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Haryana: राष्ट्र को विश्वगुरु बनाने के लिए फाइव एस पर चलेगा संघ, जानिए क्या है इसकी परिकल्पना

Tue, 14 Mar 2023 06:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह जगमहेंद्र सरोहा, अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)
जगमहेंद्र सरोहा, अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 14 Mar 2023 06:01 AM IST
सार

स्वार्थी और राष्ट्रघातक तत्वों की कुटिलता के कारण सामाजिक व राष्ट्रीय चुनौतियां पर चिंता जताई गई। वहीं सही सोच के साथ विकास, सामाजिक सहमति निर्माण और सकारात्मक परिवर्तन के कई प्रयत्न भी नजर आ रहे हैं। 

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RSS will run on Five S to make the nation Vishvaguru
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत व साथ में मौजूद सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश के कई हिस्सों में मतांतरण के संकेत पहले ही दिए थे। उच्चतम न्यायालय ने भी इस पर चिंता व्यक्त की थी। अब संघ इन सबको पार पाते हुए राष्ट्र को विश्वगुरु बनाने के लिए फाइव एस (5-एस) पर काम करेगा। इसके तहत स्वाभिमानी, समृद्धशाली, सुशील संपन्न, संगठित एवं समरस भारत के साथ समग्र विकास की राह पर आगे बढ़ेगा। संघ का मानना है कि कुछ स्वार्थी, राष्ट्रघातक तत्वों की कुटिलता के कारण कई सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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ये लोग देश की एकता व उन्नति के विरुद्ध नई साजिश बनाते हैं। समाज में भ्रम फैलाना उनका पेशा बन गया है। इन सबके बीच खुशी इस बात की है कि समाज में एकजुटता बढ़ रही है। साथ ही विभिन्न आयामों में उत्साही सहभागिता परिवर्तन की लहर का संकेत है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की समालखा के पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र में चल रही तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन सोमवार को प्रस्तावों पर चर्चा करने के साथ राष्ट्र को मजबूत बनाने पर चिंतन किया गया। सुबह नौ बजे शुरू हुई बैठक रात सवा दस बजे तक चार सत्र में चली।
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इसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपना संदेश दिया। वहीं सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले का वार्षिक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) 2022-23 समाज ही नहीं देश को चौंका देने वाला रहा। उन्होंने इसमें देश के वर्तमान परिदृश्य में खुशी के साथ चिंता होने की बात रखी। साथ ही संगठनात्मक उपलब्धियों को सुदृढ़ करते हुए समस्या व चुनौतियों का क्षमता से सामना करते हुए समाज में सर्वत्र आत्मविश्वास का दीप जलाकर सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समर्पण भाव से राष्ट्र साधना बढ़ाएंगे तो परिणाम सार्थक आएंगे।

मजहबी उन्माद का हो रहा विरोध
वार्षिक प्रतिवेदन में कहा गया कि मजहबी उन्माद और हिंदू युवतियों को बहला फुसलाकर शादी करने और फिर उनकी हत्या तक कर दी जाती हैं। कई प्रांतों में जमीन पर कब्जा तक किया जा रहा है। उदयपुर, अमरावती व शिवमोगा में इस तरह के कृत्य हुए हैं। जयपुर, मुंबई व महाराष्ट्र सहित अन्य स्थानों पर हिंदू समाज ने बड़ी संख्या में प्रदर्शन किया है। इससे समाज में जागृति आई है। इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया व कनाडा में कुछ शक्तियों ने हिंदू परिवार व मंदिर पर हिंसक हमले किए तो हिंदू संगठनों ने भी प्रतिरोध किया।

आत्मनिर्भर भारत की यात्रा शुरू
संघ का कहना है कि भारत की आजादी का अमृत महोत्सव देश और विदेश में भी भारतीयों ने खुशी के साथ मनाया। नए आत्मविश्वासयुक्त, आत्मसम्मान से भरा और आत्मनिर्भर भारत की यात्रा का दौर शुरू हो गया है। राजपथ को बदलकर कर्तव्य पथ किया गया है। साथ ही विक्टोरिया रानी की मूर्ति के स्थान पर नोजी सुभाष बाबू की मूर्ति की स्थापना इस बदलाव का प्रतीक भी है।

प्रतिनिधि सभा में ‘स्व’ आधारित राष्ट्र के नवोत्थान का संकल्प प्रस्ताव पारित
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में स्व आधारित राष्ट्र के नवोत्थान का संकल्प लेने का प्रस्ताव सोमवार को पारित किया गया। इस प्रस्ताव को रविवार को बैठक के पहले दिन चर्चा में रखा गया था। इसके अलावा भगवान महावीर के परिनिर्वाण, स्वामी दयानंद सरस्वती के जन्मशताब्दी वर्ष और शिवाजी महाराज के राजभिषेक के 300 वर्ष पर होने वाले कार्यक्रमों के प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।


संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि विश्व कल्याण के लिए भारत के ‘स्व’ की सुदीर्घ यात्रा हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रही है। विदेशी आक्रमणों और संघर्ष के काल में भारतीय जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ। सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व धार्मिक व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुंची। इस कालखंड में संतों व महापुरुषों के नेतृत्व में संपूर्ण समाज ने सतत् संघर्षरत रहते हुए अपने ‘स्व’ को बचाए रखा। इस संग्राम की प्रेरणा स्वधर्म, स्वदेशी और स्वराज की ‘स्व’ त्रयी में निहित थी, जिसमें समस्त समाज की सहभागिता रही।

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