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Panipat News: जैन धर्म में उपवास और त्याग का माह आज से
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जैन धर्म में व्रत, उपवास त्याग, तप व दान के लिए भाद्रपद महीने की विशेष मान्यता है। इस मास की बड़ी विशेषता है कि इस माह सभी अनुयायी विशेष रूप से पूजन करते हैं। इसके लिए जैनालय सजकर तैयार हो गए हैं।
अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया कि जैन धर्म के दिगंबर अनुयायियों द्वारा आदर्श अवस्था में अपनाए जाने वाले गुणों को दसलक्षण धर्म कहा जाता है। यह भाद्रपद मास में आता है। इस बार भाद्रपद मास पूजन 10 अगस्त से शुरू होकर छह सितंबर तक रहेगा। इसी भाद्रपद माह में पर्यूषण पर्व (दसलक्षण धर्म) मनाया जाता हैं।
इस वर्ष दसलक्षण धर्म उत्सव 28 अगस्त से छह सितंबर तक मनाया जाएगा। जिसके अंतर्गत विशेष उत्सव श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में मनाया जाएगा। इसके अलावा पानीपत में स्थित सभी सातों जैन मंदिर में इस महोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है।
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पर्यूषण पर्व के अंतर्गत ही करीबन 250 वर्ष प्राचीन परंपराओं और उत्सवों का आयोजन होता है। जिसमें विशेष रूप से धूप दशमी के पावन अवसर पर जोत नगर भ्रमण दर्शन का आयोजन किया जाता है, साथ ही आनंद चौदस के दिवस प्राचीन परंपरा के तहत जल यात्रा का भी आयोजन किया जाता है।
इसके अनुसार जीवन में सुख शांति के लिए उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य आदि दसलक्षण धर्मों का पालन हर मनुष्य को करना चाहिए।
दिगंबर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्यूषण दसलक्षण पर्व इस तरह मनाए जाते हैं।
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पानीपत। जैन धर्म में व्रत, उपवास त्याग, तप व दान के लिए भाद्रपद महीने की विशेष मान्यता है। इस मास की बड़ी विशेषता है कि इस माह सभी अनुयायी विशेष रूप से पूजन करते हैं। इसके लिए जैनालय सजकर तैयार हो गए हैं।
अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया कि जैन धर्म के दिगंबर अनुयायियों द्वारा आदर्श अवस्था में अपनाए जाने वाले गुणों को दसलक्षण धर्म कहा जाता है। यह भाद्रपद मास में आता है। इस बार भाद्रपद मास पूजन 10 अगस्त से शुरू होकर छह सितंबर तक रहेगा। इसी भाद्रपद माह में पर्यूषण पर्व (दसलक्षण धर्म) मनाया जाता हैं।
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इस वर्ष दसलक्षण धर्म उत्सव 28 अगस्त से छह सितंबर तक मनाया जाएगा। जिसके अंतर्गत विशेष उत्सव श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में मनाया जाएगा। इसके अलावा पानीपत में स्थित सभी सातों जैन मंदिर में इस महोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है।
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पर्यूषण पर्व के अंतर्गत ही करीबन 250 वर्ष प्राचीन परंपराओं और उत्सवों का आयोजन होता है। जिसमें विशेष रूप से धूप दशमी के पावन अवसर पर जोत नगर भ्रमण दर्शन का आयोजन किया जाता है, साथ ही आनंद चौदस के दिवस प्राचीन परंपरा के तहत जल यात्रा का भी आयोजन किया जाता है।
इसके अनुसार जीवन में सुख शांति के लिए उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य आदि दसलक्षण धर्मों का पालन हर मनुष्य को करना चाहिए।
दिगंबर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्यूषण दसलक्षण पर्व इस तरह मनाए जाते हैं।