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विद्यार्थियों ने देखा 1808 का हरियाणा का नक्शा

Wed, 18 Jan 2017 11:55 PM IST
amar ujala beuro panipat
amar ujala beuro panipat Updated Wed, 18 Jan 2017 11:55 PM IST
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oop - फोटो : amar ujala
आर्य कॉलेज में इतिहास विभाग और अभिलेखागार विभाग हरियाणा के संयुक्त तत्वाधान में ऐतिहासिक, दुर्लभ अभिलेखों की प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें विद्यार्थियों को हरियाणा के दुर्लभ और ऐतिहासिक चित्र देखने के लिए मिले। कॉलेज प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने अभिलेखों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय सिंह को बधाई दी।
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अभिलेखागार विभाग हरियाणा, रोहतक के सहायक निदेशक बलदेव सिंह ने प्रदर्शनी देखने आए विद्यार्थियों को सन् 1808 से 1947 तक के इतिहास के बारे में बताया। विद्यार्थियों को 1808 के समय हरियाणा के नक्शे के बारे में जानकारी दी। 1836 में शमशुद्दीन खान को दिल्ली में डब्ल्यू फेजर के हत्या के आरोप में फांसी, 1857 में अंबाला में हुई आगजनी और उसके बाद 11 मई 1857 को आगजनी पर रिपोर्ट प्रदर्शनी में रखी गई है। राव तुला राव के बारे में भी बताया गया है।
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इस मौके पर कॉलेज के उपप्राचार्य डॉ. राकेश मोहन ने विद्यार्थियों को बताया कि इतिहास को तथ्यों के आधार पर लिखा जाता है। ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाता है। सहायक निदेशक बलदेव सिंह ने बताया कि इन अभिलेखागारों को राष्ट्रीय अभिलेखागार दिल्ली और प्रदेश अभिलेखागार में सुरक्षित किया गया है। विद्यार्थियों को अपने देश के इतिहास के बारे में सही जानकारी होनी चाहिए। इस अवसर पर रणवीर सिंह मान, राज्य अभिलेखागार पचंकूला से चंद्रभान, कॉलेज प्राध्यापक डॉ. रामनिवास, प्राध्यापिका मीनाक्षी चौधरी, अकरम खान और अनीता वर्मा मौजूद रहे।
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प्रदर्शनी में 1808 के नक्शे समेत अन्य यादों को किया शामिल
प्रदर्शनी में प्रदेश के 1808 के नक्शे समेत हरियाणा के अन्य जिलों से संबंधित विशेष और ऐतिहासिक दस्तावेजों को शामिल किया गया है। इसमेें हिसार जिले की कचहरी में कुछ क्रांतिकारियों के एक अंग्रेज अधिकारी को मारने, झज्जर के किले में पांच बैग सोने के सिक्के  मिलने, पांच बैग चांदी के सिक्के मिलने के बारे में बताया गया। इन सोने और चांदी के सिक्कों की कीमत सन् 1858 में एक लाख 39 हजार रुपये आंकी गई थी। इसके साथ ही बहादुर शाह जफर, छोटू राम, शहीद भगत सिंह, हिसार में विदेशी कपड़ों का बहिष्कार, फिरोजपुर झिरका में असहयोग आंदोलन से संबंधित अभिलेख भी प्रदर्शनी में शामिल किए गए हैं।
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