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Panipat News: डेंगू-मलेरिया के बचाव के लिए उदासीन है विभाग
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यमुनानगर। मानसून सीजन में बार-बार बारिश होने के साथ ही डेंगू-मलेरिया के रोगों का खतरा बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। डेंगू-मलेरिया सीजन में भी नाममात्र स्टाफ से काम चलाया जा रहा है।
जिले में 25 पदों पर मात्र चार मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर ही हैं, वहीं 123 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर में भी सिर्फ 23 वर्कर ही हैं। इस तरह नाममात्र स्टाफ से डेंगू-मलेरिया से निपटना विभाग के लिए चुनौती साबित होगी। वर्ष-2024 में मलेरिया के दो व डेंगू के तीन केस थे।
इस साल डेंगू के पांच व मलेरिया के तीन केस मिल चुके हैं। चार मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर, 23 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर के अलावा डेंगू मलेरिया से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 40 ब्रिडर चेकर रखे हैं, जिनमें दस ग्रामीण व 30 शहरी क्षेत्र में फील्ड में उतारे गए हैं। इनकी टीमें गली-गली जाकर सर्वे कर रही हैं और लोगों को डेंगू से बचाव के उपाय बता रही हैं। ये टीमें अभी तक 71868 मलेरिया के और 5889 डेंगू के नमूने ले चुकी हैं।
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इस दौरान 149 लार्वा मिलने के मामले में लोगों को नोटिस जारी किया जा चुका है। मलेरिया जांच के लिए अब तक 70 हजार 233 ब्लड स्लाइड तैयार की गई हैं, वहीं रैपिड फीवर मास सर्वे में 26 हजार 300 घर कवर किए गए हैं।
सुपरवाइजर व वर्कर का अहम जिम्मा, वही कम : डेंगू-मलेरिया के मामले में मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर व मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर पर्याप्त होने चाहिए।
इनके ही जिम्मे डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के अहम काम होते हैं। यही फील्ड में रह कर डेंगू-मलेरिया के बारे में लोगों को जागरूक करने से लेकर बचाव का कार्य करते हैं।
मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर लोगों की जांच, नमूने लेना व तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ने सहित अन्य कार्य करते हैं। इन पर मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर निगरानी रखते हैं। अभी दोनों की कमी से यह काम प्रभावित हो रहे हैं।
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जिले में 25 पदों पर मात्र चार मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर ही हैं, वहीं 123 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर में भी सिर्फ 23 वर्कर ही हैं। इस तरह नाममात्र स्टाफ से डेंगू-मलेरिया से निपटना विभाग के लिए चुनौती साबित होगी। वर्ष-2024 में मलेरिया के दो व डेंगू के तीन केस थे।
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इस साल डेंगू के पांच व मलेरिया के तीन केस मिल चुके हैं। चार मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर, 23 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर के अलावा डेंगू मलेरिया से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 40 ब्रिडर चेकर रखे हैं, जिनमें दस ग्रामीण व 30 शहरी क्षेत्र में फील्ड में उतारे गए हैं। इनकी टीमें गली-गली जाकर सर्वे कर रही हैं और लोगों को डेंगू से बचाव के उपाय बता रही हैं। ये टीमें अभी तक 71868 मलेरिया के और 5889 डेंगू के नमूने ले चुकी हैं।
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इस दौरान 149 लार्वा मिलने के मामले में लोगों को नोटिस जारी किया जा चुका है। मलेरिया जांच के लिए अब तक 70 हजार 233 ब्लड स्लाइड तैयार की गई हैं, वहीं रैपिड फीवर मास सर्वे में 26 हजार 300 घर कवर किए गए हैं।
सुपरवाइजर व वर्कर का अहम जिम्मा, वही कम : डेंगू-मलेरिया के मामले में मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर व मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर पर्याप्त होने चाहिए।
इनके ही जिम्मे डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के अहम काम होते हैं। यही फील्ड में रह कर डेंगू-मलेरिया के बारे में लोगों को जागरूक करने से लेकर बचाव का कार्य करते हैं।
मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर लोगों की जांच, नमूने लेना व तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ने सहित अन्य कार्य करते हैं। इन पर मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर निगरानी रखते हैं। अभी दोनों की कमी से यह काम प्रभावित हो रहे हैं।