पानीपत के वीर को नमन: जान हथेली पर रख सुभाष पुंडीर ने बचाई थी 27 लोगों की जान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिया वीरता पुरस्कार
पानीपत के सुभाष पुंडीर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीरता पुरस्कार प्रदान किया है। भारतीय तटरक्षक के प्रधान नाविक सुभाष पुंडीर ने ब्लास्ट में जहाज में फंसे 27 लोगों की जान बचाई थी। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए इस ऑपरेशन में साहस दिखाया था। लोग समुद्र में तड़प रहे थे। सुभाष ने बहादुरी दिखाते हुए उन्हें नया जीवन दिया था।
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भारतीय तटरक्षक के प्रधान नाविक सुभाष पुंडीर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीरता पुरस्कार से नवाजा है। यह पानीपत के साथ प्रदेशवासियों के लिए भी गर्व की बात है। यहां पहुंचे प्रधान नाविक सुभाष ने बताया कि जान हथेली पर रखकर ब्लास्ट हुए एक अन्य जहाज के 27 लोगों को उन्होंने जिंदा बचाया था। बड़ा भयावह था वह मंजर। लोगों की त्वचा तक हाथ में आ गई थी। उन्होंने बताया कि ऐसे माहौल में चारों तरफ तबाही बची थी। वे लोगों को बचाने के लिए समुद्र में कूद चुके थे। समुद्र का खारा पानी लोगों की जली त्वचा से लगने से वे तड़प रहे थे। जब लोगों को अपनी ओर खींच कर ला रहे थे, तो उनकी त्वचा निकलकर हाथ में आ जाती थी। लेकिन उन्होंने आपा नहीं खोया और बहादुरी का परिचय देते हुए उन्हें बाहर निकाला।
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गांव जौंधन कलां के रहने वाले हैं सुभाष
सुभाष ने बताया कि इस हादसे में कई लोगों ने अपनी जान तक गंवाई, लेकिन उन्होंने अपनी टीम के सहयोग से काफी लोगों को बचा लिया। इस काम के लिए उनका नाम राष्ट्रपति को वीरता पुरस्कार के लिए भेजा गया था। रक्षा मंत्री ने गत नौ अक्तूबर को उन्हें वीरता पुरस्कार से नवाजा। प्रधान नाविक सुभाष पुंडीर इसराना विधानसभा के अंतर्गत आने वाले गांव जौंधन कलां के निवासी हैं। उनके पिता का नाम सतबीर सिंह है। सुभाष ने 12 अगस्त 2019 की उस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि रोज की तरह उस दिन भी विशाखापट्टनम के पास अपने जहाजरानी रसमोनी में सवार होकर समुद्र में पेट्रोलिंग कर रहे थे।
ब्लास्ट के कारण आग ने पूरी तरह घेर लिया था जहाज को
सुबह करीब 11 बजे उनसे करीब एक से दो किलोमीटर दूर एक उपतटीय समर्थक पोत यानी जहाज में आग की सूचना मिली। उन्होंने इसकी सूचना अपने जहाज के सभी सदस्यों को दी और अपने जहाज को विस्फोट हुए जहाज के ओर ले गए। रेडियो के माध्यम से उस जहाज से संपर्क किया और सभी को बताया कि उनके जहाज में आग लगी है। उन्होंने सभी से जहाज के अगले हिस्से में आने की अपील की। देखते ही देखते जहाज को आग की लपटों ने अपनी चपेट में ले लिया और फिर एक जोरदार धमाका हुआ। इस ब्लास्ट से जहाज में सवार कुछ लोग तो उड़कर समुद्र में गिरे। क्षतिग्रस्त जहाज में सवार बाकी सदस्य भी समुद्र में छलांग लगा गए, जिनको एक-एक करके बाहर निकाला गया।
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ऐसे चला चुनौती भरा रेस्क्यू ऑपरेशन
सुभाष ने बताया कि ये रेस्क्यू ऑपरेशन उनके लिए चुनौती भरा था। उनके सामने वाले जहाज के लोग पानी में कूद चुके थे। इसके लोग घायल और थके हुए थे। वे अपने जहाज को आगे लेकर भी नहीं जा सकते थे, क्योंकि पानी में तैर रहे लोगों को जहाज टक्कर मार सकता था। उनकी आंखों के सामने लोग डूबने के कगार पर थे। उन्होंने अपने जहाज से डूबते लोगों को बचाने के लिए लाइफ जैकेट्स फेंकी। उनके लिए जहाज के पास सीढ़ी तक लगाई, लेकिन ये लोग सीढ़ी तक भी पहुंच नहीं पर रहे थे। इसके बाद सुभाष ने बहादुरी का परिचय देते हुए समुद्र में छलांग लगा दी। एक-एक घायल को पकड़कर जहाज के ऊपर तक चढ़ाया। ये ऑपरेशन करीब तीन घंटे तक चला, जिसमें उन्होंने 27 लोगों की जान बचाई।