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Panipat News: 46 दिन बाद ग्रीन जोन में आई टेक्सटाइल नगरी
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पानीपत। अब टेक्सटाइल नगरी की हवा धीरे धीरे स्वच्छ हो रही है। 46 दिन बाद पानीपत का एक्यूआई ग्रीन जोन में आ गया है। सोमवार को पानीपत का एक्यूआई 81 दर्ज किया गया है।
इससे पहले 16 अक्तूबर को पानीपत का एक्यूआई ग्रीन जोन में था। जब एक्यूआई 87 था। सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स पिछले 54 दिन में अपने सबसे निचले स्तर पर रहा है। अब हवा की रफ्तार तेज होने व पराली जलने की घटनाएं लगभग बंद होने से पर्यावरण के स्तर में सुधार हो रहा है।
पिछले पांच दिन से एक्यूआई लगातार गिर रहा है। अब हवा में धुएं की मात्रा बेहद कम हो गई है। हवा चलने से स्मॉग की चादर टूट गई है। इसलिए धूल के कण ऊपर उठ रहे हैं और स्मॉग नहीं बन रही। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ काफी हद तक कम हुई है। स्मॉग की चादर टूटने से नेत्र रोग संबंधी ओपीडी में भी कमी आई। पिछले मंगलवार तक जिला नागरिक अस्पताल की नेत्र संबंधी ओपीडी 200 से अधिक थी। बुधवार के बाद यह ओपीडी कम हुई है। सोमवार को नेत्र रोग संबंधी ओपीडी 121 हुई है। स्मॉग के कारण आंखों में जलन, लाली व सूजन जैसी समस्याएं बढ़ रही थी। अब अस्थमा संबंधी ओपीडी भी लगातार कम हो रही है। मंगलवार से हवा की रफ्तार बढ़ी है। पिछले हवा की रफ्तार पांच से छह किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच थी। अब यह रफ्तार लगभग दो गुना बढ़ी है।
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सोमवार को पानीपत में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 80 माइक्रो ग्राम घन मीटर तक पहुंच गई है। हवा में धुएं की मात्रा भी 82, कार्बन की मात्रा 06 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। यह एक सप्ताह पहले 80 तक पहुंच गई थी। हवा में कार्बन की मात्रा भी लगातार कम हो रही है। अब हवा में सल्फर ऑक्साइड की मात्रा 07 व नाइट्रोजनऑक्साइड की मात्रा 31 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि हवा की रफ्तार पहले के मुकाबले बढ़ी है। इससे स्मॉग की चादर टूटी है। अब धूल के कण व धुआं ऊपर उठ रहा है। पराली जलाने की घटनाएं भी बंद हो चुकी है। इसलिए एक्यूआई में सुधार हो रहा है।
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इससे पहले 16 अक्तूबर को पानीपत का एक्यूआई ग्रीन जोन में था। जब एक्यूआई 87 था। सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स पिछले 54 दिन में अपने सबसे निचले स्तर पर रहा है। अब हवा की रफ्तार तेज होने व पराली जलने की घटनाएं लगभग बंद होने से पर्यावरण के स्तर में सुधार हो रहा है।
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पिछले पांच दिन से एक्यूआई लगातार गिर रहा है। अब हवा में धुएं की मात्रा बेहद कम हो गई है। हवा चलने से स्मॉग की चादर टूट गई है। इसलिए धूल के कण ऊपर उठ रहे हैं और स्मॉग नहीं बन रही। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ काफी हद तक कम हुई है। स्मॉग की चादर टूटने से नेत्र रोग संबंधी ओपीडी में भी कमी आई। पिछले मंगलवार तक जिला नागरिक अस्पताल की नेत्र संबंधी ओपीडी 200 से अधिक थी। बुधवार के बाद यह ओपीडी कम हुई है। सोमवार को नेत्र रोग संबंधी ओपीडी 121 हुई है। स्मॉग के कारण आंखों में जलन, लाली व सूजन जैसी समस्याएं बढ़ रही थी। अब अस्थमा संबंधी ओपीडी भी लगातार कम हो रही है। मंगलवार से हवा की रफ्तार बढ़ी है। पिछले हवा की रफ्तार पांच से छह किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच थी। अब यह रफ्तार लगभग दो गुना बढ़ी है।
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सोमवार को पानीपत में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 80 माइक्रो ग्राम घन मीटर तक पहुंच गई है। हवा में धुएं की मात्रा भी 82, कार्बन की मात्रा 06 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। यह एक सप्ताह पहले 80 तक पहुंच गई थी। हवा में कार्बन की मात्रा भी लगातार कम हो रही है। अब हवा में सल्फर ऑक्साइड की मात्रा 07 व नाइट्रोजनऑक्साइड की मात्रा 31 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि हवा की रफ्तार पहले के मुकाबले बढ़ी है। इससे स्मॉग की चादर टूटी है। अब धूल के कण व धुआं ऊपर उठ रहा है। पराली जलाने की घटनाएं भी बंद हो चुकी है। इसलिए एक्यूआई में सुधार हो रहा है।