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रिफाइंड और केमिकल से बन रहा था देसी घी
amar ujala beuro panipat
Updated Sun, 09 Oct 2016 12:27 AM IST
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- फोटो : g
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फेस्टिवल सीजन शुरू होने के साथ ही बाजार में नकली खाद्य पदार्थ आने लगे हैं। कुछ दिन पहले एक दुकान से बड़ी मात्र में नकली घी पकड़ा था। अब शनिवार को सीआईए-टू ने शहर से सटे गांव निबंरी के पास निकली घी बनाने की फैक्ट्री पकड़ ली। छापे में फैक्ट्री से 784 किलोग्राम नकली घी, चार टीन रिफाइंड, विभिन्न कंपनियों के लेवल, स्टीकर ढक्कन और होलोग्राम बरामद हुए हैं।
आरोपी घटिया स्तर का रिफाइंड और वनस्पति घी में केमिकल मिलाकर नामी कंपनियों का देसी घी बनाकर बेचते थे। इसके बाद घी को गाढ़ा बनाने के अन्य केमिकल के एसेंस भी मिलाया जाता था। सीआईए-टू ने नकली घी बनाने के माफिया को सोनीपत के गोरीपुर बॉर्डर से गिरफ्तार किया है। सीआईए-टू ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर ले लिया है।
सीआईए-टू पानीपत की टीम ने गुड़मंडी स्थित रमेश पंसारी की दुकान पर चार दिन पहले छापेमारी के बाद जांच तेज की तो दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में नकली घी के माफिया होने के सुराग मिले थे। पुलिस ने इसके बाद माफिया का पीछा शुरू कर दिया। उसकी लोकेशन पानीपत शहर के आसपास मिली। सीआईए-टू पानीपत ने तेजी दिखाई तो शहर से सटे गांव निंबरी के नजदीक नकली घी की एक फैक्ट्री होने की सूचना मिली।
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इसके बाद पुलिस टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा। यहां से 784 किलोग्राम विभिन्न नामी कंपनियों का नकली घी बरामद किया। यहां पर भी पतंजलि समेत दस कंपनियों के स्टीकर और होलोग्राम का इस्तेमाल किया जा रहा था। फैक्ट्री से चार टीन रिफाइंड, तराजू और विभिन्न कंपनियों के स्टीकर, होलोग्राम, ढक्कन आदि भी बरामद हुए। सीआईए-टू ने आरोपी चक्रेश निवासी गाजियाबाद को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वहां से आरोपी को तीन दिन के रिमांड पर ले लिया है। पुलिस आरोपी से रिमांड के दौरान गहनता से पूछताछ कर रही है।
आरोपी यूपी भागने की फिराक में था
सीआईए-टू ने गुड़ मंडी में नकली घी बेचने के आरोपी दुकानदार रमेश पंसारी के आका चक्रेश निवासी लोनी, गाजियाबाद को गिरफ्तार कर लिया है। दावा किया जा रहा है कि चक्रेश नकली घी के कारोबार का बड़ा माफिया है। वह हरियाणा, दिल्ली और यूपी समेत कई प्रदेशों में नकली घी का कारोबार चला रहा था। चक्रेश निंबरी गांव में फैक्टरी को किराये पर लेकर दो साल से नकली घी का कारोबार कर रहा था। चार दिन पहले सीआईए-टू के हत्थे चढ़ा रमेश पंसारी भी चक्रेश का गुर्गा था। गिरफ्तारी के समय वह गाजियाबाद भागने की फिराक में था।
ऐसे फैला रखा था जाल
सीआईए-टू प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज वर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया टीम ने चार दिन पहले गुड़ मंडी स्थित रमेश पंसारी की दुकान पर छापा मारकर पौने दो क्विंटल नकली घी पकड़ा था। उससे पूछताछ में चक्रेश का नाम सामने आया था। रमेश की गिरफ्तारी के बाद चक्रेश भाग गया था। टीम उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थी। पुलिस चक्रेश को शनिवार को सोनीपत के गोरीपुर बॉर्डर से पकड़ लिया।
चार दिन में दूसरा बड़ा खुलासा
