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हर रोज औसतन 13 मरीजों को किया जाता है रेफर
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पानीपत। डॉक्टरों की कमी समेत अन्य समस्याओं के चलते 42 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुआ दो सौ बेड का सिविल अस्पताल खुद बीमार पड़ा है। फिजिशियन, न्यूरोलॉजिस्ट समेत कई डॉक्टर न होने से यह अस्पताल महज रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। इस अस्पताल में सड़क हादसों में घायल मरीजों को महज प्राथमिक उपचार ही मिल रहा है। हादसों में घायल होकर आने वाले 95 प्रतिशत मरीजों को खानपुर, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज और पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया जाता है।
इस अस्पताल में पिछले कई माह से रात को सिजेरियन डिलीवरी नहीं हो रही है। महिला डॉक्टर ऑनकॉल ड्यूटी नहीं आती। ऐसे में यहां से गर्भवती महिलाओं को रात को रेफर कर दिया जाता है। पिछले ढाई साल से हर रोज औसतन 13 मरीजों को यहां से रेफर किया जा रहा है। पिछले ढाई साल में अब तक 11700 मरीज सिविल अस्पताल से रेफर हो चुके हैं। सिविल सर्जन पिछले दिनों डॉक्टरों को ऑनकॉल ड्यूटी पर आकर मरीजों के इलाज के निर्देश भी दे चुके हैं।
इसलिए रेफरल सेंटर बना है सिविल अस्पताल
1. पांच साल से नहीं है फिजिशयन
सिविल अस्पताल में पिछले पांच साल से फिजिशयन नहीं है। अस्पताल में हर रोज पांच से छह मरीज छाती रोग से संबंधित आते हैं। यहां से इन मरीजों को रेफर करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन की ओर से फिजिशयन की तीन बार मांग भेजी जा चुकी है।
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2. अस्पताल में नहीं है न्यूरोलॉजिस्ट
सिविल अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है। जो भी व्यक्ति सड़क हादसों में घायल होकर आता है उन्हें न्यूरोलॉजिस्ट की कमी के कारण रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है।
3. घोषणा के बाद भी नहीं बना ट्रामा सेंटर
मंत्री अनिल विज ने 2017 में सभी जिला अस्पतालों में ट्रामा सेंटर बनाने की घोषणा की थी। ये महज घोषणा बनकर ही रह गई। ट्रामा सेंटर के अभाव में भी यहां से मरीज रेफर होते हैं।
4. ऑनकॉल ड्यूटी पर नहीं आते डॉक्टर
दोपहर दो बजे के बाद सिविल अस्पताल में ओपीडी बंद हो जाती है। डॉक्टर अपने घर चलते जाते हैं। अगर कोई सड़क हादसे में घायल या अन्य रोगी अस्पताल में आता है कि ऑनलाइन ड्यूूटी पर तैनात डॉक्टरों को नहीं बुलाया जाता। इमरजेंसी के डॉक्टर ही मरीज का रेफर का पर्चा बना देते हैं।
5. अस्पताल में 11 बजे के बाद नहीं होते एक्स रे
सिविल अस्पताल में 11 बजे एक्स रे की सेवाएं बंद कर दी जाती है। 11 बजे के बाद कोई घायल आता है तो डॉक्टर उसकी पर्ची पर एक्स रे लिखता है। ऐसे में मरीजों को यहां से खानपुर या रोहतक रेफर कर दिया जाता है।
6. जरूरत 80 की पर तैनात है सिर्फ 30 डॉक्टर
दो सौ बेड के इस अस्पताल में सिर्फ 30 डॉक्टरों से चल रहा काम, जबकि 80 की जरूरत है। सिविल अस्पताल में 100 बेड के हिसाब से भी डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी स्टाफ नहीं है। 200 बेड के अस्पताल में 300 स्टाफ नर्स और 500 से ज्यादा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने चाहिए।
डॉक्टरों के पांच पद खाली, आठ डॉक्टर लंबे समय से अवकाश पर
वर्तमान में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं। इनमें पांच पद खाली हैं तो आठ डॉक्टर लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे हैं, दो डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, दो डॉक्टर कोर्स पर गए हैं। अस्पताल में 90 स्थायी और 30 एनएचएम की नर्स होनी चाहिए। वर्तमान में मात्र 38 स्थायी स्टाफ नर्स हैं। 26 नर्स एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं।
कोट......
