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नगर निगम की बैठक में छह अहम एजेंडे पास
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Tue, 03 Jun 2014 12:19 AM IST
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पानीपत शहर की सरकार की तीसरी बैठक में सोमवार को छह अहम मुद्दों पर मुहर लग गई। इसमें किलावासियों को बसाए रखने और रैनीवेल प्रोजेक्ट प्रमुख रहे। विपक्ष ने भी एकमत होकर इनका समर्थन कर दिया।
करीब पौने दो घंटे चली शांतिपूर्ण बैठक में महिला पार्षद के पतियों व प्रतिनिधियों के बोलने और फिर निगम कमिश्नर व कई विभागीय अधिकारियों के न पहुंचने पर हंगामा खड़ा हो गया।
इसके चलते बैठक बीच में स्थगित करनी पड़ी। पक्ष और विपक्ष के कई पार्षद प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते बाहर निकल गए।
विपक्ष ने इसे लेकर मेयर और प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप मढे़ हैं। उन्होंने बैठक को महज खानापूर्ति करार दिया है। दूसरी ओर, मेयर ने बैठक को सफल बताया है।
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शहर की सरकार की तीसरी बैठक सोमवार को दोपहर बाद बाल भवन में हुई। इसकी अध्यक्षता नगर निगम के मेयर भूपेंद्र सिंह और संचालन संयुक्त आयुक्त एवं एडीसी आरएस वर्मा ने की। इस मौके पर सीनियर डिप्टी मेयर काजल बठला और डिप्टी मेयर सीमा पाहवा भी मौजूद रहीं।
ये मुद्दे हुए पास, यह मिलेगा फायदा
एजेंडा नंबर-एक- किलावासी 245 परिवारों को मिली राहत
नगर निगम हाउस की बैठक का पहला एजेंडा किलावासियों को राहत देने के बारे में रहा। मेयर भूपेंद्र सिंह ने इसे शहर का मुख्य मुद्दा बताया और सदन की राय मांगी। पक्ष के साथ विपक्ष के पार्षद दल के नेता लोकेश नांगरू और भाजपा पार्षद दुष्यंत भट्ट ने इसे अपना समर्थन दिया। सदन का समर्थन मिलने के बाद प्रस्ताव को पास कर दिया गया। इस मामले में विपक्ष का कहना था किलावासियों को हर बार मोहरा बना दिया जाता है। यहां के लोगों के बसाने का 1994 के हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास हो गया है तो उस मामले को उसी समय लागू कर दिया जाना चाहिए। इस मामले में स्पष्ट बात होनी चाहिए और उनको पूरी राहत मिलनी चाहिए।
यह मिलेगा फायदा
किला की 53,840 वर्ग गज जमीन है। यहां पर 1936 में कुछ परिवार आकर बसे थे। इसमें से 48,260 वर्ग गज क्षेत्र कमेटी के पास है। यहां पर बसने वाले परिवाराें की संख्या अब 245 है। कुछ लोगों ने इस जमीन को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद फिर से कुछ लोग इस मामले में हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट के आदेश पर संयुक्त आयुक्त लगाकर मामले की रिपोर्ट देने की बात कही। इसे लेकर मई 2013 में कार्रवाई शुरू की गई। किले के 245 परिवाराें में 84 नहीं पहुंच सके। संयुक्त आयुक्त की अदालत ने इन 84 परिवारों की बेदखली के आदेश कर दिए। इसके बाद किलावासियों ने अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों को गुहार लगानी शुरू कर दी और लंबे समय से 245 परिवारों पर अपने आशियाने को बचाने की चिंता बनी हुई थी।
एजेंडा नंबर-दो- बाहरी 67 कॉलोनी एक माह में होगी वैध
नगर निगम के हाउस की बैठक में दूसरा एजेंडा बाहरी 67 कॉलोनियों को वैध कराने और यहां से हाउस टैक्स वसूलने को रखा गया। मेयर भूपेंद्र सिंह ने इसे कालोनियों में रहने वाले कई लाख लोगों की जरूरत बताया। पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने भी इस पर सहमति जता दी, लेकिन बाहरी कॉलोनियों से हाउस टैक्स वसूलने को अन्यायपूर्ण बताया। विपक्ष का कहना था कि इन कॉलोनियों में कोई मूलभूत सुविधा नहीं दी जा रही। ऐसे में यहां से हाउस टैक्स वसूलना गलत है। इस पर पुन: विचार किए जाने की आवश्यकता है।
