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Panipat News: स्टाफ को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण नहीं, रेफर हो रहे नवजात
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पानीपत। सालों बाद भी स्वास्थ्य विभाग नवजातों को वेंटिलेटर की सुविधा नहीं दे पाया। एसएनसीयू वार्ड से वेंटिलेटर के अभाव में नवजात हायर सेंटर में रेफर हो रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में नवजातों के लिए दो वेंटिलेटर हैं लेकिन इनको चलाने का प्रशिक्षण स्टाफ को नहीं है। इसलिए वेंटिलेटर सेवा यहां शुरू नहीं हो पा रही है। जून से सितंबर तक 40 नवजात यहां से रेफर हुए जबकि फरवरी व मार्च में तो यहां से रिकॉर्ड 80 बच्चे रेफर हुए थे। तब यहां से एसएनसीयू वार्ड की इंचार्ज का तबादला कर दिया गया था। उन पर नवजातों को जान बूझकर रेफर करने के भी आरोप लगे थे।
एसएससीयू वार्ड में फिलहाल 17 नवजात दाखिल हैं। हर रोज औसतन दो नवजात यहां दाखिल होते हैं। यहां उन नवजातों को दाखिल करना पड़ता है जिनका ऑक्सीजन लेवल कम हो, पीलिया व निमोनिया से ग्रस्त हों, जिनका वजन सामान्य से काफी अधिक कम हो। अक्सर प्री मैच्योर डिलीवरी में पैदा हुए बच्चों के लिए यह वार्ड जीवनदायनी है। अब एसएनसीयू वार्ड में पांच सी पैप, दो बिली ब्लेंकेट व 21 वार्मर बेड हैं। यहां दो वेंटिलेटर हैं लेकिन यह वर्किंग में नहीं है।
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वेंटिलेटर की कमी से नवजात हो रहे रेफर
एसएनसीयू वार्ड की इंचार्ज डॉ. भावना ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड का रेफरल फिलहाल 6.09 प्रतिशत है। यह फरवरी में लगभग 25 प्रतिशत था। अब यहां से उन नवजातों को रेफर करना पड़ रहा है। जिनको वेंटिलेटर की सख्त आवश्यकता होती है। यहां के वेंटिलेटर फिलहाल वर्किंग में नहीं है। एनएससीयू वार्ड में दिन में डॉ. एकता व डॉ. भावना रहती हैं, रात को डॉ. अभिषेक व डॉ. कपिल की ड्यूटी होती है। यहां 12 नर्सिंग ऑफिसर का स्टाफ 24 घंटे उपलब्ध है।
वर्जन
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि वेंटिलेटर भी जल्द चालू कराए जाएंगे। अब रेफरल काफी कम हो चुका है, जो भी नवजात यहां से रेफर होता है उसके कारणों का भी अध्ययन होता है।
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जिला नागरिक अस्पताल में नवजातों के लिए दो वेंटिलेटर हैं लेकिन इनको चलाने का प्रशिक्षण स्टाफ को नहीं है। इसलिए वेंटिलेटर सेवा यहां शुरू नहीं हो पा रही है। जून से सितंबर तक 40 नवजात यहां से रेफर हुए जबकि फरवरी व मार्च में तो यहां से रिकॉर्ड 80 बच्चे रेफर हुए थे। तब यहां से एसएनसीयू वार्ड की इंचार्ज का तबादला कर दिया गया था। उन पर नवजातों को जान बूझकर रेफर करने के भी आरोप लगे थे।
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एसएससीयू वार्ड में फिलहाल 17 नवजात दाखिल हैं। हर रोज औसतन दो नवजात यहां दाखिल होते हैं। यहां उन नवजातों को दाखिल करना पड़ता है जिनका ऑक्सीजन लेवल कम हो, पीलिया व निमोनिया से ग्रस्त हों, जिनका वजन सामान्य से काफी अधिक कम हो। अक्सर प्री मैच्योर डिलीवरी में पैदा हुए बच्चों के लिए यह वार्ड जीवनदायनी है। अब एसएनसीयू वार्ड में पांच सी पैप, दो बिली ब्लेंकेट व 21 वार्मर बेड हैं। यहां दो वेंटिलेटर हैं लेकिन यह वर्किंग में नहीं है।
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वेंटिलेटर की कमी से नवजात हो रहे रेफर
एसएनसीयू वार्ड की इंचार्ज डॉ. भावना ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड का रेफरल फिलहाल 6.09 प्रतिशत है। यह फरवरी में लगभग 25 प्रतिशत था। अब यहां से उन नवजातों को रेफर करना पड़ रहा है। जिनको वेंटिलेटर की सख्त आवश्यकता होती है। यहां के वेंटिलेटर फिलहाल वर्किंग में नहीं है। एनएससीयू वार्ड में दिन में डॉ. एकता व डॉ. भावना रहती हैं, रात को डॉ. अभिषेक व डॉ. कपिल की ड्यूटी होती है। यहां 12 नर्सिंग ऑफिसर का स्टाफ 24 घंटे उपलब्ध है।
वर्जन
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि वेंटिलेटर भी जल्द चालू कराए जाएंगे। अब रेफरल काफी कम हो चुका है, जो भी नवजात यहां से रेफर होता है उसके कारणों का भी अध्ययन होता है।