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रक्षाबंधन : 474 साल बाद पर बना गजकेसरी योग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 12:14 AM IST
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Rakshabandhan: Gajakesari Yoga formed after 474 years
इस बार रक्षाबंधन पर्व लोगों के लिए बड़ा खास रहेगा, क्योंकि इस दिन 474 साल बाद गजकेसरी योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन का त्योहार भद्रा योग से मुक्त रहेगा। रक्षाबंधन पर कुंभ राशि में चंद्रमा और गुरु वक्री चाल चलेंगे। दोनों ग्रहों की इस युति की वजह से इस बार ‘गजकेसरी योग’ बन रहा है। रक्षाबंधन का त्योहार शोभन, अमृत और गजकेसरी योग के साथ मनेगा।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि जब किसी की कुंडली में चंद्रमा और गुरु एक दूसरे की तरफ दृष्टि कर बैठे हों तो गजकेसरी योग बनता है। ऐसे जातक भाग्यशाली होते हैं। उन्होंने बताया कि सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर 10 बजकर 34 मिनट तक शोभन योग भी रहेगा, जो रक्षाबंधन को और भी अच्छा बनाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस खास संयोग पर अगर आप जनेऊ बदलने का कार्य करते हैं तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। इस प्रथा को श्रावणी उपाकर्म भी कहते हैं। श्रावणी उपाकर्म में यज्ञोपवीत पूजन और उपनयन संस्कार करने का विधान है। वहीं उपायुक्त सुशील सारवान ने सभी जिला वासियों को रक्षाबंधन की बधाई देते हुए सभी के लिए मंगलकामना की है।
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राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
राखी पर भद्राकाल का विचार अवश्य करना चाहिए लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं रहेगी। भद्राकाल राखी के अगले दिन यानी 23 अगस्त को सुबह 5 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस बार राखी बांधने के लिए आपको 22 अगस्त की सुबह 5 बजकर 50 मिनट से शाम 6 बजकर 03 मिनट का समय मिलेगा।
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