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अफसरों की कोठियों पर बेगार में लगे सफाई कर्मी

Sun, 07 Jun 2015 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत Updated Sun, 07 Jun 2015 12:27 AM IST
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नगर निगम के दर्जनों कर्मचारी निगम से वेतन लेकर अफसरों के बंगलों की सफाई कर रहे हैं जबकि शहर में सफाई कर्मियों की कमी के चलते जगह जगह गंदगी व कूड़े करकट के ढेर लगे हैं। निगम के पास शहर की जनसंख्या के मुताबिक पर्याप्त सफाई कर्मी व संसाधन नहीं हैं। उसके बाद भी निगम अधिकारियों ने अफसरों के साथ भाईचारा बनाए रखने के लिए बेगार में सफाई कर्मी दे रखे हैं।
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निगम के करीब 20 से 25 कर्मचारी जजों की कोठियों व जिला उपायुक्त व एमडी शुगर मिल जैसे बड़े ओहदे के अधिकारियों के घरों की सफाई, माली का काम  उनके घर के काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शहर में ग्रीन बेल्ट, पार्क, सड़कें, फुटपाथ आदि बिना देखरेख के उजड़ रहे हैं।
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शहर की जनसंख्या  पौने सात लाख है, लेकिन सफाई कर्मी पूरे सात सौ भी नहीं हैं। निगम द्वारा चार सौ के करीब कर्मचारी तो अनुबंध आधार पर लगाए गए हैं। नियमित सफाई कर्मियों की संख्या 250 के करीब है लेकिन उसके बाद भी निगम अफसरों के साथ पर्सनल रिलेशन को बेहतर बनाए रखने के लिए करीब दो दर्जन कर्मचारियों को बेगार पर लगाया हुआ है। ऐसा नहीं है कि इस बात से मेयर पार्षद या अन्य प्रशासनिक अधिकारी अवगत नहीं रहे लेकिन जनता के पैसे के दुरुपयोग को रोकने के लिए कोई भी आगे आने को तैयार नहीं हुआ।  निगम द्वारा पार्षदों को उनके वार्डों में सफाई के लिए जिन सफाई कर्मियों की लिस्ट भेजी है आज तक लिस्ट के मुताबिक सफाई कर्मी वार्डों की सफाई के लिए नहीं पहुंचे हैं।
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चार की जनसंख्या पर होना चाहिए एक सफाई कर्मी
म्यूनिसिपल एक्ट के तहत नगर निगम के पास चार सौ  की आबादी पर एक सफाई कर्मी होना चाहिए लेकिन पानीपत नगर निगम में पौने सात लाख की जनसंख्या पर 650 सफाई कर्मी हैं। आलम यह है कि शहर की कॉलोनियों में सफाई हुए कई माह बीत जाते हैं। लोग सीएम विंडो से लेकर विधायक तक शिकायत कर कॉलोनियों की सफाई करवाते हैं। वहीं बेगार में लगे सफाई कर्मी निगम से वेतन लेकर भी शहर की सफाई में कोई सहयोग नहीं दे रहे हैं।

अफसरशाही की भेंट चढ़ रहा जनता का पैसा
शहर में अफसरशाही हावी होने से लोगों को अपने हक के लिए भी आवाज उठाने का अधिकार नहीं है। वहीं दूसरी ओर शहर की सरकार को वाच करने के लिए जनता द्वारा चुने के गए प्रतिनिधि में भी अपना उल्लू सीधा करने के प्रयास में जनता के साथ हो रहे खिलवाड़ पर कोई आवाज नहीं उठा रहे हैं।

क्या हैं पार्षदों की राय
नगर निगम के पास पहले ही सफाई कर्मी नहीं हैं, जिस कारण कॉलोनियों की सफाई हुए भी कई माह बीत जाते हैं। वहीं दूसरी ओर बेगार में लगे दर्जनों कर्मचारी निगम से वेतन लेकर अफसरों के बंगलों की सफाई करते हैं। यह शहर की जनता के साथ नाइंसाफी है। इस मुद्दे को हाउस मीटिंग में उठाया जाएगा।
अशोक कटारिया पार्षद वार्ड- 10

म्यूनिसिपल एक्ट के तहत निगम क्षेत्र में सफाई करवाने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है लेकिन अफसरों के घरों में बर्तन साफ करवाना, झाड़ू लगवाना व उनकी साग सब्जियां लाने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाना गलत है। यह जनता के पैसे का दुरुपयोग है।
दुष्यंत भट्ट पार्षद वार्ड-24

पूर्व मेयर ने मामले पर चुटकी लेकर कहा कि जब मांझी के लीची व आम तोड़ने पर रोक लगाने के लिए 29 पुलिस कर्मी लगाए जा सकते हैं, तो फिर अफसर अपने घरों की सफाई के लिए एक दो सफाई कर्मी तो रख ही सकते हैं लेकिन यह नियम का उल्लंघन है, इस मामले की जांच होनी चाहिए।

भूपेंद्र सिंह पूर्व मेयर पानीपत

शहर में डीसी, एसडीएम, जजों की कोठियों पर कई-कई कर्मचारी लगे हैं। वर्ष 2005 में इस मुद्दे को हाउस की मीटिंग में उठाया गया था लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुइ है। एक बार फिर मुद्दे को हाउस की मीटिंग में उठाएंगे। जनता के पैसे का दुरुपयोग करने का अधिकार किसी को भी नहीं है।
हरीश शर्मा पार्षद वार्ड तीन ।
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