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Panipat News: सिगरेट के धुएं में उड़ा रहे जिंदगी, पांच साल में कैंसर के 760 मरीज मिले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2024 06:14 AM IST
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People are wasting their lives in cigarette smoke, 760 cancer patients found in five years
पानीपत। जिले के युवा धुंए में जिंदगियां उड़ा रहे हैं। जिससे वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक हर साल जिले में कैंसर से 60 से अधिक लोगों की मौत हो जाती है और पिछले पांच साल में जिले में कैंसर से 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
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जानकारी के अनुसार पानीपत में 16 से 22 वर्ष आयु वर्ग के 60 प्रतिशत युवा धूम्रपान के आदी हैं और 32-35 आयु वर्ग तक पहुंचने पर कैंसर का शिकार हो रहे हैं। आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस है। इसका मकसद लोगों को तंबाकू सेवन के खतरों से बचाना है। इस दिशा में नागरिक अस्पताल में तंबाकू से छुटकारे के लिए अलग से ओपीडी शुरू की गई है, जहां तंबाकू की गिरफ्त में आए लोगों की काउंसिलिंग की जाती है। जिला नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में ऐसे 45 युवाओं का इलाज चल रहा है जो धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं।
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जिले में पिछले पांच वर्ष के दौरान कैंसर के 760 केस सामने आए हैं। इनमें से 90 प्रतिशत रोगी बीड़ी, सिगरेट या अन्य तंबाकू पदार्थों का सेवन करने वाले पाए गए हैं। इनमें से 40 प्रतिशत मरीजों की मौत हो चुकी है। यह स्वास्थ्य विभाग का आकड़ा है। हालांकि इससे निजी अस्पताल इत्तफाक नहीं रखते। उनके अनुसार जिले में कैंसर के पांच हजार से अधिक रोगी हैं। उनमें भी सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर रोगी हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू का सेवन है।
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पिछले साल 450 मरीज आए सामने


वर्ष 2021 में जिले में कैंसर के 139 नए केस मिले। 2019- 2020 में कैंसर के 171 नए रोगी सामने आए थे। पानीपत में 2022 से 2023 तक कैंसर के 450 मरीज सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उद्योग नगरी पानीपत में दूसरे प्रदेशों के लोगों की संख्या अधिक है। प्रवासी गुटखा खाने के आदी होते हैं, जो मुंह के कैंसर से ग्रस्त मिलते हैं।

हर माह हो रहे 50 आपरेशन
डॉ. प्रेम कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिनव ने बताया कि पानीपत में कैंसर बढ़ने का बड़ा कारण तंबाकू का सेवन व शहर का बढ़ता प्रदूषण है। उनके यहां अस्पताल में हर माह करीब 50 सर्जरी हो रही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर बड़ी परेशानी बन रही है। वह अब तक करीब 2500 रेडियोथैरेपी कर चुके हैं। जो भी कैंसर के नए रोगी मिलते हैं, उनमें से 90 प्रतिशत धूम्रपान के आदी पाए जाते हैं। इसलिए कैंसर से बचना है तो बीड़ी, सिगरेट और गुटखा छोड़ना होगा।
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