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Panipat News: कॉलेज की दीवार पर विद्यार्थियों ने बनाई मधुबनी चित्रकला
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पानीपत। आर्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बी वॉक टेक्सटाइल, फैशन और इंटीरियर डिजाइनिंग विभाग और नगर निगम पानीपत भारत की पारंपरिक लोक कला को बढ़ावा देने का अनूठा प्रयास किया गया। विभाग के विद्यार्थियों ने कॉलेज की दीवार पर अद्भूत मधुबनी चित्रकलाएं बनाकर लोगों का मन मोह लिया। डॉ. संतोष टिक्कू को कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए डॉ. जगदीश ने बधाई दी और साथ ही विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि मधुबनी पेंटिंग बिहार के मधुबनी जिले से आती है। यह वह क्षेत्र है जिसे राजा जनक का राज्य माना जाता है और यही कारण है कि कलाकृति की इस शैली को मिथिला पेंटिंग के रूप में भी जाना जाता है। इस प्रकार की कलाकृति शुरू में केवल महिलाओं द्वारा की जाती थी और आज भी इस क्षेत्र में ज्यादातर महिला चित्रकारों का दबदबा है। कलाकृति उनकी आशाओं, सपनों और आकांक्षाओं को व्यक्त करती है और जब वे शादियों के लिए घरों को सजाती थीं तो उनकी खुशी छलक उठती थी।
उन्होंने बताया कि दीवार पेंटिंग के रूप में शुरू हुई यह कला कपड़े, कैनवास, लकड़ी, कागज, क्रॉकरी और सजावट के सामान सहित विभिन्न माध्यमों पर सुंदर मधुबनी कलाकृति विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई। पारंपरिक मधुबनी कला में अक्सर जटिल ज्यामितीय पैटर्न होते थे। जिसमे की कलाकृति मुख्य रूप से पौधों, फलों और सब्जियों जैसे प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त रंगों का उपयोग करके बनाई जाती थी। डॉ. संतोष टिक्कू ने बताया कि इन चित्रों को टेक्सटाइल और फैशन और इंटीरियर डिजाइनिंग विभाग के विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत के साथ बनाया है। मधुबनी चित्रकारी को बनाने के लिए लगभग 40 विद्यार्थी निरंतर एक सप्ताह तक सुबह से शाम तक कार्य करते रहे। इस कार्य को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए कॉलेज के प्राचार्य और नगर निगम पानीपत ने पूर्ण समर्थन, सामग्री और अन्य बुनियादी ढांचा प्रदान किया।
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डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि मधुबनी पेंटिंग बिहार के मधुबनी जिले से आती है। यह वह क्षेत्र है जिसे राजा जनक का राज्य माना जाता है और यही कारण है कि कलाकृति की इस शैली को मिथिला पेंटिंग के रूप में भी जाना जाता है। इस प्रकार की कलाकृति शुरू में केवल महिलाओं द्वारा की जाती थी और आज भी इस क्षेत्र में ज्यादातर महिला चित्रकारों का दबदबा है। कलाकृति उनकी आशाओं, सपनों और आकांक्षाओं को व्यक्त करती है और जब वे शादियों के लिए घरों को सजाती थीं तो उनकी खुशी छलक उठती थी।
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उन्होंने बताया कि दीवार पेंटिंग के रूप में शुरू हुई यह कला कपड़े, कैनवास, लकड़ी, कागज, क्रॉकरी और सजावट के सामान सहित विभिन्न माध्यमों पर सुंदर मधुबनी कलाकृति विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई। पारंपरिक मधुबनी कला में अक्सर जटिल ज्यामितीय पैटर्न होते थे। जिसमे की कलाकृति मुख्य रूप से पौधों, फलों और सब्जियों जैसे प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त रंगों का उपयोग करके बनाई जाती थी। डॉ. संतोष टिक्कू ने बताया कि इन चित्रों को टेक्सटाइल और फैशन और इंटीरियर डिजाइनिंग विभाग के विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत के साथ बनाया है। मधुबनी चित्रकारी को बनाने के लिए लगभग 40 विद्यार्थी निरंतर एक सप्ताह तक सुबह से शाम तक कार्य करते रहे। इस कार्य को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए कॉलेज के प्राचार्य और नगर निगम पानीपत ने पूर्ण समर्थन, सामग्री और अन्य बुनियादी ढांचा प्रदान किया।
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