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। कुछ स्पेशलिस्ट नहीं है। इसलिए भी मरीजों को रेफर करना पड़ता है लेकिन जो डॉक्टर हैं और वो ऑनकॉल ड्यूटी पर नहीं आते। इस संबंध में समीक्षा करेंगे।
डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन
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इस अस्पताल में पिछले कई माह से रात को सिजेरियन डिलीवरी नहीं हो रही है। महिला डॉक्टर ऑनकॉल ड्यूटी नहीं आती। ऐसे में यहां से गर्भवती महिलाओं को रात को रेफर कर दिया जाता है। पिछले ढाई साल से हर रोज औसतन 13 मरीजों को यहां से रेफर किया जा रहा है। पिछले ढाई साल में अब तक 11700 मरीज सिविल अस्पताल से रेफर हो चुके हैं। सिविल सर्जन पिछले दिनों डॉक्टरों को ऑनकॉल ड्यूटी पर आकर मरीजों के इलाज के निर्देश भी दे चुके हैं।
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इसलिए रेफरल सेंटर बना है सिविल अस्पताल
1. पांच साल से नहीं है फिजिशयन
सिविल अस्पताल में पिछले पांच साल से फिजिशयन नहीं है। अस्पताल में हर रोज पांच से छह मरीज छाती रोग से संबंधित आते हैं। यहां से इन मरीजों को रेफर करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन की ओर से फिजिशयन की तीन बार मांग भेजी जा चुकी है।
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2. अस्पताल में नहीं है न्यूरोलॉजिस्ट
सिविल अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है। जो भी व्यक्ति सड़क हादसों में घायल होकर आता है उन्हें न्यूरोलॉजिस्ट की कमी के कारण रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है।
3. घोषणा के बाद भी नहीं बना ट्रामा सेंटर
मंत्री अनिल विज ने 2017 में सभी जिला अस्पतालों में ट्रामा सेंटर बनाने की घोषणा की थी। ये महज घोषणा बनकर ही रह गई। ट्रामा सेंटर के अभाव में भी यहां से मरीज रेफर होते हैं।
4. ऑनकॉल ड्यूटी पर नहीं आते डॉक्टर
दोपहर दो बजे के बाद सिविल अस्पताल में ओपीडी बंद हो जाती है। डॉक्टर अपने घर चलते जाते हैं। अगर कोई सड़क हादसे में घायल या अन्य रोगी अस्पताल में आता है कि ऑनलाइन ड्यूूटी पर तैनात डॉक्टरों को नहीं बुलाया जाता। इमरजेंसी के डॉक्टर ही मरीज का रेफर का पर्चा बना देते हैं।
5. अस्पताल में 11 बजे के बाद नहीं होते एक्स रे
सिविल अस्पताल में 11 बजे एक्स रे की सेवाएं बंद कर दी जाती है। 11 बजे के बाद कोई घायल आता है तो डॉक्टर उसकी पर्ची पर एक्स रे लिखता है। ऐसे में मरीजों को यहां से खानपुर या रोहतक रेफर कर दिया जाता है।
6. जरूरत 80 की पर तैनात है सिर्फ 30 डॉक्टर
दो सौ बेड के इस अस्पताल में सिर्फ 30 डॉक्टरों से चल रहा काम, जबकि 80 की जरूरत है। सिविल अस्पताल में 100 बेड के हिसाब से भी डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी स्टाफ नहीं है। 200 बेड के अस्पताल में 300 स्टाफ नर्स और 500 से ज्यादा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने चाहिए।
डॉक्टरों के पांच पद खाली, आठ डॉक्टर लंबे समय से अवकाश पर
वर्तमान में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं। इनमें पांच पद खाली हैं तो आठ डॉक्टर लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे हैं, दो डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, दो डॉक्टर कोर्स पर गए हैं। अस्पताल में 90 स्थायी और 30 एनएचएम की नर्स होनी चाहिए। वर्तमान में मात्र 38 स्थायी स्टाफ नर्स हैं। 26 नर्स एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं।
कोट......
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। कुछ स्पेशलिस्ट नहीं है। इसलिए भी मरीजों को रेफर करना पड़ता है लेकिन जो डॉक्टर हैं और वो ऑनकॉल ड्यूटी पर नहीं आते। इस संबंध में समीक्षा करेंगे।
डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन