{"_id":"61917aee02e5745381782f75","slug":"panipat-health-panipat-news-knl895227157","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेंगू की चपेट में आया जिला, समय पर नहीं उठाए गए उचित कदम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेंगू की चपेट में आया जिला, समय पर नहीं उठाए गए उचित कदम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तो फॉगिंग शुरू होने तक खुद काबू हो जाएगा डेंगू
जब तक पंचायतों को दवा और डीजल मिलेगा, तब तक डेंगू खुद कम होने लगेगा
जिले में डेंगू के मिल चुके हैं 180 केस, 188 स्लाइड की रिपोर्ट सोमवार को आएगी
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिले में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। पंचायतों को अब फॉगिंग मशीनें मिली हैं, जब तक डीजल एवं दवा मिलेगी और पंचायत के कर्मचारियों को मशीन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, तब तक डेंगू गिरते तापमान के कारण खुद नियंत्रित हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पंचायतों को फॉगिंग मशीनें बहुत देरी से मिली हैं।
इस साल अब तक डेंगू के 180 केस मिल चुके हैं। इनमें से 80 प्रतिशत केस ग्रामीण क्षेत्रों में मिले हैं। डेंगू के गंभीर होने का बड़ा कारण प्रशासन की लापरवाही रही है। स्वास्थ्य विभाग के कहने पर नगर निगम ने समय पर खाली प्लॉट से पानी नहीं निकाला और ना ही फॉगिंग शुरू की। जब शहरी क्षेत्रों में अचानक डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ी तो 11 सामाजिक संस्थाओं ने फॉगिंग का जिम्मा संभाला। शहरी क्षेत्रों में डेंगू नियंत्रित हुआ तो ग्रामीण क्षेत्रों में एकाएक डेंगू के केस बढ़े, लेकिन जिला पंचायती राज विभाग ने काम गंभीरता से नहीं किया। गांवों में 9 माह पहले सरपंचों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसलिए सरपंचों ने भी फॉगिंग की जिम्मेदारी नहीं ली, ये ही कारण है ग्रामीण क्षेत्रों डेंगू का प्रकोप अधिक बढ़ गया।
देरी से पंचायतों को मिली फॉगिंग मशीनें
सरकार की ओर से पंचायतों को 93 मशीनें देरी से मिली हैं। अब दवा और डीजल खरीदने की प्रक्रिया में समय लगेगा। सरपंचों को अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाने में भी समय लगेगा। तब तक डेंगू का प्रकोप ठंड के कारण खुद कम हो जाएगा। अक्तूबर से पहले डेंगू को कंट्रोल करना जरूरी था। अगर समय पर मशीनें मिलती तो ग्रामीण क्षेत्रों में डेंगू नियंत्रण में होता।
विज्ञापन
सिर्फ बैठकें हुईं, जमीनी स्तर पर नहीं हुआ काम
जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और जिला पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की डेंगू को लेकर बैठकें हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं हुआ। सभी विभागों और अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के बावजूद लापरवाही बरती गई। सिविल सर्जन की ओर से नगर निगम को खाली प्लॉट से पानी निकालने के लिए कहा गया, लेकिन यक काम हुआ ही नहीं। नतीजा प्लाटों में भरे बारिश के साफ पानी में डेंगू का मच्छर तेजी से पनपा।
स्वास्थ्य विभाग ने तीन लाख घरों की जांच की, 12 हजार जगहों से लार्वा नष्ट किया-
स्वास्थ्य विभाग ने इस सीजन में तीन लाख घरों की जांच की है। सबसे अधिक लार्वा बापौली व समालखा क्षेत्र में मिला। विभाग की टीमों ने 12 हजार जगहों से लार्वा नष्ट कर लोगों को नोटिस जारी किए। सीएचसी व पीएचसी स्तर पर डेंगू के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चलाए गए।
घटते-बढ़ते रहे डेंगू केस
2016- 12
2017-469
2018-133
2019- 04
2020-272
2021- 180 ( 14 नवंबर तक)
स्वास्थ्य विभाग ने अपनी ओर से डेंगू को नियंत्रित करने के लिए बेहतर प्रयास किए हैं। सीएचसी और पीएचसी स्तर पर इंतजाम किए गए। निजी अस्पतालों से लगातार मरीजों का डेटा मांगा गया। जिले भर में एंटी लार्वा एक्टिविटी कराई गई। नगर निगम का काम शहरी क्षेत्रों में व जिला पंचायती राज विभाग का काम ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग करना है।
- डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन, पानीपत।
विज्ञापन
जब तक पंचायतों को दवा और डीजल मिलेगा, तब तक डेंगू खुद कम होने लगेगा
जिले में डेंगू के मिल चुके हैं 180 केस, 188 स्लाइड की रिपोर्ट सोमवार को आएगी
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिले में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। पंचायतों को अब फॉगिंग मशीनें मिली हैं, जब तक डीजल एवं दवा मिलेगी और पंचायत के कर्मचारियों को मशीन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, तब तक डेंगू गिरते तापमान के कारण खुद नियंत्रित हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पंचायतों को फॉगिंग मशीनें बहुत देरी से मिली हैं।
इस साल अब तक डेंगू के 180 केस मिल चुके हैं। इनमें से 80 प्रतिशत केस ग्रामीण क्षेत्रों में मिले हैं। डेंगू के गंभीर होने का बड़ा कारण प्रशासन की लापरवाही रही है। स्वास्थ्य विभाग के कहने पर नगर निगम ने समय पर खाली प्लॉट से पानी नहीं निकाला और ना ही फॉगिंग शुरू की। जब शहरी क्षेत्रों में अचानक डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ी तो 11 सामाजिक संस्थाओं ने फॉगिंग का जिम्मा संभाला। शहरी क्षेत्रों में डेंगू नियंत्रित हुआ तो ग्रामीण क्षेत्रों में एकाएक डेंगू के केस बढ़े, लेकिन जिला पंचायती राज विभाग ने काम गंभीरता से नहीं किया। गांवों में 9 माह पहले सरपंचों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसलिए सरपंचों ने भी फॉगिंग की जिम्मेदारी नहीं ली, ये ही कारण है ग्रामीण क्षेत्रों डेंगू का प्रकोप अधिक बढ़ गया।
विज्ञापन
देरी से पंचायतों को मिली फॉगिंग मशीनें
सरकार की ओर से पंचायतों को 93 मशीनें देरी से मिली हैं। अब दवा और डीजल खरीदने की प्रक्रिया में समय लगेगा। सरपंचों को अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाने में भी समय लगेगा। तब तक डेंगू का प्रकोप ठंड के कारण खुद कम हो जाएगा। अक्तूबर से पहले डेंगू को कंट्रोल करना जरूरी था। अगर समय पर मशीनें मिलती तो ग्रामीण क्षेत्रों में डेंगू नियंत्रण में होता।
विज्ञापन
सिर्फ बैठकें हुईं, जमीनी स्तर पर नहीं हुआ काम
जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और जिला पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की डेंगू को लेकर बैठकें हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं हुआ। सभी विभागों और अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के बावजूद लापरवाही बरती गई। सिविल सर्जन की ओर से नगर निगम को खाली प्लॉट से पानी निकालने के लिए कहा गया, लेकिन यक काम हुआ ही नहीं। नतीजा प्लाटों में भरे बारिश के साफ पानी में डेंगू का मच्छर तेजी से पनपा।
स्वास्थ्य विभाग ने तीन लाख घरों की जांच की, 12 हजार जगहों से लार्वा नष्ट किया-
स्वास्थ्य विभाग ने इस सीजन में तीन लाख घरों की जांच की है। सबसे अधिक लार्वा बापौली व समालखा क्षेत्र में मिला। विभाग की टीमों ने 12 हजार जगहों से लार्वा नष्ट कर लोगों को नोटिस जारी किए। सीएचसी व पीएचसी स्तर पर डेंगू के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चलाए गए।
घटते-बढ़ते रहे डेंगू केस
2016- 12
2017-469
2018-133
2019- 04
2020-272
2021- 180 ( 14 नवंबर तक)
स्वास्थ्य विभाग ने अपनी ओर से डेंगू को नियंत्रित करने के लिए बेहतर प्रयास किए हैं। सीएचसी और पीएचसी स्तर पर इंतजाम किए गए। निजी अस्पतालों से लगातार मरीजों का डेटा मांगा गया। जिले भर में एंटी लार्वा एक्टिविटी कराई गई। नगर निगम का काम शहरी क्षेत्रों में व जिला पंचायती राज विभाग का काम ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग करना है।
- डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन, पानीपत।