{"_id":"ff85fd52d62ff98eb14a50b7f211e61d","slug":"railway-panipat-bridge-news-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"जान जोखिम में डालकर बच्चे करते हैं रेलवे लाइन पार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जान जोखिम में डालकर बच्चे करते हैं रेलवे लाइन पार
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
Updated Sun, 23 Aug 2015 12:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलवे लाइनों को पार करना दंडनीय अपराध है। इन शब्दों की गूंज रेलवे स्टेशनों पर अकसर हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में गूंजती है। लेकिन प्रशासन की अनदेखी से लोग यह अपराध करने पर मजबूर हैं।
लाइनों पर फुट ओवरब्रिज की सुविधा न होने और अंडरब्रिज में बारिश पानी भरने के चलते बंद होने पर लोगों को मजबूरन अपनी जान जोखिम में डालकर लाइनों को पार करना पड़ रहा है। लेकिन रेलवे प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
रेलवे अंडर ब्रिजों में भरा बरसात का पानी तीन विभागों में उलझ कर रह गया है। बरसाती पानी से बंद हुए अंडर ब्रिज करीब डेढ़ माह बाद भी नहीं खुले हैं।
इससे सावन की पहली बरसात के बाद से ही अंडरब्रिज बंद हो गए हैं। शहर में इस समय केवल एक ही अंडरब्रिज से लोगों का आना जाना है।
जबकि गोहाना रोड अंडरब्रिज पहली बारिश होने के बाद से ही बंद पड़ा है। जो रेलवे, नगर निगम और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र की लड़ाई में उलझ कर रह गया है। शहर के अन्य अंडरब्रिज भी बरसों से बंद हैं। रेलवे लाइनों को पार करने का अन्य कोई भी रास्ता न होने से लोगों को मजबूरन अपनी जान जोखिम में डालकर लाइनों से ही होकर गुजरना पड़ रहा है।
विज्ञापन
ऐसा नहीं है कि लाइनों पर कभी हादसे नहीं होते। हर महीने दर्जनों की संख्या में लोग ट्रेनों की चपेट में आने से मौत का शिकार होते हैं। लेकिन उसके बाद भी शहर की जनता व प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नही है।
अंडर ब्रिज बंद होने के कारण सबसे ज्यादा खतरा स्कूली बच्चों को है। रेलवे लाइन कवर न होने के कारण स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन को पार करते हैं। स्कूल से छुट्टी के समय सैकड़ों की संख्या छोटे बच्चे इन रेलवे लाइनों को पार करते हैं। स्कूल से छुट्टी के बाद स्कूल प्रबंधन को भी इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि बच्चे किस तरह अपने घर जा रहे हैं।
सिवाह गांव से लेकर सचिवालय तक बने आठ अंडरब्रिज में से सात अंडर ब्रिज गंदगी व बरसाती पानी के चलते बंद पड़े हैं। केवल असंध रोड अंडरब्रिज से ही लोगों का आना जाना है। जिससे वहां भी हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। प्रशासन की इस अनदेखी से लाइनपार क्षेत्र की 18 कॉलोनियों के करीब पौने दो लाख लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
रेलवे स्टेशन पर बने फुटओवर ब्रिज का भी शहर की जनता को कोई फायदा नहीं है। स्टेशन से लाइन पार करने के लिए व्यक्ति के पास प्लेटफार्म टिकट होना जरुरी है। इसके अलावा अंसध रोड व गोहाना रोडवे के बीच की दूरी तीन किलोमीटर है।ऐसे में यदि आठ मरला कॉलोनी से किसी को पावर हाउस जाना हो तो उसे दो किलोमीटर का चक्कर काटकर आना पड़ता है। लोग उस लंबे चक्कर से बचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर लाइनें पार करते हैं।
रेलवे लाइनों के पास तार बाड़ की व्यवस्था नहीं है। रेलवे पुलिस तो केवल स्टेशन के आस पास ही लाइनों को क्रास करने से रोक सकती है। इसके व्यापक प्रबंध तो जिला प्रशासन ही कर सकता है।
जीएस गौतम आरपीएफ प्रभारी पानीपत।
विज्ञापन
लाइनों पर फुट ओवरब्रिज की सुविधा न होने और अंडरब्रिज में बारिश पानी भरने के चलते बंद होने पर लोगों को मजबूरन अपनी जान जोखिम में डालकर लाइनों को पार करना पड़ रहा है। लेकिन रेलवे प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
विज्ञापन
रेलवे अंडर ब्रिजों में भरा बरसात का पानी तीन विभागों में उलझ कर रह गया है। बरसाती पानी से बंद हुए अंडर ब्रिज करीब डेढ़ माह बाद भी नहीं खुले हैं।
इससे सावन की पहली बरसात के बाद से ही अंडरब्रिज बंद हो गए हैं। शहर में इस समय केवल एक ही अंडरब्रिज से लोगों का आना जाना है।
जबकि गोहाना रोड अंडरब्रिज पहली बारिश होने के बाद से ही बंद पड़ा है। जो रेलवे, नगर निगम और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र की लड़ाई में उलझ कर रह गया है। शहर के अन्य अंडरब्रिज भी बरसों से बंद हैं। रेलवे लाइनों को पार करने का अन्य कोई भी रास्ता न होने से लोगों को मजबूरन अपनी जान जोखिम में डालकर लाइनों से ही होकर गुजरना पड़ रहा है।
विज्ञापन
ऐसा नहीं है कि लाइनों पर कभी हादसे नहीं होते। हर महीने दर्जनों की संख्या में लोग ट्रेनों की चपेट में आने से मौत का शिकार होते हैं। लेकिन उसके बाद भी शहर की जनता व प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नही है।
अंडर ब्रिज बंद होने के कारण सबसे ज्यादा खतरा स्कूली बच्चों को है। रेलवे लाइन कवर न होने के कारण स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन को पार करते हैं। स्कूल से छुट्टी के समय सैकड़ों की संख्या छोटे बच्चे इन रेलवे लाइनों को पार करते हैं। स्कूल से छुट्टी के बाद स्कूल प्रबंधन को भी इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि बच्चे किस तरह अपने घर जा रहे हैं।
सिवाह गांव से लेकर सचिवालय तक बने आठ अंडरब्रिज में से सात अंडर ब्रिज गंदगी व बरसाती पानी के चलते बंद पड़े हैं। केवल असंध रोड अंडरब्रिज से ही लोगों का आना जाना है। जिससे वहां भी हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। प्रशासन की इस अनदेखी से लाइनपार क्षेत्र की 18 कॉलोनियों के करीब पौने दो लाख लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
रेलवे स्टेशन पर बने फुटओवर ब्रिज का भी शहर की जनता को कोई फायदा नहीं है। स्टेशन से लाइन पार करने के लिए व्यक्ति के पास प्लेटफार्म टिकट होना जरुरी है। इसके अलावा अंसध रोड व गोहाना रोडवे के बीच की दूरी तीन किलोमीटर है।ऐसे में यदि आठ मरला कॉलोनी से किसी को पावर हाउस जाना हो तो उसे दो किलोमीटर का चक्कर काटकर आना पड़ता है। लोग उस लंबे चक्कर से बचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर लाइनें पार करते हैं।
रेलवे लाइनों के पास तार बाड़ की व्यवस्था नहीं है। रेलवे पुलिस तो केवल स्टेशन के आस पास ही लाइनों को क्रास करने से रोक सकती है। इसके व्यापक प्रबंध तो जिला प्रशासन ही कर सकता है।
जीएस गौतम आरपीएफ प्रभारी पानीपत।