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पानीपत शौडी यार्न उद्योग का इटली और तुर्की जैसा न हो जाए हश्र!
हरेंद्र रापरिया/पानीपत
Updated Mon, 16 Jun 2014 11:23 PM IST
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इटली और तुर्की में आए दिन श्रमिकों की हड़ताल के कारण ठप हुआ शौडी यार्न स्पिनिंग उद्योग का पूरा फायदा पानीपत ने उठाया और धीरे-धीरे यहां पर सैकड़ों शौडी यार्न स्पिनिंग मिल स्थापित हो गए।
अब पानीपत दुनियाभर में शौडी यार्न का हब बना हुआ है। मगर यहां पर भी श्रमिक आंदोलन इस पर भारी पड़ रहे हैं। सोलह दिनों से श्रमिकों की चल रही हड़ताल ने शौडी यार्न उद्योग को हिलाकर रख दिया है। यह पहला अवसर नहीं, जब यहां के श्रमिक हड़ताल पर उतरे हैं बल्कि वे पहले भी कई बार ऐसा कर चुके हैं।
मिलाें के एक पखवाडे़ से अधिक समय से बंद होने के बाद अब दोनाें पक्षाें में समझौता होने के आसार हैं मगर उसके बावजूद शौडी यार्न उद्योग पर तिहरी मार पड़ना तय है।
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इसमें हड़ताल के दिनाें में हुआ उत्पादन नुकसान, बिना उत्पादन के बैंक से लिए गए ऋणाें की किस्त, बिजली बिल और अन्य खर्चों का भुगतान अपनी जेब से करना पडे़गा।
फैसला लागू होने पर उत्पादन लागत में आठ से 10 फीसदी की बढ़ोतरी होग, वह अलग। अगर मिल मालिकों की मानें तो शौडी यार्न उद्योग को पटरी पर लाने में कई माह का समय लगेगा।
पानीपत से सालाना 4500 करोड़ के टेक्सटाइल उत्पाद का निर्यात होता है। इसके अलावा यहां से घरेलू बाजार में कई हजार करोड़ रुपये के टेक्सटाइल उत्पाद बिक्री के लिए जा रहे हैं।
इसमें शौडी यार्न का भी बड़ा हिस्सा है। फिलहाल, पानीपत में 340 शौडी मिल काम कर रही हैं। कंबल समेत अन्य टेक्सटाइल उत्पादाें में रग्स से तैयार होने वाले शौडी यार्न का इस्तेमाल होता है। यह धागा विदेशाें से आयात होने वाले रग्स से मिलता है।
कैसे तैयार होता है शौडी यार्न
कंबल में ऊनी धागे का इस्तेमाल होता है। इसका सबसे बड़ा व सस्ता स्त्रोत विदेशों से आने वाली जर्सियां और गरम कपडे़ हैं। इन गरम कपड़ाें का आयात करके पानीपत लाया जाता है। श्रमिकों की मदद से इनकी छंटाई की जाती है। उसके बाद इन्हें जरूरत के मुताबिक रंगाें से रंग जाता है। रग्स मशीन में डालकर इसकी कटाई करके इससे रूई तैयार की जाती है। इस रूई की मदद से ही शौडी यार्न तैयार होता है। शौडी यार्न की 10 से 12 श्रेणियां होती हैं। यही शौडी यार्न बाद में कंबल में इस्तेमाल होता है।
पानीपत में है दुनिया के सबसे अधिक शौडी मिल
पानीपत में हर माह 450 से अधिक रग्स के कंटेनर आयात किए जाते हैं। एक कंटेनर में करीब 25 टन रग्स होता है। इसकी कीमत करीब आठ से नौ लाख रुपये होती है। इस रग्स से शौडी यार्न तैयार होता है। पानीपत में करीब 340 फैक्टरियाें में रग्स से शौडी यार्न तैयार किया जाता है। इससे पहले इटली व तुर्की में सर्वाधिक शौडी यार्न मिल थी। मगर अब इटली में 95 फीसदी मिल बंद हो चुकी हैं तथा तुर्की में भी हालात अच्छे नहीं हैं।
सोलह दिनों से बंद पड़ी हैं मिल
शौडी यार्न स्पिनिंग मिलाें में काम करने वाले करीब 40 हजार श्रमिक न्यूनतम वेतन, पीएफ, ईएसआई समेत अन्य सुविधाओं की मांग पर एक जून से हड़ताल पर चले गए थे। बीच में उप श्रमायुक्त कार्यालय में मिल मालिकाें और श्रमिकों के बीच समझौते को बातचीत भी हुई थी मगर वह सिरे नहीं चढ़ी। अब 17 जून को दोबारा उप-श्रमायुक्त कार्यालय में दोनों पक्ष बातचीत के लिए आमने सामने होंगे।
