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Panipat News: गोमुख, गंगोत्री और हरिद्वार से जल लेकर पहुंचे शिव के भक्त
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पानीपत। महाशिवरात्रि पर औद्योगिक नगरी शिवमय हो गई। बाबा के भक्त गंगोत्री, गोमुख, ऋषिकेश व हरिद्वार से जल लेकर अपने-अपने शिवालय पहुंचे। आधी रात के बाद जलाभिषेक किया। इस साल फाल्गुन माह में डाक कांवड़ियों की संख्या 20 प्रतिशत अधिक रही। सड़कों पर शिव भक्तों के लिए उचित व्यवस्था रही। इससे निजी वाहन चालकों को थोड़ी परेशानी हुई।
उत्तर प्रदेश से यमुना पार करते ही कांवड़ियों का रंग चढ़ जाता है। यहां से सोनीपत, गोहाना, रोहतक, जींद और हिसार के अलावा करनाल के कांवड़िए होकर आते हैं। शनिवार को सुबह ही डाक कांवड़ियों का आना शुरू हो गया। दोपहर बाद यह और भी तेज हो गया। जींद और हिसार के कांवड़िए जीटी रोड पर शहर के अंदर से होकर आए, इससे शहर में दिन के समय कई बार जाम की स्थिति पैदा हुई। परढ़ाना गांव के रिंकू और सीटू ने बताया कि वे हर साल सावन में हरिद्वार से डाक कांवड़ लेकर आते हैं।
इस साल पहली बार फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि पर गोमुख से डाक कांवड़ लेकर आए हैं, इसमें करीब एक सप्ताह का समय लगा। वे सोमवार को गांव से गोमुख के लिए चले थे और बुधवार की सुबह गोमुख पहुंचे। वीरवार को सुबह करीब 11 बजे ज लेकर चले। उनको गांव तक आने में तीन दिन का समय लगा। खलीला गांव के राजेश ने बताया कि वे शुक्रवार की शाम को हरिद्वार से डाक कांवड़ लेने गए थे। शनिवार की सुबह हरिद्वार से जल लेकर चले और रात्रि 12 बजे से पहले ही गांव पहुंच गए थे। गांव के शिवालय में जलाभिषेक किया। शाहपुर गांव के संजीव ने बताया कि वे पैदल कांवड़ लेकर आए हैं। उनके बेटे भी उनके साथ हैं।
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उत्तर प्रदेश से यमुना पार करते ही कांवड़ियों का रंग चढ़ जाता है। यहां से सोनीपत, गोहाना, रोहतक, जींद और हिसार के अलावा करनाल के कांवड़िए होकर आते हैं। शनिवार को सुबह ही डाक कांवड़ियों का आना शुरू हो गया। दोपहर बाद यह और भी तेज हो गया। जींद और हिसार के कांवड़िए जीटी रोड पर शहर के अंदर से होकर आए, इससे शहर में दिन के समय कई बार जाम की स्थिति पैदा हुई। परढ़ाना गांव के रिंकू और सीटू ने बताया कि वे हर साल सावन में हरिद्वार से डाक कांवड़ लेकर आते हैं।
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इस साल पहली बार फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि पर गोमुख से डाक कांवड़ लेकर आए हैं, इसमें करीब एक सप्ताह का समय लगा। वे सोमवार को गांव से गोमुख के लिए चले थे और बुधवार की सुबह गोमुख पहुंचे। वीरवार को सुबह करीब 11 बजे ज लेकर चले। उनको गांव तक आने में तीन दिन का समय लगा। खलीला गांव के राजेश ने बताया कि वे शुक्रवार की शाम को हरिद्वार से डाक कांवड़ लेने गए थे। शनिवार की सुबह हरिद्वार से जल लेकर चले और रात्रि 12 बजे से पहले ही गांव पहुंच गए थे। गांव के शिवालय में जलाभिषेक किया। शाहपुर गांव के संजीव ने बताया कि वे पैदल कांवड़ लेकर आए हैं। उनके बेटे भी उनके साथ हैं।
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