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Panipat News: मंडियों में 1.45 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की आवक, 57 प्रतिशत ही हो पाया भुगतान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2026 07:05 PM IST
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Over 1.45 lakh metric tonnes of paddy arrived in the mandis; only 57 percent has been paid for.
अनाज मंडी में लगे धान के ढेर। संवाद
उठान धीमा होने के कारण मंडियों में लग रही बोरी
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। मौसम साफ होने पर जिले की अनाज मंडियों में धान की आवक तेज हो गई है। किसान धान लेकर आ रहे हैं, लेकिन खरीद के गति पकड़ने के बाद उठान तेज नहीं हो पाया है। धीमी रफ्तार के चलते किसानों और आढ़तियों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।
मंडियों में जगह की कमी और उठान न होने की समस्या को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह से गंभीर हो गया है। मंडियों में धान का उठान धीमा रहने का मुख्य कारण मिलर्स और ट्रांसपोर्टरों के बीच तालमेल में कमी है। ट्रक की पर्याप्त उपलब्धता न होना और राइस मिलों में स्टोरेज की समस्या बताया जा रहा है। समय पर गाड़ियां न मिलने के कारण मंडियों में धान के कट्टे लगातार ढेर होते जा रहे हैं।
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जिले की विभिन्न मंडियों में अब तक 1,45,940 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। सबसे अधिक आवक समालखा मंडी में 82,529 मीट्रिक टन, पानीपत मंडी में 25,204 मीट्रिक टन, और मतलौडा मंडी में 13,567 मीट्रिक टन दर्ज की है। इसके अलावा इसराना में 11,457 मीट्रिक टन और बाबरपुर मंडी में 7,935 मीट्रिक टन धान आई है। सरकारी और निजी एजेंसियों में अब तक 1,45,940 मीट्रिक टन धान की खरीद की है।
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भुगतान और उठान की स्थिति
सरकारी एजेंसियों ने 9,847.5 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। मंडियों से अब तक 3,112 मीट्रिक टन धान का ही उठान हो पाया है, जबकि लगभग 6,734 मीट्रिक टन धान अभी भी मंडियों में उठान के इंतजार में पड़ा है। जिले में उठान करीब 31.6 प्रतिशत हुआ है। भुगतान की बात करें तो एजेंसियों (हेफेड और वेयरहाउस) का 7,60,02,997 रुपये का देय बनता है। इसमें से 4,40,33,263 रुपये (लगभग 57.9 प्रतिशत) का भुगतान किया जा चुका है। 3,19,69,734 रुपये का भुगतान अभी बाकी है।
किसानों और आढ़तियों ने जताई चिंता
इसराना के किसान रमेश कुमार और समालखा के किसान सुरेश ने बताया कि मंडियों में जगह कम पड़ने के कारण उन्हें अपनी फसल खुले आसमान के नीचे रखनी पड़ रही है। आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान धर्मबीर मलिक ने बताया कि धीमी लिफ्टिंग के कारण आढ़तियों और किसानों दोनों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यदि जल्द ही उठान में तेजी नहीं लाई गई तो मंडियों में हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।


अधिकारियों के साथ हर रोज समीक्षा की जा रही है। मंडियों से धान का उठान प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए हैं। ट्रांसपोर्टर और मिलर्स की लगातार अनदेखी चलती तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त।

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