानंद सरस्वती ने बताया कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तप किया। उन्होंने राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग कर अन्न, जल और यहां तक कि सूखे पत्तों का भी सेवन छोड़ दिया, जिसके कारण उनका नाम अपर्णा पड़ा। देवर्षि नारद के कहने पर सप्तर्षियों द्वारा ली गई परीक्षा में भी माता पार्वती अपने संकल्प से विचलित नहीं हुईं। उनकी अटूट भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
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कथा के दौरान गाजे-बाजे के साथ भगवान शिव की बारात की सजीव झांकी निकाली गई। देवताओं, शिवगणों और नंदी के साथ निकली बारात का श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा कि शिव-पार्वती का विवाह वैराग्य और गृहस्थ जीवन के आदर्श संतुलन का प्रतीक है।

श्री सनातन धर्म मंदिर सभा के प्रधान तरुण गांधी ने कथा व्यास और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मंदिर सभा का उद्देश्य युवा पीढ़ी को सनातन संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, बैठने और महाप्रसाद की समुचित व्यवस्था की गई। कथा के समापन पर मुख्य यजमान एवं पदाधिकारियों ने शिव महापुराण की आरती की, जिसके बाद श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरित किया गया।
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