{"_id":"66ad8638f8588e81450c6dc7","slug":"now-the-locks-hanging-on-the-citys-public-toilets-will-open-panipat-news-c-244-1-pnp1004-122079-2024-08-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: अब खुलेंगे शहर के सार्वजनिक शौचालयों पर लटके ताले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: अब खुलेंगे शहर के सार्वजनिक शौचालयों पर लटके ताले
विज्ञापन
पानीपत। शहर के सार्वजनिक शौचालयों पर लटके ताले अब खुलने जा रहे हैं। इनकी साफ सफाई भी होगी और मरम्मत एवं रखरखाव भी होगा। शौचालयों पर लटके तालों से बढ़ती लोगों की परेशानी और स्वच्छ सर्वेक्षण टीम आने को लेकर निगम ने इनकी सफाई की तैयारी शुरू कर दी है। जिसमें निगम इन शौचालयों की सफाई और रखरखाव के लिए एक साल का टेंडर लगाने जा रहा है।
गौरतलब है कि 30 अप्रैल को शौचालयों की सफाई का ठेका पूरा होने के बाद निगम ने इनकी सफाई का नया ठेका नहीं दिया है। शौचालयों को टूट फूट से बचाने के लिए इन पर ताले लगा दिए गए थे। इससे पहले निगम इनकी सफाई पर करीब एक करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रहा था।
शहर में 31 जगहों पर ये सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय बने हैं। जिनकी संख्या 46 के करीब है। इनके अलावा निगम के पास मोबाइल टॉयलेट अलग से हैं। ताले लटके होने से विशेष तौर पर शहर के मुख्य रास्तों और बाजारों में आने वाले ग्राहक व दुकानदार परेशान हैं। इसके अलावा शहर से सेक्टरों व चौक चौराहों पर रहने वाले घुमंतू परिवार व झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोग ज्यादा परेशान हैं। ये लोग सुबह व शाम को खुले में ही शौच के लिए जाने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
शहर के सार्वजनिक शौचालय और मोबाइल टायलेट की सफाई का ठेका सितंबर-2019 में सुलभ इंटरनेशनल कंपनी के पास था। सुलभ इसके बदले निगम से सात लाख रुपये वसूलती थी। कंपनी ने घाटे का हवाला देकर सभी शौचालय सरेंडर कर दिए। इसके बाद अक्टूबर-2019 में पांच लाख रुपये प्रतिमाह के हिसाब से ठेकेदार ने इनकी जिम्मेदारी ली। उसने भी एक माह में ही काम छोड़ दिया। इस बीच करीब दस माह इन शौचालयों पर ताले लटके रहे थे। वहीं, पिछले साल की बात करें तो इन बदहाल शौचालयों की निगम ने करीब 20 लाख रुपये से रिपेयर कराई। 96 लाख रुपये से इनकी सफाई का टेंडर दिया। इसका काम भी अप्रैल तक रहा। तब से इनकी न तो सफाई हो सकी है और न इन पर लटके ताले खुल पाए हैं।
वर्जन:
शहर के सार्वजनिक शौचालयों की सफाई की तैयारी की जा रही है। इसके लिए टेंडर लगाया गया है। प्रयास है कि विधानसभा चुनाव से पहले इनकी सफाई का काम सौंप दिया जाएगा। जिससे शहर के लोगों को राहत मिलेगी।
राहुल पूनिया, एक्सईएन, नगर निगम।
विज्ञापन
गौरतलब है कि 30 अप्रैल को शौचालयों की सफाई का ठेका पूरा होने के बाद निगम ने इनकी सफाई का नया ठेका नहीं दिया है। शौचालयों को टूट फूट से बचाने के लिए इन पर ताले लगा दिए गए थे। इससे पहले निगम इनकी सफाई पर करीब एक करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रहा था।
विज्ञापन
शहर में 31 जगहों पर ये सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय बने हैं। जिनकी संख्या 46 के करीब है। इनके अलावा निगम के पास मोबाइल टॉयलेट अलग से हैं। ताले लटके होने से विशेष तौर पर शहर के मुख्य रास्तों और बाजारों में आने वाले ग्राहक व दुकानदार परेशान हैं। इसके अलावा शहर से सेक्टरों व चौक चौराहों पर रहने वाले घुमंतू परिवार व झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोग ज्यादा परेशान हैं। ये लोग सुबह व शाम को खुले में ही शौच के लिए जाने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
शहर के सार्वजनिक शौचालय और मोबाइल टायलेट की सफाई का ठेका सितंबर-2019 में सुलभ इंटरनेशनल कंपनी के पास था। सुलभ इसके बदले निगम से सात लाख रुपये वसूलती थी। कंपनी ने घाटे का हवाला देकर सभी शौचालय सरेंडर कर दिए। इसके बाद अक्टूबर-2019 में पांच लाख रुपये प्रतिमाह के हिसाब से ठेकेदार ने इनकी जिम्मेदारी ली। उसने भी एक माह में ही काम छोड़ दिया। इस बीच करीब दस माह इन शौचालयों पर ताले लटके रहे थे। वहीं, पिछले साल की बात करें तो इन बदहाल शौचालयों की निगम ने करीब 20 लाख रुपये से रिपेयर कराई। 96 लाख रुपये से इनकी सफाई का टेंडर दिया। इसका काम भी अप्रैल तक रहा। तब से इनकी न तो सफाई हो सकी है और न इन पर लटके ताले खुल पाए हैं।
वर्जन:
शहर के सार्वजनिक शौचालयों की सफाई की तैयारी की जा रही है। इसके लिए टेंडर लगाया गया है। प्रयास है कि विधानसभा चुनाव से पहले इनकी सफाई का काम सौंप दिया जाएगा। जिससे शहर के लोगों को राहत मिलेगी।
राहुल पूनिया, एक्सईएन, नगर निगम।