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Panipat News: भगवान और भक्त के संबंध से जुड़े प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
Sun, 31 May 2026 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 31 May 2026 01:11 AM IST
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कथा सुनाते पंडित बृजकिशोर शास्त्री। स्रोत : स्वयं
पानीपत। कथावाचक पंडित बृजकिशोर शास्त्री ने मॉडल टाउन स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर सभा में पुरुषोत्तम मास मलमास कथा का शनिवार को चौदहवें दिन व्यासपीठ से भगवान विष्णु के विभिन्न अवतार, पुरुषोत्तम मास के महात्म्य और भगवान व भक्त के संबंध से जुड़े प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर किया।
पंडित बृजकिशोर शास्त्री ने बताया कि मलमास जिसे स्वयं भगवान विष्णु ने अपना नाम पुरुषोत्तम दिया है। कथा के दौरान उन्होंने समझाया कि संसार के सभी साधन एक तरफ और भगवान की निश्छल भक्ति एक तरफ है। जब भक्त सर्वस्व त्यागकर प्रभु की शरण में आता है,तो भगवान स्वयं उसकी ढाल बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सार्थकता सत्संग में ही है। सात्विक विचार और प्रभु का नाम ही इस भवसागर से पार लगाने वाले हैं। इस कलयुग में केवल हरि का नाम ही सच्चा सहारा है। पुरुषोत्तम मास में जो जीव नियम, संयम और श्रद्धा से भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं। उन्होंने मलमास के महात्म्य में बताया कि कैसे पूर्व जन्म में द्रौपदी ने ऋषि के कहने पर भी इस पवित्र महीने का व्रत नहीं किया था, जिसके कारण उन्हें कष्ट भोगना पड़ा। बाद में भगवान कृष्ण की कृपा से उन्हें अखंड सौभाग्य और सम्मान मिला। कथा के विश्राम पर शास्त्री और महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया जिसमें सभी ने खड़े होकर नृत्य किया। समापन पर आरती की गई और सभी भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।
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पंडित बृजकिशोर शास्त्री ने बताया कि मलमास जिसे स्वयं भगवान विष्णु ने अपना नाम पुरुषोत्तम दिया है। कथा के दौरान उन्होंने समझाया कि संसार के सभी साधन एक तरफ और भगवान की निश्छल भक्ति एक तरफ है। जब भक्त सर्वस्व त्यागकर प्रभु की शरण में आता है,तो भगवान स्वयं उसकी ढाल बन जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सार्थकता सत्संग में ही है। सात्विक विचार और प्रभु का नाम ही इस भवसागर से पार लगाने वाले हैं। इस कलयुग में केवल हरि का नाम ही सच्चा सहारा है। पुरुषोत्तम मास में जो जीव नियम, संयम और श्रद्धा से भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं। उन्होंने मलमास के महात्म्य में बताया कि कैसे पूर्व जन्म में द्रौपदी ने ऋषि के कहने पर भी इस पवित्र महीने का व्रत नहीं किया था, जिसके कारण उन्हें कष्ट भोगना पड़ा। बाद में भगवान कृष्ण की कृपा से उन्हें अखंड सौभाग्य और सम्मान मिला। कथा के विश्राम पर शास्त्री और महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया जिसमें सभी ने खड़े होकर नृत्य किया। समापन पर आरती की गई और सभी भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।
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कथा सुनाते पंडित बृजकिशोर शास्त्री। स्रोत : स्वयं