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कथा के चरित्र को गंभीरता से लेने पर खुलेंगे खुशियों के द्वार : डॉ. दिव्यानंद महाराज
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फोटो-4
-हनुमान जयंती के वार्षिकोत्सव पर की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। गीता व्यास डॉ. दिव्यानंद महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कथा में आने वाले चरित्रों को बड़ी गंभीरता से लेना चाहिए। तभी जीवन में उत्कर्ष के द्वार खुलेंगे।
उन्होंने ये बात सनातन धर्म महाबीर दल द्वारा हनुमान जयंती के वार्षिकोत्सव पर कथा में बुधवार को कही। मुख्यातिथि संजय अग्रवाल, गौरव जुनेजा, सौरभ जुनेजा, विक्की कत्याल व नरेंद्र अरोड़ा ने इससे पहले दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया।
डॉ. दिव्यानंद महाराज ने कहा कि हर रोज एक ही तरह की धार्मिक बातों को सुनना ही कथा को सुन लेना नहीं होता। इसी कारण से विशेष चरित्र भी साधारण लगने लग जाते हैं। हमें प्रत्येक चरित्र की गंभीरता और उनके बारे में जान लेना चाहिए। हनुमान का अवतार ही राम काज के लिए हुआ है। कहा भी गया है कि राम काज लगि तब अवतारा और राम का कार्य है आदर्श राम राज्य के रूप में धर्म की प्रतिष्ठा करना और आसुरी प्रवृत्ति का नाश करना। ऐसे में हनुमान एक सेवक के रूप में दास्य भक्ति का मूर्त रूप हुए। अतुलित बलशाली, कुशल वक्ता, निष्ठावान, पूर्ण ज्ञानी, समर्पित ही अच्छा सेवक हो सकता है।यह ठीक है कि सत्संग सौभाग्य से मिलता है, किंतु यह सब तभी ठीक होगा, यदि हमारे पास सत्संग श्रवण करने की सूक्ष्म कला भी हो। क्योंकि शास्त्रों की बातें केवल ज्ञानी ही नहीं करते। नासमझ लोग भी शास्त्रों की बातें कर देते हैं। उनके अर्थ उनकी मर्जी वाले होते हैं। इस अवसर पर प्रधान हेमंत लखीना, पंकज सेठी, कश्मीरी लाल, श्रवण लखीना, संतलाल जुनेजा, अशोक चुघ, पंकज ढींगरा व महेश जुनेजा मौजूद रहे।
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-हनुमान जयंती के वार्षिकोत्सव पर की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। गीता व्यास डॉ. दिव्यानंद महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कथा में आने वाले चरित्रों को बड़ी गंभीरता से लेना चाहिए। तभी जीवन में उत्कर्ष के द्वार खुलेंगे।
उन्होंने ये बात सनातन धर्म महाबीर दल द्वारा हनुमान जयंती के वार्षिकोत्सव पर कथा में बुधवार को कही। मुख्यातिथि संजय अग्रवाल, गौरव जुनेजा, सौरभ जुनेजा, विक्की कत्याल व नरेंद्र अरोड़ा ने इससे पहले दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया।
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डॉ. दिव्यानंद महाराज ने कहा कि हर रोज एक ही तरह की धार्मिक बातों को सुनना ही कथा को सुन लेना नहीं होता। इसी कारण से विशेष चरित्र भी साधारण लगने लग जाते हैं। हमें प्रत्येक चरित्र की गंभीरता और उनके बारे में जान लेना चाहिए। हनुमान का अवतार ही राम काज के लिए हुआ है। कहा भी गया है कि राम काज लगि तब अवतारा और राम का कार्य है आदर्श राम राज्य के रूप में धर्म की प्रतिष्ठा करना और आसुरी प्रवृत्ति का नाश करना। ऐसे में हनुमान एक सेवक के रूप में दास्य भक्ति का मूर्त रूप हुए। अतुलित बलशाली, कुशल वक्ता, निष्ठावान, पूर्ण ज्ञानी, समर्पित ही अच्छा सेवक हो सकता है।यह ठीक है कि सत्संग सौभाग्य से मिलता है, किंतु यह सब तभी ठीक होगा, यदि हमारे पास सत्संग श्रवण करने की सूक्ष्म कला भी हो। क्योंकि शास्त्रों की बातें केवल ज्ञानी ही नहीं करते। नासमझ लोग भी शास्त्रों की बातें कर देते हैं। उनके अर्थ उनकी मर्जी वाले होते हैं। इस अवसर पर प्रधान हेमंत लखीना, पंकज सेठी, कश्मीरी लाल, श्रवण लखीना, संतलाल जुनेजा, अशोक चुघ, पंकज ढींगरा व महेश जुनेजा मौजूद रहे।
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