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Panipat News: किसानों को कब्जा दिलवाने पहुंचा प्रशासन, निशानदेही न होने से बैरंग लौटा
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पानीपत। पीडब्ल्यूडी ने किसानों की जमीन पर 63 साल पहले 1960 में बरसत रोड बना दिया और किसानों को इसके बदले मुआवजा या जमीन तक नहीं दी। अब कोर्ट के आदेश के बाद पीडब्ल्यूडी अधिकारी किसानों को रोड पर कब्जा देने तो पहुंचे, लेकिन राजस्व विभाग जमीन की निशानदेही नहीं करा पाया। अधिकारियों ने तर्क दिया कि उनका रिकार्ड 44 साल पहले ही जल चुका है। जमीन की निशानदेही न होने से रोड पर कब्जा देने आए पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के अधिकारियों को लौटना पड़ा। इससे एक बार फिर बरसत रोड की जमीन पर किसानों का हक होने के बाद भी उन्हें नहीं मिल पाया। अपने हक के लिए ये किसान पिछले 63 साल से कोर्ट और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उनकी मांग है कि उन्हें या तो जमीन के बदले जमीन दी जाए या उनकी जमीन का मुआवजा दिया जाए, लेकिन विभाग न तो उन्हें मुआवजा दे पाया है और न ही जमीन।
खास बात यह है कि बरसत रोड पर किसानों को उनकी जमीन का कब्जा दिलवाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने ही उन्हें मौके पर बुलाया था। इसे लेकर किसानों से पत्राचार किया गया था। जमीन की निशानदेही के लिए विभाग ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी सूचित किया। अब मंगलवार को फिर से विभाग अधिकारी दूसरे किसान की जमीन का कब्जा दिलाने की बात कहकर लौटे हैं।
जीटी रोड कट से लेकर नूरवाला चुंगी तक करीब 11.52 एकड़ किसानों की जमीन पर पीडब्ल्यूडी ने बरसत रोड बना दिया। इस एरिया तक की जमीन चार किसानों की थी। यह एरिया पत्ती तरफ इंसार का है, जबकि इससे आगे का एरिया पत्ती तरफ मकदूम में आता है। इन किसानों ने अपनी जमीन के मुआवजे को लेकर कोर्ट में केस तक किए थे। पहला केस 1989 में किया गया था, जिस पर 1995 में कोर्ट ने किसानों के हक में फैसला भी दिया था। इसके बाद एक के बाद एक तीन केस और किए गए जिसमें उक्त किसानों की जीत हुई।
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पीड़ित किसान पक्ष के लोगों ने मौके पर पहुंचे लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग अधिकारियों से पूछा कि अगर उनका रिकॉर्ड 1979 में जल गया था तो सेक्टर 13-17, सेक्टर छह और अंसल जैसी सिटी कैसे विकसित हुई। यह एरिया पत्ती तरफ इंसार में आता था। जबकि ये सेक्टर तो 1992 के बाद ही विकसित हुए हैं। बिना रिकॉर्ड के 2020 में इनका इंतकाल कैसे दर्ज हो गया। अब काफी लोगों ने बरसत रोड पर फर्जी रजिस्ट्री तक करवा दुकानें और घर तक बनवा लिए हैं, बिना रिकॉर्ड के ये सब कैसे हो रहा है। किसानों के इन सवालों का अधिकारी कोई जवाब तक नहीं दे पाए।
एडवाकेट रघुबीर सिंह सैनी, एडवोकेट सुरभि शर्मा, संजय गुप्ता, राजकपूर और राजीव कपूर के नाम बरसत रोड की जमीन मलकियत है। कोर्ट में केस जीतने के बाद भी उन्हें मुआवजा या जमीन नहीं दे पाया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं चाहा था कि बरसत रोड बंद हो और लोगों का आवागमन बंद होने से उन्हें परेशानी हो। अब बरसत रोड पर जिन्होंने दुकानें इत्यादि तक बना ली हैं, वे उन्हें भी परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन विभाग उनको मजबूर कर रहा है। सरकार को चाहिए कि वे उनकी जमीन का मुआवजा उन्हें दे दें।
