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बजट आधा और सफाई भी होगी बेहतर...
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पानीपत। शहर की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इससे सफाई का बजट भी आधा होगा और सफाई भी बेहतर होगी। शहरी स्थानीय निकाय ने नगर निगम को एक जोन में ही सफाई के काम का टेंडर लगाने की अनुमति दी है। हालांकि निगम ने शहर को चार जोन में बांटकर चार टेंडर लगाने की निकाय से अनुमति मांगी थी। इस पर सफाई का बजट करीब ढाई करोड़ रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया था। निकाय ने इसे करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिमाह में मंजूर किया है और चार जोन के अलग-अलग चार टेंडरों की बजाए पूरे शहर के एक जोन में मानकर एक टेंडर लगाकर सफाई करवाने की हिदायत दी है।
अब शहर के अंदर चल रहे मौजूदा सभी सफाई के टेंडरों को रद्द किया जाएगा। इनकी मियाद और आगे नहीं बढ़ाई जा सकेगी। इसके अलावा 22 साल का अनुबंध करने वाली जेबीएम का काम जारी रहेगा। वहीं निगम अब इस रणनीति पर काम करने जा रहा है कि डेढ़ करोड़ रुपये के एक टेंडर के अंतर्गत वह शहर की सफाई किस हिसाब से करवाएगा। ऐसी भी संभावना है कि निगम इस बजट में कई टेंडर लगाएगा या एक ही टेंडर लगाकर आगे सबलेट करेगा। अभी इस पर निर्णय बाकी है।
4 करोड़ की जगह अब सिर्फ 2 करोड़ ही हो जाएगी शहर की सफाई
इस टेंडर के बाद शहर की सफाई का बजट करीब 4 करोड़ से घटकर महज 2 करोड़ रुपये रह जाएगा। इसके अलावा निगम के कच्चे व पक्के सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह अलग से रहेगी। इसमें डेढ़ करोड़ रुपये नए होने वाले टेंडर और 50 लाख रुपये जेबीएम के हर माह होने वाले भुगतान के ही रह जाएंगे। बाकि करीब एक करोड़ रुपये प्रतिमाह से रोड की सफाई करने वाली मशीन, करीब 25 लाख की नाला गैंग, करीब 50 से 70 लाख तक की सेक्टरों की सफाई, मार्केट और रात की सफाई के टेंडरों को रद्द किया जाएगा।
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कई महीनों से चल रही थी प्लानिंग, निगम सदन में भी लिया था फैसला-
शहर को चार जोन में बांटकर सफाई की प्लानिंग कई माह से चलाई जा रही थी। इसका निगम सदन की बैठक में भी फैसला किया गया था कि बाकी सभी चल रहे सफाई टेंडरों को रद्द किया जाए। सदन में सांसद व विधायक की मौजूदगी में 6 रोड की सफाई करने वाली एक करोड़ रुपये प्रतिमाह वाली मशीन को भी तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया गया था। बावजूद इसके कई टेंडरों को एक-एक माह के लिए बढ़ा दिया गया था।
डेढ़ करोड़ से घटकर 50 लाख हुआ जेबीएम का बजट, रोज निकलता है 500 टन कूड़ा
शहर से रोज कूड़ा उठाने का औसत करीब 500 टन है। इसके लिए जेबीएम को करीब एक हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान होता था। जिसका प्रतिदिन का बिल 5 लाख रुपये और मासिक करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक था। अब इस भुगतान को करीब 300 रुपये प्रति टन के हिसाब से कर दिया गया है। जिससे जेबीएम का मासिक भुगतान करीब 50 लाख रुपये ही रह गया है।
मंजूरी मिली है, बनाई जा रही प्लानिंग
मुख्यालय द्वारा टेंडर लगाने की मंजूरी मिल चुकी है। अभी इस पर प्लानिंग बनाई जा रही कि किस हिसाब से शहर की सफाई व्यवस्था के लिए टेंडर लगाया जाए, ताकि लोगों को बेहतर सफाई व्यवस्था मिल सके।
- आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।
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अब शहर के अंदर चल रहे मौजूदा सभी सफाई के टेंडरों को रद्द किया जाएगा। इनकी मियाद और आगे नहीं बढ़ाई जा सकेगी। इसके अलावा 22 साल का अनुबंध करने वाली जेबीएम का काम जारी रहेगा। वहीं निगम अब इस रणनीति पर काम करने जा रहा है कि डेढ़ करोड़ रुपये के एक टेंडर के अंतर्गत वह शहर की सफाई किस हिसाब से करवाएगा। ऐसी भी संभावना है कि निगम इस बजट में कई टेंडर लगाएगा या एक ही टेंडर लगाकर आगे सबलेट करेगा। अभी इस पर निर्णय बाकी है।
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4 करोड़ की जगह अब सिर्फ 2 करोड़ ही हो जाएगी शहर की सफाई
इस टेंडर के बाद शहर की सफाई का बजट करीब 4 करोड़ से घटकर महज 2 करोड़ रुपये रह जाएगा। इसके अलावा निगम के कच्चे व पक्के सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह अलग से रहेगी। इसमें डेढ़ करोड़ रुपये नए होने वाले टेंडर और 50 लाख रुपये जेबीएम के हर माह होने वाले भुगतान के ही रह जाएंगे। बाकि करीब एक करोड़ रुपये प्रतिमाह से रोड की सफाई करने वाली मशीन, करीब 25 लाख की नाला गैंग, करीब 50 से 70 लाख तक की सेक्टरों की सफाई, मार्केट और रात की सफाई के टेंडरों को रद्द किया जाएगा।
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कई महीनों से चल रही थी प्लानिंग, निगम सदन में भी लिया था फैसला-
शहर को चार जोन में बांटकर सफाई की प्लानिंग कई माह से चलाई जा रही थी। इसका निगम सदन की बैठक में भी फैसला किया गया था कि बाकी सभी चल रहे सफाई टेंडरों को रद्द किया जाए। सदन में सांसद व विधायक की मौजूदगी में 6 रोड की सफाई करने वाली एक करोड़ रुपये प्रतिमाह वाली मशीन को भी तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया गया था। बावजूद इसके कई टेंडरों को एक-एक माह के लिए बढ़ा दिया गया था।
डेढ़ करोड़ से घटकर 50 लाख हुआ जेबीएम का बजट, रोज निकलता है 500 टन कूड़ा
शहर से रोज कूड़ा उठाने का औसत करीब 500 टन है। इसके लिए जेबीएम को करीब एक हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान होता था। जिसका प्रतिदिन का बिल 5 लाख रुपये और मासिक करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक था। अब इस भुगतान को करीब 300 रुपये प्रति टन के हिसाब से कर दिया गया है। जिससे जेबीएम का मासिक भुगतान करीब 50 लाख रुपये ही रह गया है।
मंजूरी मिली है, बनाई जा रही प्लानिंग
मुख्यालय द्वारा टेंडर लगाने की मंजूरी मिल चुकी है। अभी इस पर प्लानिंग बनाई जा रही कि किस हिसाब से शहर की सफाई व्यवस्था के लिए टेंडर लगाया जाए, ताकि लोगों को बेहतर सफाई व्यवस्था मिल सके।
- आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।