{"_id":"7c445d2b532f5683607e259caef3e418","slug":"panipat-electric-supply-problem-light-cut-3","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली बिल गलत बनाने पर पांच हजार जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली बिल गलत बनाने पर पांच हजार जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Tue, 17 Jun 2014 11:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजली निगम ने उपभोक्ताओं के बिल बनाने वाली कंपनी को पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना गलत बिल बनाने पर लगाया गया है। कंपनी ने इस बार उपभोक्ताओं के बिलों में पिछले बिलों की राशि भी जोड़कर भेज दी है।
इससे हजाराें उपभोक्ता कार्यालयों में धक्के खाते फिर रहे हैं। अमर उजाला ने मंगलवार को उपभोक्ताओं की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
इसके बाद हरकत में आए बिजली निगम ने गलत बिल बनाने पर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा। मगर ठोस जवाब न मिलने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया।
अर्द्ध-सरकारी कंपनी के पास है बिल बनाने की जिम्मेदारी
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने पानीपत सर्कल कार्यालय के बिल बनाने की जिम्मेदारी एक अद्ध4-सरकारी कंपनी को दे रखी है। कंपनी के सॉफ्टवेयर के साथ ही बिल बनाने और जमा कराने वाली साइट जुड़ी हुई है।
इससे ही हर बार बिलों से संबंधित स्टेटस तैयार होकर निगम के पास पहुंचता है। निगम और निजी काउंटराें पर भरे जाने वाले बिलों की राशि भी ऑनलाइन कंपनी के सॉफ्टवेयर व निगम के अंकाउंट में अपडेट हो जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया। कंपनी ने पिछले महीनों में उपभोक्ताओं से जो बिल लिए थे, उनकी राशि भी इस बार बिलों में जोड़कर भेज दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इससे हजाराें उपभोक्ता कार्यालयों में धक्के खाते फिर रहे हैं। अमर उजाला ने मंगलवार को उपभोक्ताओं की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
इसके बाद हरकत में आए बिजली निगम ने गलत बिल बनाने पर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा। मगर ठोस जवाब न मिलने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया।
अर्द्ध-सरकारी कंपनी के पास है बिल बनाने की जिम्मेदारी
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने पानीपत सर्कल कार्यालय के बिल बनाने की जिम्मेदारी एक अद्ध4-सरकारी कंपनी को दे रखी है। कंपनी के सॉफ्टवेयर के साथ ही बिल बनाने और जमा कराने वाली साइट जुड़ी हुई है।
विज्ञापन
इससे ही हर बार बिलों से संबंधित स्टेटस तैयार होकर निगम के पास पहुंचता है। निगम और निजी काउंटराें पर भरे जाने वाले बिलों की राशि भी ऑनलाइन कंपनी के सॉफ्टवेयर व निगम के अंकाउंट में अपडेट हो जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया। कंपनी ने पिछले महीनों में उपभोक्ताओं से जो बिल लिए थे, उनकी राशि भी इस बार बिलों में जोड़कर भेज दी है।
विज्ञापन