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बिजली संकट पर गरजे किसान
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Wed, 09 Jul 2014 11:11 PM IST
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मौसम की बेरुखी और बिजली की आंख मिचौली ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। धान की रोपाई नहीं होने के कारण किसान परेशान है।
बिजली संकट को लेकर बुधवार को गांव पट्टीकल्याणा व मनाना के किसानों ने बिजली कार्यालय में नारेबाजी कर विभागीय अधिकारियों को जमकर कोसा।
गुस्साए किसानों ने एसडीओ की गैर-मौजूदगी में मिले फोरमैन को जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने आरोप लगाया कि जो पैसे पहुंचा देते हैं, उनकी बिजली सहीं चलती है और दूसरों के कट लगाकर परेशान किया जाता है।
समालखा सब डिवीजन कार्यालय पहुंचे गांव पट्टीकल्याणा के किसान कुलदीप, मदन लाल, श्याम, बाबूराम, रामकुमार, जय सिंह, पवन, अजीत, पाला, मांगेराम, कृष्ण ने बताया कि उनके गांव की खेतों की सप्लाई वाली बिजली लेन को विभाग ने दो हिस्सों में बांटा हुआ है।
एक हिस्से को समालखा 220 केवीए पर रखा है और दूसरे को हल्दाना 33 केवीए पर कर दिया है। किसानों का आरोप है कि हल्दाना पावर हाउस वाली लाइन के लिए बनाए गए आठ घंटे के शेड्यूल से भी बिजली ज्यादा चलती है, जबकि समालखा वाली लाइन में आठ घंटे में से मुश्किल से दो घंटे भी नहीं चलती। किसानों का कहना है कि बिना पानी धान की फसल सूख रही है और आगे रोपाई का काम भी बंद पड़ा है।
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किसानों ने आरोप लगाया कि इलाके में पड़ने वाली कंपनियों में पैसे लेकर दिन-रात बिजली चालू रखी जाती है। किसानों को पांच घंटे भी बिजली नहीं दी जा रही है। इसके समाधान को लेकर वे बार-बार विभागीय अधिकारियों से मिल चुके हैं। एसडीओ हर बार समाधान का झूठा आश्वासन देकर उन्हें टरका देता है।
किसानों ने चेतावनी देते कहा कि यदि जल्द ही समाधान नहीं होता है तो वे सड़क पर उतरने व पावर हाउस पर ताला लगाने से गुरेज नहीं करेंगे।
उधर, पावर हाउस पहुंचे मनाना निवासी बिजेंद्र, पालेराम, सेवा सिंह, धर्मबीर, सतीश, सुरेश, इंद्र सिंह, गुलाब, अमित राठी, ईश्वर का कहना है कि उनके गांव और खेतों की बिजली सप्लाई नारायणा स्थित 33 केवीए से होती है।
यह जोन वन व टू में बांटी गई है। उनका कहना है कि गांव में सप्लाई देेने वाला एक नंबर कई दिनों से बंद पड़ा है, जबकि दो नंबर लाइन को कुछ लोग बिजली कर्मियों की मिलीभगत का फायदा उठाकर अपने हिसाब से शेड्यूल बनवाकर चलवा रहे हैं।
उनका कहना है कि गांव की बिजली सप्लाई पर एक मुर्गी फार्म के साथ-साथ कुछ ट्यूबवेलों को भी जोड़ा हुआ है। ओवर लोडिंग के चलते बार-बार बिजली गुल होती है।
उनका कहना है कि पिछले कई दिनों से तो बिजली के दर्शन तक मुश्किल हो चुके हैं। रोजमर्रा के कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे है। पूरी-पूरी रात अंधेरे में गर्मी के बीच गुजारनी पड़ रही है।
किसानों का आरोप है कि वे गांव की सप्लाई लाइन से मुर्गी फार्म व खेतों के ट्यूबवेलों को हटाने की कई बार गुहार लगा चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। क्योंकि अधिकारी और कर्मचारी मिलीभगत कर जेब गर्म करने में लगे है और खामियाजा उनको परेशानी के रूप में भुगतना पड़ता है।
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बिजली संकट को लेकर बुधवार को गांव पट्टीकल्याणा व मनाना के किसानों ने बिजली कार्यालय में नारेबाजी कर विभागीय अधिकारियों को जमकर कोसा।
गुस्साए किसानों ने एसडीओ की गैर-मौजूदगी में मिले फोरमैन को जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने आरोप लगाया कि जो पैसे पहुंचा देते हैं, उनकी बिजली सहीं चलती है और दूसरों के कट लगाकर परेशान किया जाता है।
समालखा सब डिवीजन कार्यालय पहुंचे गांव पट्टीकल्याणा के किसान कुलदीप, मदन लाल, श्याम, बाबूराम, रामकुमार, जय सिंह, पवन, अजीत, पाला, मांगेराम, कृष्ण ने बताया कि उनके गांव की खेतों की सप्लाई वाली बिजली लेन को विभाग ने दो हिस्सों में बांटा हुआ है।
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एक हिस्से को समालखा 220 केवीए पर रखा है और दूसरे को हल्दाना 33 केवीए पर कर दिया है। किसानों का आरोप है कि हल्दाना पावर हाउस वाली लाइन के लिए बनाए गए आठ घंटे के शेड्यूल से भी बिजली ज्यादा चलती है, जबकि समालखा वाली लाइन में आठ घंटे में से मुश्किल से दो घंटे भी नहीं चलती। किसानों का कहना है कि बिना पानी धान की फसल सूख रही है और आगे रोपाई का काम भी बंद पड़ा है।
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किसानों ने आरोप लगाया कि इलाके में पड़ने वाली कंपनियों में पैसे लेकर दिन-रात बिजली चालू रखी जाती है। किसानों को पांच घंटे भी बिजली नहीं दी जा रही है। इसके समाधान को लेकर वे बार-बार विभागीय अधिकारियों से मिल चुके हैं। एसडीओ हर बार समाधान का झूठा आश्वासन देकर उन्हें टरका देता है।
किसानों ने चेतावनी देते कहा कि यदि जल्द ही समाधान नहीं होता है तो वे सड़क पर उतरने व पावर हाउस पर ताला लगाने से गुरेज नहीं करेंगे।
उधर, पावर हाउस पहुंचे मनाना निवासी बिजेंद्र, पालेराम, सेवा सिंह, धर्मबीर, सतीश, सुरेश, इंद्र सिंह, गुलाब, अमित राठी, ईश्वर का कहना है कि उनके गांव और खेतों की बिजली सप्लाई नारायणा स्थित 33 केवीए से होती है।
यह जोन वन व टू में बांटी गई है। उनका कहना है कि गांव में सप्लाई देेने वाला एक नंबर कई दिनों से बंद पड़ा है, जबकि दो नंबर लाइन को कुछ लोग बिजली कर्मियों की मिलीभगत का फायदा उठाकर अपने हिसाब से शेड्यूल बनवाकर चलवा रहे हैं।
उनका कहना है कि गांव की बिजली सप्लाई पर एक मुर्गी फार्म के साथ-साथ कुछ ट्यूबवेलों को भी जोड़ा हुआ है। ओवर लोडिंग के चलते बार-बार बिजली गुल होती है।
उनका कहना है कि पिछले कई दिनों से तो बिजली के दर्शन तक मुश्किल हो चुके हैं। रोजमर्रा के कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे है। पूरी-पूरी रात अंधेरे में गर्मी के बीच गुजारनी पड़ रही है।
किसानों का आरोप है कि वे गांव की सप्लाई लाइन से मुर्गी फार्म व खेतों के ट्यूबवेलों को हटाने की कई बार गुहार लगा चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। क्योंकि अधिकारी और कर्मचारी मिलीभगत कर जेब गर्म करने में लगे है और खामियाजा उनको परेशानी के रूप में भुगतना पड़ता है।