यह मिलेगा फायदा
शहर की बाहरी 67 कॉलोनियों से सात पार्षद चुनकर शहर की सरकार में शामिल हुए हैं। ये पार्षद पहले दिन से कॉलोनियों को वैध करने की मांग उठा रहे हैं और कई बार मुख्यमंत्री तक मिल चुके हैं। इसी वजह से कई पार्षद मेयर के विपक्ष में भी खड़े हो गए थे। बाहरी कॉलोनियों में भी विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं लग पा रही थी। हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने पर प्रशासनिक और विभागीय अधिकारी पीछे हट गए थे। यहां के लोग भी लंबे समय से वैध कराने की उम्मीद से देख रहे थे।
एजेंडा नंबर-तीन-रैनीवेल प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, मिलेगा साफ पानी
हाउस की बैठक में तीसरा मुद्दा रैनीवेल प्रोजेक्ट रखा गया। लागत बढ़ने के बाद 320 करोड़ से 463 करोड़ तक पहुंचे प्रोजेक्ट की सदन ने स्वीकृति दे दी। इसके बाद शहर को स्वच्छ और साफ पानी मिलने की उम्मीद जगी है। इस प्रोजेक्ट में जन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी पूरी रिपोर्ट सदन के बीच में नहीं रख सके।
यह मिलेगा फायदा
शहर में स्वच्छ पानी लाने के कैनाल बेस प्रोजेक्ट के सिरे न चढ़ने के बाद रैनीवेल प्रोजेक्ट को लाया गया था। इसमें यमुना की तलहटी में कुएं बनाकर पाइप लाइन से शहर में पीने का पानी लाया जाना था। जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 320 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया गया था और दिल्ली मंत्रालय में मंजूरी को भेज दिया था। नगर निगम के हाउस की सहमति न होने पर इसे वापस कर दिया गया। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट को पुन: तैयार किया और यह अब 463 करोड़ का बनाया गया।
एजेंडा नंबर-चार-स्ट्रीट लाइट और ट्यूबवेल लगाने पर बनी सहमति
निगम के हाउस की बैठक में चौथा एजेंडा शहर के हर वार्ड में पेयजल के व्यापक प्रबंध और विकास को रखा गया। इसे लेकर पक्ष व विपक्ष के पार्षदों ने कुछ तेवर तल्ख किए और एक लंबी बहस के बाद एजेंडे को मंजूरी मिल गई। विपक्ष का कहना था कि यह पिछली मीटिंग में पास हो चुका है। इस पर तो काम हो जाना चाहिए था।
यह मिलेगा फायदा
शहर मेें खराब छह बड़े ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इसके अलावा शहर के हर वार्ड में पेयजल के लिए दो-दो ट्यूबवेल लगाए जाने हैं। हर वार्ड में करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए जाएंगे।
एजेंडा नंबर-पांच-सोंधापुर में बनेगा स्टेडियम, होंगी सुविधा
नगर निगम के हाउस की बैठक में पांचवां मुद्दा सोंधापुर गांव में ढाई एकड़ जमीन पर स्टेडियम बनाना रहा। इसका पक्ष व विपक्ष ने समर्थन किया। मेयर का कहना था कि यहां की पांच एकड़ एक और ढाई एकड़ जमीन एक है। इस पांच एकड़ जमीन की बोली दी जाती है, जबकि ढाई एकड़ जमीन पर बच्चे खेलते हैं। ऐसे में यहां पर स्टेडियम बना देना जरूरी है।
यह मिलेगा फायदा
मॉडल टाउन में शिवाजी स्टेडियम है। इसका मैदान पर्याप्त नहीं है। ऐसे में शहर के युवाओं की खेल प्रतिभा निखारने के लिए बड़े स्टेडियम की आवश्यकता है। सोंधापुर गांव में ढाई एकड़ में स्टेडियम बनने के बाद युवा खेल प्रतिभा का निखार सकेंगे।
एजेंडा नंबर-छह-हर वार्ड में होगा हाई स्कूल
सिटी सरकार के सदन में छठा एजेंडा वार्डों में सरकारी स्कूल बनाने का रखा गया। मेयर का कहना था कि वार्ड पांच, सात, 22 व 23 समेत कई वार्डों में सरकारी स्कूल नहीं हैं, जबकि हर गांव में स्कूल हैं। ऐसे में हर वार्ड में सरकारी स्कूल होना चाहिए। पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने एक साथ मंजूरी दे दी।
