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एक माह बाद भी तैयार नहीं ऑक्सीजन प्लांट
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। कोरोना के केस में लगातार आ रही कमी और ऑक्सीजन की मांग कम होते ही प्रशासन ने भी लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है। सिविल अस्पताल में बनाए जा रहे ऑक्सीजन प्लांट का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। प्रशासन ने एचएसएआई के सहयोग से इस प्लांट को 10 दिन में तैयार करने का दावा किया था। 10 मई तक प्लांट को चालू कर दिया जाना था। इस प्लांट में एक मिनट में 1200 लीटर ऑक्सीजन बननी थी।
एनएफएल ने अप्रैल में सिविल अस्पताल में प्लांट लगाने की पेशकश की थी। प्रशासन से तालमेल न होने के कारण एनएफएल ने ये प्लांट उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में लगा दिया था। जिले में ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए एनएचएआई ने यहां प्लांट लगाने का फैसला किया था। एक मई को यहां जगह चिह्नित कर निर्माण कार्य भी शुरू हो गया था। प्रशासन ने 10 मई तक प्लांट का काम पूरा करने का दावा किया था। वहीं समालखा में भी ऑक्सीजन प्लांट का काम शुरू किया गया था। इस प्लांट में प्रति मिनट 200 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होना था, इस प्लांट का काम अब तक अधूरा पड़ा है।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले के हालात गंभीर हो गए थे। सरकार ने पानीपत को पांच मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने का निर्णय किया था, लेकिन ये ऑक्सीजन की मात्रा निजी अस्पतालों के लिए काफी नहीं थी। दिन भर अस्पताल का स्टाफ और मरीजों के परिजन ऑक्सीजन के लिए सड़कों पर धक्के खाते थे। उस वक्त जिले में कोरोना के रोगियों का पॉजिटिविटी रेट 43 प्रतिशत हो गया था। अब ये घटकर 4 प्रतिशत पर आ गया है। अस्पतालों में कोरोना के महज 254 रोगी ही दाखिल हैं। जिले में अब तक 70 प्रतिशत ऑक्सीजन बेड भी खाली हैं। ऑक्सीजन की डिमांड घटकर 4 टन पर आ गई है। उस वक्त निजी अस्पतालों ने 10 टन ऑक्सीजन की मांग की थी।
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प्लांट के निर्माण में जिले की भूमिका कम है। हम जल्द प्लांट का काम पूरा करने की मांग कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द प्लांट का काम पूरा हो जाए। - डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन, पानीपत।
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पानीपत। कोरोना के केस में लगातार आ रही कमी और ऑक्सीजन की मांग कम होते ही प्रशासन ने भी लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है। सिविल अस्पताल में बनाए जा रहे ऑक्सीजन प्लांट का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। प्रशासन ने एचएसएआई के सहयोग से इस प्लांट को 10 दिन में तैयार करने का दावा किया था। 10 मई तक प्लांट को चालू कर दिया जाना था। इस प्लांट में एक मिनट में 1200 लीटर ऑक्सीजन बननी थी।
एनएफएल ने अप्रैल में सिविल अस्पताल में प्लांट लगाने की पेशकश की थी। प्रशासन से तालमेल न होने के कारण एनएफएल ने ये प्लांट उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में लगा दिया था। जिले में ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए एनएचएआई ने यहां प्लांट लगाने का फैसला किया था। एक मई को यहां जगह चिह्नित कर निर्माण कार्य भी शुरू हो गया था। प्रशासन ने 10 मई तक प्लांट का काम पूरा करने का दावा किया था। वहीं समालखा में भी ऑक्सीजन प्लांट का काम शुरू किया गया था। इस प्लांट में प्रति मिनट 200 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होना था, इस प्लांट का काम अब तक अधूरा पड़ा है।
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कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले के हालात गंभीर हो गए थे। सरकार ने पानीपत को पांच मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने का निर्णय किया था, लेकिन ये ऑक्सीजन की मात्रा निजी अस्पतालों के लिए काफी नहीं थी। दिन भर अस्पताल का स्टाफ और मरीजों के परिजन ऑक्सीजन के लिए सड़कों पर धक्के खाते थे। उस वक्त जिले में कोरोना के रोगियों का पॉजिटिविटी रेट 43 प्रतिशत हो गया था। अब ये घटकर 4 प्रतिशत पर आ गया है। अस्पतालों में कोरोना के महज 254 रोगी ही दाखिल हैं। जिले में अब तक 70 प्रतिशत ऑक्सीजन बेड भी खाली हैं। ऑक्सीजन की डिमांड घटकर 4 टन पर आ गई है। उस वक्त निजी अस्पतालों ने 10 टन ऑक्सीजन की मांग की थी।
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प्लांट के निर्माण में जिले की भूमिका कम है। हम जल्द प्लांट का काम पूरा करने की मांग कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द प्लांट का काम पूरा हो जाए। - डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन, पानीपत।