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बिखरी भाकियू को एकजुट कर दोबारा सक्रीय करने को महापंचायत की संजीवनी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Sep 2021 02:35 AM IST
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The life of the Mahapanchayat to unite the scattered Bhakyu and make it active again
महापंचायत को किसान पानीपत की चौथी लड़ाई की संज्ञा दे रहे हैं। पानीपत पहले से ही किसान यूनियन का गढ़ रहा है। कभी प्रदेश भर के किसान नेता पानीपत किसान भवन में हर माह बैठक किया करते थे, लेकिन समय बदला और किसानों के संगठन बढ़ते चले गए। सभी संगठनों को एकत्रित करने और बड़े किसान नेताओं को एकमंच पर लाने के लिए इस महापंचायत से संजीवनी मिलने की उम्मीद है। महापंचायत में रविवार को पुराने गिले शिकवे भूलकर तमाम किसान नेता एक मंच पर दिखे।
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भारतीय किसान यूनियन के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत, सेहतकारी संगठन के अध्यक्ष शरद यादव, प्रेम सिंह, हरि सिंह, रतनमान, जयपाल सिंह और रामकुमार जैसे किसान नेता पानीपत आंदोलनों की रूपरेखा तैयार करते रहे हैं। भाकियू चढ़ुनी के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी को पानीपत के किसान भवन से ही पहचान मिली, जब इन्होंने भाकियू से अलग होकर अपना अलग गुट बनाया। प्रदेश भर के किसान नेता अलग-अलग धड़ों में बंट गए थे।
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महेंद्र सिंह टिकैत साल में दो बार किसान यूनियन की बैठक में पानीपत किसान भवन में शामिल होते थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश के दूसरे किसान नेताओं को भी ये रास्ता दिखाया था। उत्तर प्रदेश के पानीपत काफी नजदीक है। वहां के किसान पानीपत की मंडियों में अपना गेहूं और धान भी लेकर आते थे। वहां के किसानों का पानीपत के किसानों से गहरा नाता है, इस महापंचायत को पानीपत में आयोजित करने का ये भी मुख्य कारण रहा।
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- करनाल और दिल्ली तक आवाज पहुंचाना उद्देश्य-
हाल में किसानों ने करनाल में बड़ी महापंचायत का आयोजन किया था। यहां पर किसानों ने सीधे मुख्यमंत्री मनोहर लाल को चुनौती दी थी। किसान नेताओं का मानना है कि पानीपत में महापंचायत होने से करनाल में सीएम मनोहर लाल और दिल्ली में केंद्र सरकार तक आवाज पहुंचाना आसान होगा।

- पानीपत को माना जाता है यूनियन का मुख्यालय
पानीपत में असंध रोड पर किसान भवन है। इसे यूनियन का मुख्यालय माना जाता है क्योंकि प्रदेश भर की बैठकें यहीं होती हैं। पानीपत को छोड़ किसी दूसरे जिले के किसान भवन को मुख्यालय के तौर पर नहीं देखा जाता है। पानीपत दिल्ली के नजदीक और हाईवे पर है, जहां प्रदेश भर के लोग आसानी से आ जा सकते हैं। किसी भी रैली या महासभा के लिए पानीपत किसान नेताओं की पहली पसंद होती है।
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