यह मिलेगा फायदा : शहर के वार्डों में हाईस्कूल बनाया जाएगा। ऐसे में वार्डों के विद्यार्थियों को दूर के स्कूलों में पढ़ाई करने नहीं जाना पड़ेगा। उनको अपने ही वार्ड में 10वीं कक्षा तक का स्कूल मिलेगा।
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करीब पौने दो घंटे चली शांतिपूर्ण बैठक में महिला पार्षद के पतियों व प्रतिनिधियों के बोलने और फिर निगम कमिश्नर व कई विभागीय अधिकारियों के न पहुंचने पर हंगामा खड़ा हो गया।
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इसके चलते बैठक बीच में स्थगित करनी पड़ी। पक्ष और विपक्ष के कई पार्षद प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते बाहर निकल गए।
विपक्ष ने इसे लेकर मेयर और प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप मढे़ हैं। उन्होंने बैठक को महज खानापूर्ति करार दिया है। दूसरी ओर, मेयर ने बैठक को सफल बताया है।
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शहर की सरकार की तीसरी बैठक सोमवार को दोपहर बाद बाल भवन में हुई। इसकी अध्यक्षता नगर निगम के मेयर भूपेंद्र सिंह और संचालन संयुक्त आयुक्त एवं एडीसी आरएस वर्मा ने की। इस मौके पर सीनियर डिप्टी मेयर काजल बठला और डिप्टी मेयर सीमा पाहवा भी मौजूद रहीं।
ये मुद्दे हुए पास, यह मिलेगा फायदा
एजेंडा नंबर-एक- किलावासी 245 परिवारों को मिली राहत
नगर निगम हाउस की बैठक का पहला एजेंडा किलावासियों को राहत देने के बारे में रहा। मेयर भूपेंद्र सिंह ने इसे शहर का मुख्य मुद्दा बताया और सदन की राय मांगी। पक्ष के साथ विपक्ष के पार्षद दल के नेता लोकेश नांगरू और भाजपा पार्षद दुष्यंत भट्ट ने इसे अपना समर्थन दिया। सदन का समर्थन मिलने के बाद प्रस्ताव को पास कर दिया गया। इस मामले में विपक्ष का कहना था किलावासियों को हर बार मोहरा बना दिया जाता है। यहां के लोगों के बसाने का 1994 के हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास हो गया है तो उस मामले को उसी समय लागू कर दिया जाना चाहिए। इस मामले में स्पष्ट बात होनी चाहिए और उनको पूरी राहत मिलनी चाहिए।
यह मिलेगा फायदा
किला की 53,840 वर्ग गज जमीन है। यहां पर 1936 में कुछ परिवार आकर बसे थे। इसमें से 48,260 वर्ग गज क्षेत्र कमेटी के पास है। यहां पर बसने वाले परिवाराें की संख्या अब 245 है। कुछ लोगों ने इस जमीन को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद फिर से कुछ लोग इस मामले में हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट के आदेश पर संयुक्त आयुक्त लगाकर मामले की रिपोर्ट देने की बात कही। इसे लेकर मई 2013 में कार्रवाई शुरू की गई। किले के 245 परिवाराें में 84 नहीं पहुंच सके। संयुक्त आयुक्त की अदालत ने इन 84 परिवारों की बेदखली के आदेश कर दिए। इसके बाद किलावासियों ने अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों को गुहार लगानी शुरू कर दी और लंबे समय से 245 परिवारों पर अपने आशियाने को बचाने की चिंता बनी हुई थी।
एजेंडा नंबर-दो- बाहरी 67 कॉलोनी एक माह में होगी वैध
नगर निगम के हाउस की बैठक में दूसरा एजेंडा बाहरी 67 कॉलोनियों को वैध कराने और यहां से हाउस टैक्स वसूलने को रखा गया। मेयर भूपेंद्र सिंह ने इसे कालोनियों में रहने वाले कई लाख लोगों की जरूरत बताया। पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने भी इस पर सहमति जता दी, लेकिन बाहरी कॉलोनियों से हाउस टैक्स वसूलने को अन्यायपूर्ण बताया। विपक्ष का कहना था कि इन कॉलोनियों में कोई मूलभूत सुविधा नहीं दी जा रही। ऐसे में यहां से हाउस टैक्स वसूलना गलत है। इस पर पुन: विचार किए जाने की आवश्यकता है।
यह मिलेगा फायदा
