फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   The dominance of Hindi is reaching its peak all over the world

संपूर्ण विश्व में उत्कर्ष पर पहुंच रहा हिंदी का वर्चस्व

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 12:11 AM IST
विज्ञापन
The dominance of Hindi is reaching its peak all over the world
जीवन में भाषा ही एकमात्र वह साधन है जो हमें सभ्य व सुसंस्कृत बनाता है। हम हिंदी को गर्व से अपनी मातृभाषा का दर्जा देते हैं, जो अनेकता में एकता का स्वर पूरे विश्व में गुंजायमान करती है। आज के समय में अंग्रेजी का ज्ञान होना आवश्यक हो गया है, क्योंकि अंग्रेजी की अज्ञानता से हमारा करियर प्रभावित होता है। लेकिन इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएं। दोनों भाषाओं का इतना अच्छा ज्ञान हो और बैलेंस होना जरूरी है कि कभी किसी भी बात से शर्मिंदा न होना पड़े। वहीं हिंदी के महत्व को भुलाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन

विशेषज्ञों की मानें तो आज संपूर्ण विश्व में हिंदी का वर्चस्व अपने उत्कर्ष पर है जिसके प्रेम, अपनत्व व सौहार्द से देश की एकता व अखंडता का प्रसार कायम है। वर्तमान समय की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए हिंदी भाषा भावनाओं को व्यक्त करने का एक ऐसा साधन है, जिसकी ताकत से दुनिया को बदला जा सकता है। सभी शिक्षकों का यह कर्तव्य है कि हिंद की पहचान हिंदी को प्रत्येक जनमानस के हृदय तक पहुंचाएं, ताकि मातृभाषा के वात्सल्य से कोई वंचित ना रहे।
विज्ञापन

विश्व के ज्यादातर देशों की पहचान उनकी भाषा है। अंग्रेजी को उनके वहां अनिवार्य रूप से नहीं पढ़ाया जाता। उसी प्रकार से एक देश-एक भाषा को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए। हमारे देश में अधिकांश लोग हिंदी भाषी हैं, परंतु अंग्रेजी भाषा के कारण किसी व्यक्ति की शिक्षा में अवरोध आए, ऐसा नही होना चाहिए। अंग्रेजी भाषा को ऐच्छिक करना चाहिए। हमें हिंदी के विकास पर ही जोर देना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

- प्रो. दिनेश कुमार, एचओडी, मास कम्यूनिकेशन, आर्य कॉलेज, पानीपत।
राष्ट्रभाषा का हमारी सीखने की क्षमता के साथ-साथ आंतरिक गुणवत्ता व सामर्थ्य को बढ़ावा देने में अहम योगदान रहा है। छोटे बच्चों को मातृभाषा का ज्ञान देना हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है, जिसका हम दिल से सम्मान करते हैं। हिंदी भाषा का ज्ञान बच्चों के विकास की अहम कड़ी है, जो समय रहते बच्चों की नींव मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
- सुनीता शर्मा, प्राचार्या, न्यू ईरा पब्लिक स्कूल, मतलौडा, पानीपत।
आज सब अंग्रेजी तो सीखना चाहते हैं, लेकिन कोई हिंदी को बचाना नहीं चाहता। अंग्रेजी शासन में ऐसी व्यवस्था बनीं, जिससे हिंदी को दूर रखा गया। भारतीयों ने अंग्रेजी सीखी। इसी व्यवस्था के कारण हिंदी समाप्त होती चली गई। आज हिंदी लुप्त होती जा रही है। रोजगार के लिए अंग्रेजी अनिवार्य है। हिंदी को बचाने के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे।

- प्रवीण जैन, समाजसेवी।
किसी भी विद्यार्थी से छिपा नहीं है कि जब कोई काम होता है या प्रोजेक्ट का कोई काम पूरा करना होता है तब हिंदी ही ऐसा विषय है, जिसका बलिदान दिया जाता है और पीरियड बंक हो जाता है। अध्यापक भी इस सच्चाई से भली-भांति परिचित हैं। हिंदी को बहुत आसान समझा जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। कई बार देखा है, जब लगता है कि अगर हिंदी के नंबर अच्छे आते तो प्रतिशत बढ़ सकता था।
- गौरव मिखा, समाजसेवी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed