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उम्मीद की मशाल: आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद सिमरन ने खुली आंखों से देखा सपना, कर रही साकार

Mon, 19 Sep 2022 02:22 AM IST
भूपेंद्र सिंह नीरज गिरी, संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत (हरियाणा)
नीरज गिरी, संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 19 Sep 2022 02:22 AM IST
सार

सीमरन ने उधार लेकर और ट्यूशन पढ़ाकर बीटेक की पढ़ाई की। वाइफाई लगवाने और फीस देने के भी पैसे नहीं थे। पिता निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मी है। बेटी को 12 कंपनियों से जॉब का ऑफर मिला था।

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Simran of Pattikalyana of Panipat made her dream come true despite financial constraints
सिमरन का परिवार के साथ फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कहते हैं प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इसे साबित कर दिखाया है हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा कस्बे के गांव पट्टीकल्याणा की रहने वाली सिमरन ने, जिसके पिता एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। माता-पिता का सपना था कि बेटी इंजीनियर बने, लेकिन आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी इसमें बड़ा रोड़ा थी।
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विपरीत परिस्थितियों में भी सिमरन ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मेहनत से माता-पिता संग स्वयं के सपने को साकार किया। आईटी से बीटेक करने के बाद सिमरन के पास 12 कंपनियों से जॉब का ऑफर था, जिसमें उसने बेहतर को चुना। मुकाम हासिल करने के बाद भी सिमरन की उड़ान अभी थमी नहीं है। जॉब के साथ ही अब वह एमबीए करना चाहती है। 

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सिमरन ने बताया कि माता-पिता के साथ उसकी भी इच्छा थी कि वह इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कॅरिअर बनाए। यही कारण है कि हरियाणा बोर्ड की परीक्षा पास करने के बाद आईटी से बीटेक करने का निश्चय किया। मां और पिता से हौसला मिला तो उसने उसी कॉलेज में दाखिला लिया, जिसमें पिता चतुर्थ श्रेणी कर्मी हैं।

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हरियाणा बोर्ड से मिली छात्रवृत्ति से उसने लैपटॉप भी खरीद लिया पर हर माह नेट का खर्च उस पर भारी पड़ रहा था, जबकि बीटेक करने के दौरान वाई फाई और आधुनिक तकनीक की जरूरत होती है। ऐसे में उसने कॉलेज की कंप्यूटर लैब का सहारा लिया। साथ ही किताबों की कमी दूर करने के लिए लाइब्रेरी की मदद ली। बेटी की मुश्किलों को देखते हुए पिता ने उधार के रुपयों से घर में वाई फाई का इंतजाम किया।

 

सिमरन के अनुसार घर की आर्थिक तंगी को देखते हुए उसने कॉलेज के बाद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। विपरीत हालात में भी मेहनत के बल पर बीटेक करने के बाद इस वर्ष सिमरन के पास 12 कंपनियों से जॉब का आफर था, जिसमें उसने कैपजैमिनी को चुना।

 

फिलहाल वह साढ़े छह लाख रुपये सालाना पैकेज पर वर्क फ्रॉम होम कर रही है। अमर उजाला से बातचीत में उसने बताया कि वह बिजनेस एनालिस्ट है। उसका कहना है कि कंप्यूटर इंजीनियरिंग में अपार संभावनाएं हैं, इसलिए वह एमबीए कर इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती है। 



पिता बोले- खुली आंखों से देखा सपना हो रहा पूरा
बेटी की सफलता से उत्साहित पिता हरकेश का कहना है कि सिमरन की मेहनत रंग लाई है। उसने और हमने जो सपना खुली आंखों से देखा था वह पूरा हो रहा है। इसके लिए उसने कड़ी मेहनत की है। वहीं सिमरन ने बताया कि पहले वह जॉब कर परिवार की आर्थिक तंगी दूर करने में मदद करेगी। फिर एमबीए में दाखिला लेगी। 

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