शहर की बाहरी 67 कॉलोनियों से सात पार्षद चुनकर शहर की सरकार में शामिल हुए हैं। ये पार्षद पहले दिन से कॉलोनियों को वैध करने की मांग उठा रहे हैं और कई बार मुख्यमंत्री तक मिल चुके हैं। इसी वजह से कई पार्षद मेयर के विपक्ष में भी खड़े हो गए थे। बाहरी कॉलोनियों में भी विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं लग पा रही थी। हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने पर प्रशासनिक और विभागीय अधिकारी पीछे हट गए थे। यहां के लोग भी लंबे समय से वैध कराने की उम्मीद से देख रहे थे।
एजेंडा नंबर-तीन-रैनीवेल प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, मिलेगा साफ पानी
हाउस की बैठक में तीसरा मुद्दा रैनीवेल प्रोजेक्ट रखा गया। लागत बढ़ने के बाद 320 करोड़ से 463 करोड़ तक पहुंचे प्रोजेक्ट की सदन ने स्वीकृति दे दी। इसके बाद शहर को स्वच्छ और साफ पानी मिलने की उम्मीद जगी है। इस प्रोजेक्ट में जन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी पूरी रिपोर्ट सदन के बीच में नहीं रख सके।
यह मिलेगा फायदा
शहर में स्वच्छ पानी लाने के कैनाल बेस प्रोजेक्ट के सिरे न चढ़ने के बाद रैनीवेल प्रोजेक्ट को लाया गया था। इसमें यमुना की तलहटी में कुएं बनाकर पाइप लाइन से शहर में पीने का पानी लाया जाना था। जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 320 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया गया था और दिल्ली मंत्रालय में मंजूरी को भेज दिया था। नगर निगम के हाउस की सहमति न होने पर इसे वापस कर दिया गया। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट को पुन: तैयार किया और यह अब 463 करोड़ का बनाया गया।
एजेंडा नंबर-चार-स्ट्रीट लाइट और ट्यूबवेल लगाने पर बनी सहमति
निगम के हाउस की बैठक में चौथा एजेंडा शहर के हर वार्ड में पेयजल के व्यापक प्रबंध और विकास को रखा गया। इसे लेकर पक्ष व विपक्ष के पार्षदों ने कुछ तेवर तल्ख किए और एक लंबी बहस के बाद एजेंडे को मंजूरी मिल गई। विपक्ष का कहना था कि यह पिछली मीटिंग में पास हो चुका है। इस पर तो काम हो जाना चाहिए था।
यह मिलेगा फायदा
शहर मेें खराब छह बड़े ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इसके अलावा शहर के हर वार्ड में पेयजल के लिए दो-दो ट्यूबवेल लगाए जाने हैं। हर वार्ड में करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए जाएंगे।
एजेंडा नंबर-पांच-सोंधापुर में बनेगा स्टेडियम, होंगी सुविधा
नगर निगम के हाउस की बैठक में पांचवां मुद्दा सोंधापुर गांव में ढाई एकड़ जमीन पर स्टेडियम बनाना रहा। इसका पक्ष व विपक्ष ने समर्थन किया। मेयर का कहना था कि यहां की पांच एकड़ एक और ढाई एकड़ जमीन एक है। इस पांच एकड़ जमीन की बोली दी जाती है, जबकि ढाई एकड़ जमीन पर बच्चे खेलते हैं। ऐसे में यहां पर स्टेडियम बना देना जरूरी है।
यह मिलेगा फायदा
मॉडल टाउन में शिवाजी स्टेडियम है। इसका मैदान पर्याप्त नहीं है। ऐसे में शहर के युवाओं की खेल प्रतिभा निखारने के लिए बड़े स्टेडियम की आवश्यकता है। सोंधापुर गांव में ढाई एकड़ में स्टेडियम बनने के बाद युवा खेल प्रतिभा का निखार सकेंगे।
एजेंडा नंबर-छह-हर वार्ड में होगा हाई स्कूल
सिटी सरकार के सदन में छठा एजेंडा वार्डों में सरकारी स्कूल बनाने का रखा गया। मेयर का कहना था कि वार्ड पांच, सात, 22 व 23 समेत कई वार्डों में सरकारी स्कूल नहीं हैं, जबकि हर गांव में स्कूल हैं। ऐसे में हर वार्ड में सरकारी स्कूल होना चाहिए। पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने एक साथ मंजूरी दे दी।
यह मिलेगा फायदा : शहर के वार्डों में हाईस्कूल बनाया जाएगा। ऐसे में वार्डों के विद्यार्थियों को दूर के स्कूलों में पढ़ाई करने नहीं जाना पड़ेगा। उनको अपने ही वार्ड में 10वीं कक्षा तक का स्कूल मिलेगा।