{"_id":"619809ffa4c8824ea621de70","slug":"no-spraying-for-two-days-aqi-reached-350-panipat-news-knl90156486","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो दिन से नहीं हुआ छिड़काव, एक्यूआई पहुंचा 350","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो दिन से नहीं हुआ छिड़काव, एक्यूआई पहुंचा 350
विज्ञापन
पानीपत। दो दिन से पानी का छिड़काव न होने से शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्श फिर बढ़ने लगा है। इस माह में 14 दिन शहर का एक्यूआई रेड जॉन में रहा है, जबकि तीन दिन एक्यूआई डार्क रेड जोन में रहा है। शुक्रवार को भी शहर का एक्यूआई रेड जोन में रहा। शुक्रार को एक्यूआई 10 अंक बढ़कर 350 तक पहुंच गया, जबकि बुधवार को एक्यूआई 146 दर्ज किया गया था।
प्रशासन ने वीरवार व शुक्रवार को ग्रैप के नियमों के तहत काम नहीं किया है। सड़कों व पेड़ पौधों पर जल का छिड़काव नहीं किया गया है। उधर, खेतों में पराली जलाई जा रही है। फैक्टरियों से काला धुआं निकलते दिखाई दे रहा है। इस कारण इन दो दिन में एक्यूआई दोबारा रेड जोन में आ गया है। अब एनजीटी पानीपत के बढ़ते प्रदूषण स्तर को लेकर कड़े कदम उठा सकता है।
चार दिन पहले एनजीटी ने गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर व सोनीपत में कोयले से चलने वाली इंडस्ट्री पर बैन लगा दिया था। पानीपत में भी उद्योगपतियों में इसको लेकर हड़कंप मच गया था। उस दिन उद्यमियों ने खुद अपने फैक्टरियों के सामने पानी का छिड़काव किया। सेक्टर 29 व सेक्टर 25 में पेड़ पौधों पर जल का छिड़काव किया गया। उद्यमियों में ये जागरूकता सिर्फ एक ही दिन रही, इसके बाद यहां छिड़काव नहीं हुआ। अब उद्योगों से काला धुआं निकलते देखा जाना आम हो गया है।
विज्ञापन
थर्मल को बंद किया जा सकता है
पानीपत के थर्मल पावर प्लांट को बंद किया जा सकता है। पानीपत के थर्मल पावर प्लांट में दो यूनिट चल रही हैं, जिनमें पांच सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। बिजली के उत्पादन के लिए कोयले का इस्तेमाल होता है। प्रदेश सरकार इसे बंद करने का फैसला ले सकती है।
डाई हाउस नहीं मान रहे नियम
सेक्टर 29, पार्ट-2 स्थित कुछ डाई हाउस नियम नहीं मान रहे। चिमनियों से काला धुआं निकल रहा है। कुछ जगहों पर तो रबर, कबाड़ आदि जलाई जा रही है। ये भी एक्यूआई बढ़ने का बड़ा कारण है।
स्मॉग से बिगड़ सकता है स्वास्थ्य
बढ़ता प्रदूषण का स्तर काफी परेशान कर रहा है। सांस के रोगियों को काफी परेशानी हो रही है। फेफड़ों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। ये स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। बच्चों को सुबह शाम से घर से बाहर निकालने से बचें। सुबह व शाम को घर पर व्यायाम करें, बाहर निकलते वक्त मास्क का प्रयोग करें।
डॉ. रितू, डॉक्टर सिविल अस्पताल
किसी भी विभाग ने नहीं निभाई जिम्मेदारी
नगर निगम को शहर के अंदर सड़कों के किनारे, पीडब्ल्यूडी को स्टेट हाईवे के किनारे व एएनएचआई को जीटी रोड पर सड़कों के किनारे पानी के छिड़काव का काम सौंपा गया था, लेकिन किसी भी विभाग ने जिम्मेदारी को ईमानदारी से नहीं निभाया। नियमित तौर पर सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं हुआ। हवा में धूल के कणों के कारण ही शहर का एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है।