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अब पानीपत दुनियाभर में शौडी यार्न का हब बना हुआ है। मगर यहां पर भी श्रमिक आंदोलन इस पर भारी पड़ रहे हैं। सोलह दिनों से श्रमिकों की चल रही हड़ताल ने शौडी यार्न उद्योग को हिलाकर रख दिया है। यह पहला अवसर नहीं, जब यहां के श्रमिक हड़ताल पर उतरे हैं बल्कि वे पहले भी कई बार ऐसा कर चुके हैं।
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मिलाें के एक पखवाडे़ से अधिक समय से बंद होने के बाद अब दोनाें पक्षाें में समझौता होने के आसार हैं मगर उसके बावजूद शौडी यार्न उद्योग पर तिहरी मार पड़ना तय है।
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इसमें हड़ताल के दिनाें में हुआ उत्पादन नुकसान, बिना उत्पादन के बैंक से लिए गए ऋणाें की किस्त, बिजली बिल और अन्य खर्चों का भुगतान अपनी जेब से करना पडे़गा।
फैसला लागू होने पर उत्पादन लागत में आठ से 10 फीसदी की बढ़ोतरी होग, वह अलग। अगर मिल मालिकों की मानें तो शौडी यार्न उद्योग को पटरी पर लाने में कई माह का समय लगेगा।
पानीपत से सालाना 4500 करोड़ के टेक्सटाइल उत्पाद का निर्यात होता है। इसके अलावा यहां से घरेलू बाजार में कई हजार करोड़ रुपये के टेक्सटाइल उत्पाद बिक्री के लिए जा रहे हैं।
इसमें शौडी यार्न का भी बड़ा हिस्सा है। फिलहाल, पानीपत में 340 शौडी मिल काम कर रही हैं। कंबल समेत अन्य टेक्सटाइल उत्पादाें में रग्स से तैयार होने वाले शौडी यार्न का इस्तेमाल होता है। यह धागा विदेशाें से आयात होने वाले रग्स से मिलता है।
कैसे तैयार होता है शौडी यार्न
कंबल में ऊनी धागे का इस्तेमाल होता है। इसका सबसे बड़ा व सस्ता स्त्रोत विदेशों से आने वाली जर्सियां और गरम कपडे़ हैं। इन गरम कपड़ाें का आयात करके पानीपत लाया जाता है। श्रमिकों की मदद से इनकी छंटाई की जाती है। उसके बाद इन्हें जरूरत के मुताबिक रंगाें से रंग जाता है। रग्स मशीन में डालकर इसकी कटाई करके इससे रूई तैयार की जाती है। इस रूई की मदद से ही शौडी यार्न तैयार होता है। शौडी यार्न की 10 से 12 श्रेणियां होती हैं। यही शौडी यार्न बाद में कंबल में इस्तेमाल होता है।
पानीपत में है दुनिया के सबसे अधिक शौडी मिल
पानीपत में हर माह 450 से अधिक रग्स के कंटेनर आयात किए जाते हैं। एक कंटेनर में करीब 25 टन रग्स होता है। इसकी कीमत करीब आठ से नौ लाख रुपये होती है। इस रग्स से शौडी यार्न तैयार होता है। पानीपत में करीब 340 फैक्टरियाें में रग्स से शौडी यार्न तैयार किया जाता है। इससे पहले इटली व तुर्की में सर्वाधिक शौडी यार्न मिल थी। मगर अब इटली में 95 फीसदी मिल बंद हो चुकी हैं तथा तुर्की में भी हालात अच्छे नहीं हैं।
सोलह दिनों से बंद पड़ी हैं मिल
शौडी यार्न स्पिनिंग मिलाें में काम करने वाले करीब 40 हजार श्रमिक न्यूनतम वेतन, पीएफ, ईएसआई समेत अन्य सुविधाओं की मांग पर एक जून से हड़ताल पर चले गए थे। बीच में उप श्रमायुक्त कार्यालय में मिल मालिकाें और श्रमिकों के बीच समझौते को बातचीत भी हुई थी मगर वह सिरे नहीं चढ़ी। अब 17 जून को दोबारा उप-श्रमायुक्त कार्यालय में दोनों पक्ष बातचीत के लिए आमने सामने होंगे।