पीडब्ल्यूडी के एसडीओ प्रवीण छिक्कारा ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ किसानों को बरसत रोड का कब्जा देने पहुंचे थे, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर जमीन की निशानदेही तक नहीं कर पाए। इसलिए कब्जा नहीं दिया गया। जैसे ही राजस्व विभाग मौके की निशानदेही कराएगा। उसी समय कब्जा दिलवा देंगे।
मौके पर जमीन की निशानदेही करने पटवारी सुभाष के साथ पहुंचे कानूनगो विजेंद्र कादियान ने कहा कि उनके पास इस जमीन का नक्शा, सिजरा तक नहीं है। इसका पूरा रिकॉर्ड ही 1979 में जल गया था। बिना रिकॉर्ड के निशानदेही नहीं करवाई जा सकती।
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खास बात यह है कि बरसत रोड पर किसानों को उनकी जमीन का कब्जा दिलवाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने ही उन्हें मौके पर बुलाया था। इसे लेकर किसानों से पत्राचार किया गया था। जमीन की निशानदेही के लिए विभाग ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी सूचित किया। अब मंगलवार को फिर से विभाग अधिकारी दूसरे किसान की जमीन का कब्जा दिलाने की बात कहकर लौटे हैं।
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जीटी रोड कट से लेकर नूरवाला चुंगी तक करीब 11.52 एकड़ किसानों की जमीन पर पीडब्ल्यूडी ने बरसत रोड बना दिया। इस एरिया तक की जमीन चार किसानों की थी। यह एरिया पत्ती तरफ इंसार का है, जबकि इससे आगे का एरिया पत्ती तरफ मकदूम में आता है। इन किसानों ने अपनी जमीन के मुआवजे को लेकर कोर्ट में केस तक किए थे। पहला केस 1989 में किया गया था, जिस पर 1995 में कोर्ट ने किसानों के हक में फैसला भी दिया था। इसके बाद एक के बाद एक तीन केस और किए गए जिसमें उक्त किसानों की जीत हुई।
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पीड़ित किसान पक्ष के लोगों ने मौके पर पहुंचे लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग अधिकारियों से पूछा कि अगर उनका रिकॉर्ड 1979 में जल गया था तो सेक्टर 13-17, सेक्टर छह और अंसल जैसी सिटी कैसे विकसित हुई। यह एरिया पत्ती तरफ इंसार में आता था। जबकि ये सेक्टर तो 1992 के बाद ही विकसित हुए हैं। बिना रिकॉर्ड के 2020 में इनका इंतकाल कैसे दर्ज हो गया। अब काफी लोगों ने बरसत रोड पर फर्जी रजिस्ट्री तक करवा दुकानें और घर तक बनवा लिए हैं, बिना रिकॉर्ड के ये सब कैसे हो रहा है। किसानों के इन सवालों का अधिकारी कोई जवाब तक नहीं दे पाए।
एडवाकेट रघुबीर सिंह सैनी, एडवोकेट सुरभि शर्मा, संजय गुप्ता, राजकपूर और राजीव कपूर के नाम बरसत रोड की जमीन मलकियत है। कोर्ट में केस जीतने के बाद भी उन्हें मुआवजा या जमीन नहीं दे पाया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं चाहा था कि बरसत रोड बंद हो और लोगों का आवागमन बंद होने से उन्हें परेशानी हो। अब बरसत रोड पर जिन्होंने दुकानें इत्यादि तक बना ली हैं, वे उन्हें भी परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन विभाग उनको मजबूर कर रहा है। सरकार को चाहिए कि वे उनकी जमीन का मुआवजा उन्हें दे दें।
पीडब्ल्यूडी के एसडीओ प्रवीण छिक्कारा ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ किसानों को बरसत रोड का कब्जा देने पहुंचे थे, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर जमीन की निशानदेही तक नहीं कर पाए। इसलिए कब्जा नहीं दिया गया। जैसे ही राजस्व विभाग मौके की निशानदेही कराएगा। उसी समय कब्जा दिलवा देंगे।
मौके पर जमीन की निशानदेही करने पटवारी सुभाष के साथ पहुंचे कानूनगो विजेंद्र कादियान ने कहा कि उनके पास इस जमीन का नक्शा, सिजरा तक नहीं है। इसका पूरा रिकॉर्ड ही 1979 में जल गया था। बिना रिकॉर्ड के निशानदेही नहीं करवाई जा सकती।