सीआईए-टू ने चार दिन पहले गुड़मंडी स्थित रमेश पंसारी की दुकान पर छापा मारकर पौने दो क्विंटल नकली घी बरामद किया था। पुलिस ने उसे दो दिन के रिमांड पर लिया था। अब पुलिस ने शनिवार को नकली देसी घी बनाने की फैक्ट्री पकड़ ली। ।
इस मात्रा में मिली खेप
गांव निंबरी स्थित फैक्ट्री में पुलिस को अमूल के पांच-पांच सौ ग्राम के 120 पैकेट, एक-एक किग्रा के 121 पैकेट, मदर डेयरी के पांच-पांच सौ ग्राम के 72 पैकेट और एक-एक किलो के 42 पैकेट, मिल्क फूड के पांच-पांच सौ ग्राम के 16 पैकेट और एक किलो के 42 पैकेट, पारस कंपनी के एक-एक किलो के 29 पैकेट, चार टीन रिफाइंड, 11 टीनों में नकली घी (पूरी तरह से तैयार नहीं), 14 टीन नकली तैयार घी, विभिन्न कंपनियों के स्टीकर, होलोमार्क, ढक्कन और तराजू मिली है।
घी बनाने में दूध की एक बूंद का भी नहीं होता इस्तेमाल
नकली घी के माफिया लोगों को घी के रूप में जहर दे रहे थे। घी को बनाने के लिए माफिया पहले बाल्टी में रिफाइंड डालते। इसमें निम्न स्तर का वनस्पति घी मिला देते हैं। साथ ही इसमें सिंथेटिक भी मिलाया जाता था। देसी घी की सुगंध के लिए लोग इसमें केमिकल और मोटा करने के लिए एक पाउडर मिलाते थे।
एक किलो पर 60 की लागत, 140 में बिक्री
सीआईए-टू के इंचार्ज मनोज वर्मा ने बताया कि माफिया नकली घी के काले धंधे में दोगुना पैसा कमा रहा था। माफिया केवल 60 रुपये में एक किलो नकली घी तैयार करते थे। इसे 140 रुपये प्रति किलो बेचा जाता है। यह घी सिर्फ हलवाई और करियाना की दुकानों पर बेचा जाता था।
स्पलायर से बना नकली घी का माफिया
सीआईए-टू प्रभारी मनोज वर्मा ने बताया आरोपी चक्रेश दो साल पहले तक दिल्ली स्थित किरयाना की दुकानों पर सामान सप्लाई करता था। उसने गाजियाबाद में एक व्यक्ति से नकली घी बनाना सीखा। इस धंधे में मोटा मुनाफा देखकर आरोपी ने गाजियाबाद में ही अपना काम शुरू कर दिया।
दो साल से चल रहा था धंधा मालिक को पता तक नहीं
आरोपी पिछले दो साल से गांव निबंरी में एक फैक्ट्री को किराए पर लेकर नकली घी बना रहा था। दो साल तक गांव निबंरी निवासी फैक्ट्री के मालिक को यह तक पता नहीं लगा कि फैक्ट्री में क्या बनता है। मालिक को फैक्ट्री अक्सर बंद ही मिलती थी।
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आरोपी घटिया स्तर का रिफाइंड और वनस्पति घी में केमिकल मिलाकर नामी कंपनियों का देसी घी बनाकर बेचते थे। इसके बाद घी को गाढ़ा बनाने के अन्य केमिकल के एसेंस भी मिलाया जाता था। सीआईए-टू ने नकली घी बनाने के माफिया को सोनीपत के गोरीपुर बॉर्डर से गिरफ्तार किया है। सीआईए-टू ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर ले लिया है।
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सीआईए-टू पानीपत की टीम ने गुड़मंडी स्थित रमेश पंसारी की दुकान पर चार दिन पहले छापेमारी के बाद जांच तेज की तो दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में नकली घी के माफिया होने के सुराग मिले थे। पुलिस ने इसके बाद माफिया का पीछा शुरू कर दिया। उसकी लोकेशन पानीपत शहर के आसपास मिली। सीआईए-टू पानीपत ने तेजी दिखाई तो शहर से सटे गांव निंबरी के नजदीक नकली घी की एक फैक्ट्री होने की सूचना मिली।
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इसके बाद पुलिस टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा। यहां से 784 किलोग्राम विभिन्न नामी कंपनियों का नकली घी बरामद किया। यहां पर भी पतंजलि समेत दस कंपनियों के स्टीकर और होलोग्राम का इस्तेमाल किया जा रहा था। फैक्ट्री से चार टीन रिफाइंड, तराजू और विभिन्न कंपनियों के स्टीकर, होलोग्राम, ढक्कन आदि भी बरामद हुए। सीआईए-टू ने आरोपी चक्रेश निवासी गाजियाबाद को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वहां से आरोपी को तीन दिन के रिमांड पर ले लिया है। पुलिस आरोपी से रिमांड के दौरान गहनता से पूछताछ कर रही है।
आरोपी यूपी भागने की फिराक में था
सीआईए-टू ने गुड़ मंडी में नकली घी बेचने के आरोपी दुकानदार रमेश पंसारी के आका चक्रेश निवासी लोनी, गाजियाबाद को गिरफ्तार कर लिया है। दावा किया जा रहा है कि चक्रेश नकली घी के कारोबार का बड़ा माफिया है। वह हरियाणा, दिल्ली और यूपी समेत कई प्रदेशों में नकली घी का कारोबार चला रहा था। चक्रेश निंबरी गांव में फैक्टरी को किराये पर लेकर दो साल से नकली घी का कारोबार कर रहा था। चार दिन पहले सीआईए-टू के हत्थे चढ़ा रमेश पंसारी भी चक्रेश का गुर्गा था। गिरफ्तारी के समय वह गाजियाबाद भागने की फिराक में था।
ऐसे फैला रखा था जाल
सीआईए-टू प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज वर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया टीम ने चार दिन पहले गुड़ मंडी स्थित रमेश पंसारी की दुकान पर छापा मारकर पौने दो क्विंटल नकली घी पकड़ा था। उससे पूछताछ में चक्रेश का नाम सामने आया था। रमेश की गिरफ्तारी के बाद चक्रेश भाग गया था। टीम उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थी। पुलिस चक्रेश को शनिवार को सोनीपत के गोरीपुर बॉर्डर से पकड़ लिया।
चार दिन में दूसरा बड़ा खुलासा
सीआईए-टू ने चार दिन पहले गुड़मंडी स्थित रमेश पंसारी की दुकान पर छापा मारकर पौने दो क्विंटल नकली घी बरामद किया था। पुलिस ने उसे दो दिन के रिमांड पर लिया था। अब पुलिस ने शनिवार को नकली देसी घी बनाने की फैक्ट्री पकड़ ली। ।
इस मात्रा में मिली खेप
गांव निंबरी स्थित फैक्ट्री में पुलिस को अमूल के पांच-पांच सौ ग्राम के 120 पैकेट, एक-एक किग्रा के 121 पैकेट, मदर डेयरी के पांच-पांच सौ ग्राम के 72 पैकेट और एक-एक किलो के 42 पैकेट, मिल्क फूड के पांच-पांच सौ ग्राम के 16 पैकेट और एक किलो के 42 पैकेट, पारस कंपनी के एक-एक किलो के 29 पैकेट, चार टीन रिफाइंड, 11 टीनों में नकली घी (पूरी तरह से तैयार नहीं), 14 टीन नकली तैयार घी, विभिन्न कंपनियों के स्टीकर, होलोमार्क, ढक्कन और तराजू मिली है।
घी बनाने में दूध की एक बूंद का भी नहीं होता इस्तेमाल
नकली घी के माफिया लोगों को घी के रूप में जहर दे रहे थे। घी को बनाने के लिए माफिया पहले बाल्टी में रिफाइंड डालते। इसमें निम्न स्तर का वनस्पति घी मिला देते हैं। साथ ही इसमें सिंथेटिक भी मिलाया जाता था। देसी घी की सुगंध के लिए लोग इसमें केमिकल और मोटा करने के लिए एक पाउडर मिलाते थे।
एक किलो पर 60 की लागत, 140 में बिक्री
सीआईए-टू के इंचार्ज मनोज वर्मा ने बताया कि माफिया नकली घी के काले धंधे में दोगुना पैसा कमा रहा था। माफिया केवल 60 रुपये में एक किलो नकली घी तैयार करते थे। इसे 140 रुपये प्रति किलो बेचा जाता है। यह घी सिर्फ हलवाई और करियाना की दुकानों पर बेचा जाता था।
स्पलायर से बना नकली घी का माफिया
सीआईए-टू प्रभारी मनोज वर्मा ने बताया आरोपी चक्रेश दो साल पहले तक दिल्ली स्थित किरयाना की दुकानों पर सामान सप्लाई करता था। उसने गाजियाबाद में एक व्यक्ति से नकली घी बनाना सीखा। इस धंधे में मोटा मुनाफा देखकर आरोपी ने गाजियाबाद में ही अपना काम शुरू कर दिया।
दो साल से चल रहा था धंधा मालिक को पता तक नहीं
आरोपी पिछले दो साल से गांव निबंरी में एक फैक्ट्री को किराए पर लेकर नकली घी बना रहा था। दो साल तक गांव निबंरी निवासी फैक्ट्री के मालिक को यह तक पता नहीं लगा कि फैक्ट्री में क्या बनता है। मालिक को फैक्ट्री अक्सर बंद ही मिलती थी।