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Panipat News: जुर्माना न भरने वाली इकाइयों का नहीं होगा नवीनकरण
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फैक्टरी की चिमनी से निकलता धुआं। आर्काइव
- फोटो : Archive
जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) पर्यावरण नियमों की अनदेखी बरतने और जुर्माना न भरने पर डिफाल्टरों के खिलाफ सख्त हो गया है। लंबित पर्यावरण मुआवजे (ईसी) का बकाया जमा करने पर कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) और कंसेंट टू एस्टेब्लिश (सीटीई) का नवीनीकरण रोक दिया है।
औद्योगिक और व्यावसायिक इकाइयों को जुर्माना राशि जमा कराने पर ही सीटीओ और सीटीई जारी किया जाएगा। बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार क्षेत्रीय अधिकारियों को इसके निर्देश दिए हैं।
एचएसपीसीबी ने 89 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर 55.28 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया था। बोर्ड अब तक इनमें से केवल 6.95 करोड़ रुपये (लगभग 12.58 प्रतिशत) ही वसूल कर पाया है। वहीं 48.28 करोड़ रुपये की राशि अभी बकाया है। 89 संस्थाओं में से 63 ने ही मुआवजा जमा किया है। ऐसी 26 इकाइयां अब भी डिफाल्टर हैं।
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सरकारी महकमे भी डिफाल्टर
पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने और जुर्माना न देने वालों में केवल निजी उद्योग ही नहीं, बल्कि बड़े सरकारी विभाग और संस्थान भी शामिल हैं।
बकायादारों की इस सूची में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), आईओसीएल की पानीपत रिफाइनरी, नेशनल फर्टिलाइजर्स प्लांट, पानीपत थर्मल पावर स्टेशन, लिकर फैक्टरी और जनस्वास्थ्य विभाग भी शामिल हैं।
भागने वाले मालिकों पर कसेगा शिकंजा
अवैध रूप से चल रही डाइंग, डेनिम और स्क्रैप इकाइयों पर कार्रवाई की जाती है। कुछ के मालिक सील होने के बाद अक्सर चले जाते हैं। इससे रिकवरी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती है। सदस्य सचिव ने क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करें। ऐसे लोगों की जमीन को भू-राजस्व (लैंड रेवेन्यू) घोषित कर रिकवरी की जाएं। आरओ भूपेंद्र चहल ने बताया कि सभी इकाइयों को नोटिस दिए जा चुके हैं। अब इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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पानीपत। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) पर्यावरण नियमों की अनदेखी बरतने और जुर्माना न भरने पर डिफाल्टरों के खिलाफ सख्त हो गया है। लंबित पर्यावरण मुआवजे (ईसी) का बकाया जमा करने पर कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) और कंसेंट टू एस्टेब्लिश (सीटीई) का नवीनीकरण रोक दिया है।
औद्योगिक और व्यावसायिक इकाइयों को जुर्माना राशि जमा कराने पर ही सीटीओ और सीटीई जारी किया जाएगा। बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार क्षेत्रीय अधिकारियों को इसके निर्देश दिए हैं।
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एचएसपीसीबी ने 89 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर 55.28 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया था। बोर्ड अब तक इनमें से केवल 6.95 करोड़ रुपये (लगभग 12.58 प्रतिशत) ही वसूल कर पाया है। वहीं 48.28 करोड़ रुपये की राशि अभी बकाया है। 89 संस्थाओं में से 63 ने ही मुआवजा जमा किया है। ऐसी 26 इकाइयां अब भी डिफाल्टर हैं।
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सरकारी महकमे भी डिफाल्टर
पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने और जुर्माना न देने वालों में केवल निजी उद्योग ही नहीं, बल्कि बड़े सरकारी विभाग और संस्थान भी शामिल हैं।
बकायादारों की इस सूची में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), आईओसीएल की पानीपत रिफाइनरी, नेशनल फर्टिलाइजर्स प्लांट, पानीपत थर्मल पावर स्टेशन, लिकर फैक्टरी और जनस्वास्थ्य विभाग भी शामिल हैं।
भागने वाले मालिकों पर कसेगा शिकंजा
अवैध रूप से चल रही डाइंग, डेनिम और स्क्रैप इकाइयों पर कार्रवाई की जाती है। कुछ के मालिक सील होने के बाद अक्सर चले जाते हैं। इससे रिकवरी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती है। सदस्य सचिव ने क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करें। ऐसे लोगों की जमीन को भू-राजस्व (लैंड रेवेन्यू) घोषित कर रिकवरी की जाएं। आरओ भूपेंद्र चहल ने बताया कि सभी इकाइयों को नोटिस दिए जा चुके हैं। अब इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।