फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Price of paddy is not available, due to withdrawal of big exporter the rate is reduced by Rs. 1000

Panipat News: धान का नहीं मिल रहा भाव, बड़े एक्सपोर्टर के पीछे हटने से एक हजार तक कम रेट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 27 Sep 2024 09:52 PM IST
विज्ञापन
Price of paddy is not available, due to withdrawal of big exporter the rate is reduced by Rs. 1000
पानीपत। सीजन की शुरुआत में धान उत्पादक किसानों को बड़ा झटका लगा है। चावल के बड़े निर्यातकों के अपनी मांगों को लेकर खरीद कार्य में पीछे हटने और सरकारी खरीद शुरू न होने से धान का पूरा रेट नहीं मिल पा रहा है। पिछले साल चार हजार रुपये तक में बिकने वाली धान की 1509 किस्म का रेट अब 2300 से 2700 रुपये है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल डेढ़ से दो हजार रुपये तक सस्ती धान बेचनी पड़ रही है। किसानों को प्रति एकड़ आठ से दस हजार रुपये का फटका लग रहा है।
विज्ञापन

जिले में करीब 85 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। किसानों ने 1509 की अगेती किस्म के साथ धान की मुच्छल समेत अन्य कई किस्मों कटाई शुरू कर दी है। पानीपत, समालखा, इसराना व मतलौडा समेत छह मंडियों में धान की आवक हर रोज तेज हो रही है। मंडियों में किसानों को 1509 किस्म के उम्मीद अनुसार रेट नहीं मिल पा रहे हैं। मतलौडा अनाज मंडी में वीरवार को सबसे अधिक 2661 रुपये प्रति क्विंटल रही। इसी तरह का रेट दूसरी मंडियों में रहा। इन सबके बीच मौसम के अचानक करवट लेने से सबकी चिंता बढ़ा दी है। मौसम विशेषज्ञों ने अगले तीन दिन हल्के से मध्यम बादल छाए रहने का अनुमान जताया है। कवी गांव निवासी हरपाल सिंह व शहरमालपुर निवासी प्रदीप ने बताया कि हर सीजन में किसान को रेट व खरीद को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब मौसम धान के अनुकूल नहीं लग रहा है। ऐसे में किसान धान की कटाई कर इसको साथ के साथ बेचना चाहता है। मंडियों में 1509 किस्म का पिछले साल का भी रेट नहीं है, जबकि महंगाई काफी बढ़ गई है। ऐसे में किसानों के लिए नुकसान देने वाली साबित हो रही है।
विज्ञापन


धान के रेट न बढ़ पाने के ये दो बड़े कारण
कारण नंबर-1
सरकार पीआर धान की खरीद एक अक्टूबर को करेगी। बड़े मिलर और निर्यातक अब तक धान खरीदने को आगे नहीं आ रहे हैं। इसका बड़ा कारण मिलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा रहा है। पहले सरकार ने 1509 किस्त पर एमईपी-न्यूनतम निर्यात मूल्य की शर्त रखी थी। अब इसको हटा दिया गया है। बावजूद इसके रेट नहीं बढ़ पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



कारण नंंबर-2
पिछले साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की मांग अधिक थी। ऐसे में धान की बासमति की किस्मों में 1509, 17, 18 व 521 के रेट काफी ऊंचे चले गए थे। 1509 का रेट चार हजार और 521 का रेट करीब 5200 रुपये प्रति क्विंटल तक चला गया था। व्यापारियों ने धान की खरीद कर स्टॉक लगा लिया था, लेकिन बाद में इसकी मांग अपेक्षाकृत नहीं रही। मंडियों में आज भी व्यापारियों के पास लाखों क्विंटल धान का स्टॉक है। ऐसे में वे नई धान खरीदने को तैयार नहीं हो पा रहे हैं।


बॉक्स
लोकल आढ़ती और व्यापारी ही आगे
मतलौडा अनाज मंडी के आढ़ती सतीश गर्ग ने बताया कि पिछली बार धान की 1509 समेत अन्य किस्म की मांग अधिक थी। ऐसे में रेट भी अधिक थे। व्यापारी व निर्यातकों के पास पिछले स्टॉक अभी बाकी है। सरकार की भी पॉलिसी के चलते बड़े निर्यातक अब तक धान की खरीद को आगे नहीं आए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed