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दूषित पेयजल : हर चौथा नमूना फेल
Sun, 23 Aug 2026 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 23 Aug 2026 02:29 AM IST
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पानी के नमूने लेते हेल्थ इंस्पेक्टर सतीश पहल। स्रोत : विभाग
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पानीपत। मौसम में बदलाव के साथ ही जिले में दूषित पेयजल की आपूर्ति आम जनता की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। घरों के नलों में पहुंच रहे बैक्टीरिया युक्त पानी के कारण उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डायरिया के मरीज आने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े एक बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं।
बीते छह महीनों में जिले से पानी के नमूनों की रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली आई है। जांच में हर चौथा नमूना फेल आया है। आपूर्ति किए जा रहे पानी में क्लोरीन की मात्रा या तो बिल्कुल शून्य पाई गई या बेहद कम थी। पानी में क्लोरीन न होने के कारण जानलेवा बैक्टीरिया पनप रहे हैं।
ये सीधे तौर पर लोगों को गंभीर बीमारियों की चपेट में ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को पेयजल लाइनों में लीकेज की सबसे अधिक समस्या ग्रामीण इलाकों से सामने आ रही है। यहां अब तक तीन से चार प्रमुख स्थानों पर गंभीर लीकेज पाई है।
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नागरिक अस्पताल में भर्ती हो रहे मासूम : दूषित पेयजल का सबसे दर्दनाक असर छोटे बच्चों पर देखने को मिल रहा है। नागरिक अस्पताल का बाल रोग वार्ड इस लाचार व्यवस्था की गवाही दे रहा है। भारत नगर का दो माह का मासूम खुश पिछले शनिवार से दस्त की शिकायत के कारण अस्पताल में भर्ती है। वहीं शोंधापुर निवासी चार वर्षीय शिवा बीते तीन दिनों से उल्टी-दस्त की समस्या से जूझ रहा है। बेरीवाली मस्जिद क्षेत्र की एक वर्षीय तमन्ना को भी गंभीर डायरिया के चलते अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा, जिसे हाल ही में छुट्टी मिली है।
6,198 नमूनों में क्लोरीन शून्य : स्वास्थ्य विभाग ने पिछले छह महीनों में पूरे जिले से जल आपूर्ति के 23,095 नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे गए। इनमें से करीब 6,198 नमूनों में क्लोरीन का स्तर पूरी तरह नदारद या मानक से बेहद कम मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि जब पानी में क्लोरीन की आवश्यक मात्रा नहीं होती, तो उसमें दूषित कीटाणु तेजी से पनपने लगते हैं। यही वजह है कि शहर और देहात के बड़े हिस्से में इस समय डायरिया, उल्टी-दस्त और पीलिया जैसी बीमारियां पांव पसार रही हैं।
क्लोरीन की कमी बीमारियों की वजह : डिप्टी सीएमओ डॉ. रिंकू ने बताया कि क्लोरीन पानी में मौजूद खतरनाक जीवाणुओं और बैक्टीरिया को नष्ट करने का काम करती है। यदि आपूर्ति किए जा रहे पानी में क्लोरीन नहीं है तो वह उल्टी-दस्त, पेट में मरोड़ और पीलिया का कारण बनता है। लोगों को घरों में पानी उबालकर पीना चाहिए। इससे हानिकारक कीटाणु खत्म हो जाते हैं। संवाद
महीना
नमूने
क्लोरीन मिली
नहीं मिली
जनवरी
3200
2342
858
फरवरी
3503
2534
969
मार्च
3560
2544
966
अप्रैल
3961
2935
1026
मई
4501
3218
1283
जून
4370
3274
1096
कुल
23095
16847
6198
स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित स्थानों की लाइन को ठीक किया जाता है। क्लोरीन की मात्रा के लिए ट्यूबवेल ऑपरेटर से बात की जाती है। कई जगह कमी मिली हैं। इनको तुरंत दूर करा दिया है। अब बारिश के दिनों में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। -कर्ण बहल, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार फील्ड में जाकर ट्यूबवेल और पेयजल स्रोतों से पानी के नमूने ले रही हैं। जहां भी क्लोरीन की मात्रा कम पाई जा रही है। वहां व्यवस्था दुरुस्त करने और आवश्यक कदम उठाने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पब्लिक हेल्थ) को पत्र लिखकर समस्या को उसी समय ठीक कराया जा रहा है। -डॉ. गीता दहिया, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग।
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पानीपत। मौसम में बदलाव के साथ ही जिले में दूषित पेयजल की आपूर्ति आम जनता की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। घरों के नलों में पहुंच रहे बैक्टीरिया युक्त पानी के कारण उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डायरिया के मरीज आने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े एक बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं।
बीते छह महीनों में जिले से पानी के नमूनों की रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली आई है। जांच में हर चौथा नमूना फेल आया है। आपूर्ति किए जा रहे पानी में क्लोरीन की मात्रा या तो बिल्कुल शून्य पाई गई या बेहद कम थी। पानी में क्लोरीन न होने के कारण जानलेवा बैक्टीरिया पनप रहे हैं।
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ये सीधे तौर पर लोगों को गंभीर बीमारियों की चपेट में ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को पेयजल लाइनों में लीकेज की सबसे अधिक समस्या ग्रामीण इलाकों से सामने आ रही है। यहां अब तक तीन से चार प्रमुख स्थानों पर गंभीर लीकेज पाई है।
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नागरिक अस्पताल में भर्ती हो रहे मासूम : दूषित पेयजल का सबसे दर्दनाक असर छोटे बच्चों पर देखने को मिल रहा है। नागरिक अस्पताल का बाल रोग वार्ड इस लाचार व्यवस्था की गवाही दे रहा है। भारत नगर का दो माह का मासूम खुश पिछले शनिवार से दस्त की शिकायत के कारण अस्पताल में भर्ती है। वहीं शोंधापुर निवासी चार वर्षीय शिवा बीते तीन दिनों से उल्टी-दस्त की समस्या से जूझ रहा है। बेरीवाली मस्जिद क्षेत्र की एक वर्षीय तमन्ना को भी गंभीर डायरिया के चलते अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा, जिसे हाल ही में छुट्टी मिली है।
6,198 नमूनों में क्लोरीन शून्य : स्वास्थ्य विभाग ने पिछले छह महीनों में पूरे जिले से जल आपूर्ति के 23,095 नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे गए। इनमें से करीब 6,198 नमूनों में क्लोरीन का स्तर पूरी तरह नदारद या मानक से बेहद कम मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि जब पानी में क्लोरीन की आवश्यक मात्रा नहीं होती, तो उसमें दूषित कीटाणु तेजी से पनपने लगते हैं। यही वजह है कि शहर और देहात के बड़े हिस्से में इस समय डायरिया, उल्टी-दस्त और पीलिया जैसी बीमारियां पांव पसार रही हैं।
क्लोरीन की कमी बीमारियों की वजह : डिप्टी सीएमओ डॉ. रिंकू ने बताया कि क्लोरीन पानी में मौजूद खतरनाक जीवाणुओं और बैक्टीरिया को नष्ट करने का काम करती है। यदि आपूर्ति किए जा रहे पानी में क्लोरीन नहीं है तो वह उल्टी-दस्त, पेट में मरोड़ और पीलिया का कारण बनता है। लोगों को घरों में पानी उबालकर पीना चाहिए। इससे हानिकारक कीटाणु खत्म हो जाते हैं। संवाद
महीना
नमूने
क्लोरीन मिली
नहीं मिली
जनवरी
3200
2342
858
फरवरी
3503
2534
969
मार्च
3560
2544
966
अप्रैल
3961
2935
1026
मई
4501
3218
1283
जून
4370
3274
1096
कुल
23095
16847
6198
स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित स्थानों की लाइन को ठीक किया जाता है। क्लोरीन की मात्रा के लिए ट्यूबवेल ऑपरेटर से बात की जाती है। कई जगह कमी मिली हैं। इनको तुरंत दूर करा दिया है। अब बारिश के दिनों में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। -कर्ण बहल, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार फील्ड में जाकर ट्यूबवेल और पेयजल स्रोतों से पानी के नमूने ले रही हैं। जहां भी क्लोरीन की मात्रा कम पाई जा रही है। वहां व्यवस्था दुरुस्त करने और आवश्यक कदम उठाने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पब्लिक हेल्थ) को पत्र लिखकर समस्या को उसी समय ठीक कराया जा रहा है। -डॉ. गीता दहिया, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग।