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अनाथालय संचालक पर नहीं है विश्वास
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Sat, 30 Jul 2016 11:34 PM IST
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पानीपत
- फोटो : पानीपत
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पानीपत। एचएससीपीसीआर (हरियाणा स्टेट कमीशन प्रोटेक्टर ऑफ चाइल्ड राइट्स) ने शोंदापुर स्थित बाल अनाथालय से तीन बच्चियों के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने पर सख्त रुख अपनाया है। साथ ही बाल अनाथालय के माहौल पर कड़ी चिंता व्यक्त की है। आयोग सदस्यों ने बदतर हालात देखते हुए जिले में सरकारी बाल अनाथालय शुरू करने की तक सिफारिश कर दी और बाल एवं कल्याण विभाग को सरकारी अनाथालय के लिए एक माह में भवन तलाशने के आदेश दिए।
आयोग ने स्पष्ट कहा कि उनको बाल अनाथालय संचालक पर जरा विश्वास नहीं। हालांकि, एसडीएम की जांच पर संतोष व्यक्त किया। आयोग की टीम ने सरकारी विश्राम में पहुंचे परिवहन एवं आवास मंत्री कृष्ण लाल पंवार से मुलाकात कर अनाथ बच्चों के लिए भवन बनवाने की गुहार लगाई। मंत्री ने आयोग को जल्द सरकारी भवन निर्माण का आश्वासन दिया है।
शोंदापुर स्थित बाल अनाथालय से तीन बच्चियों के लापता होने के एक माह बाद एचएससीपीसीआर की टीम शनिवार को सरकारी विश्राम गृह पहुंची। टीम ने बाल एवं कल्याण विभाग की चेयरपर्सन सुमन सूध से तीनों बच्चियों के लापता होने के मामले में जांच रिपोर्ट ली। जांच के बाद टीम ने बाल एवं कल्याण विभाग को अनाथ बच्चों का इंतजाम सरकारी भवन में करने के आदेश दिए। विभाग को 30 दिन में अनाथालय के लिए भवन तैयार करवाकर आयोग को रिपोर्ट देनी है। टीम ने सोमवार से ही शोंदापुर स्थित बाल अनाथालय से दूसरे जिले के बच्चों को उनके होम जिले में स्थानांतरित करने के आदेश दिए।
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अनाथालय में नहीं कोई सुविधा
मीटिंग में आयोग के सदस्यों ने बाल अनाथालय के संचालक अमरजीत नरवाल की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की। टीम के सदस्य बीके गोयल ने कहा कि बाल अनाथालय में कोई सुविधा नहीं है। वहां बच्चों की स्थिति बेहद दयनीय है। संचालक बच्चों की देख रेख भी सही प्रकार से करते। बच्चों को सरकारी भवन में शिफ्ट करना बेहद जरूरी है। आयोग की टीम में बीके गोयल, परमजीत सिंह, रमनदीप और सुनीता लोहचक मौजूद रही।
यह है मामला
शोंदापुर गांव स्थित बाल अनाथालय से 29 जून को काजल रानी, अंजिल और काजल नाम की तीन बच्चियां लापता हो गई थीं। बाल अनाथालय के संचालक के अनुसार तीनों बच्चियां रात को भागी थीं। पुलिस मामले में किसी प्रकार का कोई सुराग नहीं जुटा सकी। उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे ने मामले की जांच एसडीएम विवेक चौधरी को सौंप थी। बच्चियों के लापता होने के बाद से ही आयोग मामले पर नजर रखे हुए है। आयोग ने प्रशासन से मामले की जांच को लेकर जवाब तलब किया है।
बाल अनाथालय के संचालक पर नहीं भरोसा
रेस्ट हाउस में पहुंची आयोग की टीम ने कहा कि तीन बच्चियों को बाल अनाथालय से लापता हुए एक माह बीत चुका है। अब तक उनका सुराग नहीं लगा है। हालात बदतर होने के कारण ही बच्चे अनाथालय से भागने का मन बनाते है। इससे पहले भी आयोग को अमरजीत नरवाल की शिकायत मिल चुकी है।
नियमों और कानून को रखा ताक पर
एचएससीपीसीआर की टीम के सदस्य बीके गोयल ने कहा कि वह कई बार शोंदापुर स्थित बाल अनाथालय का निरीक्षण कर चुके हैं। अनाथालय में नियम- कानून को ताक पर रख दिया गया है। अनाथालय में लगे सीसीटीवी कैमरे अधिकतर खराब रहते है। लड़कियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। बच्चों की रहने की व्यवस्था तक दुरुस्त नहीं है।
मदर टेरेसा होम का भी किया निरीक्षण
एचएससीपीसीआर की टीम रेस्ट हाउस में मीटिंग के बाद सेक्टर 11-12 मदर टेरेसा होम पहुंची। टीम ने वहां बच्चों के सोने, खाने, नहाने के स्थानों को देखा। टीम ने बच्चों से भी बात की। आयोग की टीम होम की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आई।
बाल एवं कल्याण विभाग की जांच से सतुंष्ट आयोग
बाल एवं कल्याण विभाग की चेयरपर्सन सुमन सूध ने तीनों बच्चियों के लापता होने के मामले की रिपोर्ट आयोग के सदस्यों के सामने पेश की। उन्होंने बच्चियों के फरार होने के कारण भी बताए। बाल एवं कल्याण विभाग की जांच रिपोर्ट से आयोग की टीम संतुष्ट नजर आई।
सर मुझ पर भी इल्जाम लगाता है अनाथालय संचालक
आयोग की टीम के साथ मीटिंग में बाल एवं कल्याणा विभाग की चेयरपर्सन सुमन सूध ने अपनी परेशानियां भी साझा की। उन्होंने कहा कि वह भी अनाथालय संचालक की कार्यप्रणाली से खुश नहीं है। बच्चों के साथ वहां दुर्व्यवहार हो रहा है। बच्चों के रहने के लिए उचित स्थान तक नहीं है। बाल अनाथालय की बच्चियां कई बार उनसे भी अनाथालय के संचालक अमरजीत नरवाल की शिकायत कर चुकी हैं। उन्होंने मामले में एक्शन लिया तो उन पर ही पैसे मांगने का गंभीर आरोप लगा दिया।
मैं पिछले 15 सालों से बाल अनाथालय को चंदे के पैसों से चला रहा हूं। आज तक आयोग और बाल एवं कल्याणा विभाग ने अनाथालय में आकर बच्चों का हाल-चाल नहीं जाना। आयोग और बाल एवं कल्याण विभाग को उन्हें भी मीटिंग में बुलाना चाहिए था। लेकिन, उन्हें नहीं बुलाया गया। उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि सरकार बाल अनाथालय को अपने अंतर्गत लेना चाहती है, तो वह इससे खुश हैं।
अमरजीत नरवाल,बाल अनाथालय संचालक, शोंदापुर।
आयोग ने बाल अनाथालय के भवन के इंतजाम के लिए एक माह का समय दिया है। बाल एवं कल्याण विभाग भवन निर्माण के लिए जल्द उपायुक्त से बातचीत करेगा। बाल अनाथालय के बच्चों को जल्द सरकारी अनाथालय के भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। आयोग की टीम ने बच्चों की समस्याओं को देखते हुए आदेश दिए हैं। मैंने तीन बच्चियों के लापता होने की रिपोर्ट भी आयोग को सौंप दी है।
सुमन सूध, चेयरपर्सन, बाल एवं कल्याण विभाग पानीपत
बच्चों की सुविधा के लिए जल्द सरकारी भवन का निर्माण होगा। एक माह में बच्चों को सरकारी भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। अनाथालय में मौजूद दूसरे जिलों के बच्चों को सोमवार से संबधित जिलों में भेजने के लिए आदेश दिए हैं। शोंदापुर स्थित अनाथालय को नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा है। बाल अनाथालय में कोई सुविधा नहीं है। आयोग को अनाथालय के संचालक पर भी भरोसा नहीं है।
बीके गोयल, सदस्य एचएससीपीसीआर।
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आयोग ने स्पष्ट कहा कि उनको बाल अनाथालय संचालक पर जरा विश्वास नहीं। हालांकि, एसडीएम की जांच पर संतोष व्यक्त किया। आयोग की टीम ने सरकारी विश्राम में पहुंचे परिवहन एवं आवास मंत्री कृष्ण लाल पंवार से मुलाकात कर अनाथ बच्चों के लिए भवन बनवाने की गुहार लगाई। मंत्री ने आयोग को जल्द सरकारी भवन निर्माण का आश्वासन दिया है।
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शोंदापुर स्थित बाल अनाथालय से तीन बच्चियों के लापता होने के एक माह बाद एचएससीपीसीआर की टीम शनिवार को सरकारी विश्राम गृह पहुंची। टीम ने बाल एवं कल्याण विभाग की चेयरपर्सन सुमन सूध से तीनों बच्चियों के लापता होने के मामले में जांच रिपोर्ट ली। जांच के बाद टीम ने बाल एवं कल्याण विभाग को अनाथ बच्चों का इंतजाम सरकारी भवन में करने के आदेश दिए। विभाग को 30 दिन में अनाथालय के लिए भवन तैयार करवाकर आयोग को रिपोर्ट देनी है। टीम ने सोमवार से ही शोंदापुर स्थित बाल अनाथालय से दूसरे जिले के बच्चों को उनके होम जिले में स्थानांतरित करने के आदेश दिए।
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अनाथालय में नहीं कोई सुविधा
मीटिंग में आयोग के सदस्यों ने बाल अनाथालय के संचालक अमरजीत नरवाल की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की। टीम के सदस्य बीके गोयल ने कहा कि बाल अनाथालय में कोई सुविधा नहीं है। वहां बच्चों की स्थिति बेहद दयनीय है। संचालक बच्चों की देख रेख भी सही प्रकार से करते। बच्चों को सरकारी भवन में शिफ्ट करना बेहद जरूरी है। आयोग की टीम में बीके गोयल, परमजीत सिंह, रमनदीप और सुनीता लोहचक मौजूद रही।
यह है मामला
शोंदापुर गांव स्थित बाल अनाथालय से 29 जून को काजल रानी, अंजिल और काजल नाम की तीन बच्चियां लापता हो गई थीं। बाल अनाथालय के संचालक के अनुसार तीनों बच्चियां रात को भागी थीं। पुलिस मामले में किसी प्रकार का कोई सुराग नहीं जुटा सकी। उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे ने मामले की जांच एसडीएम विवेक चौधरी को सौंप थी। बच्चियों के लापता होने के बाद से ही आयोग मामले पर नजर रखे हुए है। आयोग ने प्रशासन से मामले की जांच को लेकर जवाब तलब किया है।
बाल अनाथालय के संचालक पर नहीं भरोसा
रेस्ट हाउस में पहुंची आयोग की टीम ने कहा कि तीन बच्चियों को बाल अनाथालय से लापता हुए एक माह बीत चुका है। अब तक उनका सुराग नहीं लगा है। हालात बदतर होने के कारण ही बच्चे अनाथालय से भागने का मन बनाते है। इससे पहले भी आयोग को अमरजीत नरवाल की शिकायत मिल चुकी है।
नियमों और कानून को रखा ताक पर
एचएससीपीसीआर की टीम के सदस्य बीके गोयल ने कहा कि वह कई बार शोंदापुर स्थित बाल अनाथालय का निरीक्षण कर चुके हैं। अनाथालय में नियम- कानून को ताक पर रख दिया गया है। अनाथालय में लगे सीसीटीवी कैमरे अधिकतर खराब रहते है। लड़कियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। बच्चों की रहने की व्यवस्था तक दुरुस्त नहीं है।
मदर टेरेसा होम का भी किया निरीक्षण
एचएससीपीसीआर की टीम रेस्ट हाउस में मीटिंग के बाद सेक्टर 11-12 मदर टेरेसा होम पहुंची। टीम ने वहां बच्चों के सोने, खाने, नहाने के स्थानों को देखा। टीम ने बच्चों से भी बात की। आयोग की टीम होम की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आई।
बाल एवं कल्याण विभाग की जांच से सतुंष्ट आयोग
बाल एवं कल्याण विभाग की चेयरपर्सन सुमन सूध ने तीनों बच्चियों के लापता होने के मामले की रिपोर्ट आयोग के सदस्यों के सामने पेश की। उन्होंने बच्चियों के फरार होने के कारण भी बताए। बाल एवं कल्याण विभाग की जांच रिपोर्ट से आयोग की टीम संतुष्ट नजर आई।
सर मुझ पर भी इल्जाम लगाता है अनाथालय संचालक
आयोग की टीम के साथ मीटिंग में बाल एवं कल्याणा विभाग की चेयरपर्सन सुमन सूध ने अपनी परेशानियां भी साझा की। उन्होंने कहा कि वह भी अनाथालय संचालक की कार्यप्रणाली से खुश नहीं है। बच्चों के साथ वहां दुर्व्यवहार हो रहा है। बच्चों के रहने के लिए उचित स्थान तक नहीं है। बाल अनाथालय की बच्चियां कई बार उनसे भी अनाथालय के संचालक अमरजीत नरवाल की शिकायत कर चुकी हैं। उन्होंने मामले में एक्शन लिया तो उन पर ही पैसे मांगने का गंभीर आरोप लगा दिया।
मैं पिछले 15 सालों से बाल अनाथालय को चंदे के पैसों से चला रहा हूं। आज तक आयोग और बाल एवं कल्याणा विभाग ने अनाथालय में आकर बच्चों का हाल-चाल नहीं जाना। आयोग और बाल एवं कल्याण विभाग को उन्हें भी मीटिंग में बुलाना चाहिए था। लेकिन, उन्हें नहीं बुलाया गया। उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि सरकार बाल अनाथालय को अपने अंतर्गत लेना चाहती है, तो वह इससे खुश हैं।
अमरजीत नरवाल,बाल अनाथालय संचालक, शोंदापुर।
आयोग ने बाल अनाथालय के भवन के इंतजाम के लिए एक माह का समय दिया है। बाल एवं कल्याण विभाग भवन निर्माण के लिए जल्द उपायुक्त से बातचीत करेगा। बाल अनाथालय के बच्चों को जल्द सरकारी अनाथालय के भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। आयोग की टीम ने बच्चों की समस्याओं को देखते हुए आदेश दिए हैं। मैंने तीन बच्चियों के लापता होने की रिपोर्ट भी आयोग को सौंप दी है।
सुमन सूध, चेयरपर्सन, बाल एवं कल्याण विभाग पानीपत
बच्चों की सुविधा के लिए जल्द सरकारी भवन का निर्माण होगा। एक माह में बच्चों को सरकारी भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। अनाथालय में मौजूद दूसरे जिलों के बच्चों को सोमवार से संबधित जिलों में भेजने के लिए आदेश दिए हैं। शोंदापुर स्थित अनाथालय को नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा है। बाल अनाथालय में कोई सुविधा नहीं है। आयोग को अनाथालय के संचालक पर भी भरोसा नहीं है।
बीके गोयल, सदस्य एचएससीपीसीआर।