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स्पिनिंग मिल मजदूरों ने मांगों को लेकर लगाए सरकार विरोधी नारे
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत।
Updated Mon, 28 Mar 2016 12:37 AM IST
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पानीपत
- फोटो : अमर उजाला
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स्पिनिंग मिल मजदूरों ने मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष व्यक्त किया। सैकड़ों मजदूर पूरा वेतन लेकर काम करेंगे-वरना चक्का जाम करेंगे नारे लगाते हुए काबड़ी रोड व इंडस्ट्रियल एरिया का मजदूर नारे लगाते हुए हॉली पार्क में पहुंचे। जहां एक विशाल पंचायत का आयोजन किया।
पंचायत की अध्यक्षता जयभगवान ने की। सीटू के जिला सचिव आनंद ज्वाहरा ने कहा केंद्र व राज्य सरकार मजदूरों के हित में बने श्रम कानूनों को नकारा बनाने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि फैक्टरी एक्ट संशोधन विधायक व श्रम कानूनों में बदलाव की जो प्रक्रिया चल रही है। वह मजदूरों के हालात को ज्यादा खराब करने और उन्हें फैक्टरी मालिकों का बना देने का मामला है। उनके तमाम अधिकार छीने जा रहे है। जो आज तक उन्हें कानून के रूप में मिले हुए है।
सरकार की गलत नीतियों के कारण अमीर व गरीब की खाई बड़ी है। उन्होंने कहा कि संघर्ष करने से ही अधिकार मिलते है। जिला सीटू के प्रधान सुनील दत्त ने कहा कि अपने देश में मजदूरों ने अंग्रेजी साम्राज्य से लड़ते हुए 1926 में ट्रेड यूनियन एक्ट बनवाने में सफलता हासिल की थी। जिसके तहत यूनियन रजिस्ट्रड होती थी। ऐसे ही आठ घंटे ड्यूटी, हाजरी रजिस्टर, ओवर टाइम सहित फैक्टरी एक्ट बना। मजदूरों के आंदोलन के बल पर औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 बना जिसमें न्यूनतम वेतन ईएसआई व पीएफ, बोनस, छुट्टी शामिल है। उन्होंने कहा इस महंगाई के दौर में इस न्यूनतम वेतन में मजदूर का गुजारा नहीं होता, लेकिन उसे इस न्यूनतम वेतन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इंडस्ट्रियल वर्कर्स यूनियन के नेता गुलाब ने कहा मजदूरों के लिए उद्योग के अंदर स्वास्थ्य व सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं है। स्पिनिंग मिलों का ज्यादातर मजदूर दमा व टीबी की बीमारी का शिकार है। सरकार मजदूरों के अधिकारों को कुचल रही है । मजदूरों का शोषण तेजी से बड़ा है। मजदूर पंचायत में स्पिनिंग के मजदूरों के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया गया। मजदूर पंचायत को यूनियन नेता महेश शर्मा, जियालाल, सुनील संयासी शक्ति, छोटे लाल, कपिल, सोनू, वीरभान, जयप्रकाश ने भी संबोधित किया।
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पंचायत की अध्यक्षता जयभगवान ने की। सीटू के जिला सचिव आनंद ज्वाहरा ने कहा केंद्र व राज्य सरकार मजदूरों के हित में बने श्रम कानूनों को नकारा बनाने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि फैक्टरी एक्ट संशोधन विधायक व श्रम कानूनों में बदलाव की जो प्रक्रिया चल रही है। वह मजदूरों के हालात को ज्यादा खराब करने और उन्हें फैक्टरी मालिकों का बना देने का मामला है। उनके तमाम अधिकार छीने जा रहे है। जो आज तक उन्हें कानून के रूप में मिले हुए है।
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सरकार की गलत नीतियों के कारण अमीर व गरीब की खाई बड़ी है। उन्होंने कहा कि संघर्ष करने से ही अधिकार मिलते है। जिला सीटू के प्रधान सुनील दत्त ने कहा कि अपने देश में मजदूरों ने अंग्रेजी साम्राज्य से लड़ते हुए 1926 में ट्रेड यूनियन एक्ट बनवाने में सफलता हासिल की थी। जिसके तहत यूनियन रजिस्ट्रड होती थी। ऐसे ही आठ घंटे ड्यूटी, हाजरी रजिस्टर, ओवर टाइम सहित फैक्टरी एक्ट बना। मजदूरों के आंदोलन के बल पर औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 बना जिसमें न्यूनतम वेतन ईएसआई व पीएफ, बोनस, छुट्टी शामिल है। उन्होंने कहा इस महंगाई के दौर में इस न्यूनतम वेतन में मजदूर का गुजारा नहीं होता, लेकिन उसे इस न्यूनतम वेतन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इंडस्ट्रियल वर्कर्स यूनियन के नेता गुलाब ने कहा मजदूरों के लिए उद्योग के अंदर स्वास्थ्य व सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं है। स्पिनिंग मिलों का ज्यादातर मजदूर दमा व टीबी की बीमारी का शिकार है। सरकार मजदूरों के अधिकारों को कुचल रही है । मजदूरों का शोषण तेजी से बड़ा है। मजदूर पंचायत में स्पिनिंग के मजदूरों के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया गया। मजदूर पंचायत को यूनियन नेता महेश शर्मा, जियालाल, सुनील संयासी शक्ति, छोटे लाल, कपिल, सोनू, वीरभान, जयप्रकाश ने भी संबोधित किया।
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