यहां जारी की थी पाबंदी
ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, शिक्षण संस्थान, मॉल आदि में जेनरेटर सेट पर पाबंदी के निर्देश दिए गए थे। ईपीसीए ने पहले ही साफ कर दिया था कि हाउसिंग सोसायटी में सिर्फ लिफ्ट के इस्तेमाल में छूट रहेगी। इन निर्देशों का भी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
प्रदूषण स्तर का कम करने के भरसक प्रयास कर रहे हैं- आरओ
प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। एनजीटी के निर्देशों पर प्रदूषण के कारकों पर कार्रवाई भी की जा रही है। ग्रैप के नियमों का पालन हो रहा है।
कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
विज्ञापन
प्रशासन ने वीरवार व शुक्रवार को ग्रैप के नियमों के तहत काम नहीं किया है। सड़कों व पेड़ पौधों पर जल का छिड़काव नहीं किया गया है। उधर, खेतों में पराली जलाई जा रही है। फैक्टरियों से काला धुआं निकलते दिखाई दे रहा है। इस कारण इन दो दिन में एक्यूआई दोबारा रेड जोन में आ गया है। अब एनजीटी पानीपत के बढ़ते प्रदूषण स्तर को लेकर कड़े कदम उठा सकता है।
विज्ञापन
चार दिन पहले एनजीटी ने गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर व सोनीपत में कोयले से चलने वाली इंडस्ट्री पर बैन लगा दिया था। पानीपत में भी उद्योगपतियों में इसको लेकर हड़कंप मच गया था। उस दिन उद्यमियों ने खुद अपने फैक्टरियों के सामने पानी का छिड़काव किया। सेक्टर 29 व सेक्टर 25 में पेड़ पौधों पर जल का छिड़काव किया गया। उद्यमियों में ये जागरूकता सिर्फ एक ही दिन रही, इसके बाद यहां छिड़काव नहीं हुआ। अब उद्योगों से काला धुआं निकलते देखा जाना आम हो गया है।
विज्ञापन
थर्मल को बंद किया जा सकता है
पानीपत के थर्मल पावर प्लांट को बंद किया जा सकता है। पानीपत के थर्मल पावर प्लांट में दो यूनिट चल रही हैं, जिनमें पांच सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। बिजली के उत्पादन के लिए कोयले का इस्तेमाल होता है। प्रदेश सरकार इसे बंद करने का फैसला ले सकती है।
डाई हाउस नहीं मान रहे नियम
सेक्टर 29, पार्ट-2 स्थित कुछ डाई हाउस नियम नहीं मान रहे। चिमनियों से काला धुआं निकल रहा है। कुछ जगहों पर तो रबर, कबाड़ आदि जलाई जा रही है। ये भी एक्यूआई बढ़ने का बड़ा कारण है।
स्मॉग से बिगड़ सकता है स्वास्थ्य
बढ़ता प्रदूषण का स्तर काफी परेशान कर रहा है। सांस के रोगियों को काफी परेशानी हो रही है। फेफड़ों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। ये स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। बच्चों को सुबह शाम से घर से बाहर निकालने से बचें। सुबह व शाम को घर पर व्यायाम करें, बाहर निकलते वक्त मास्क का प्रयोग करें।
डॉ. रितू, डॉक्टर सिविल अस्पताल
किसी भी विभाग ने नहीं निभाई जिम्मेदारी
नगर निगम को शहर के अंदर सड़कों के किनारे, पीडब्ल्यूडी को स्टेट हाईवे के किनारे व एएनएचआई को जीटी रोड पर सड़कों के किनारे पानी के छिड़काव का काम सौंपा गया था, लेकिन किसी भी विभाग ने जिम्मेदारी को ईमानदारी से नहीं निभाया। नियमित तौर पर सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं हुआ। हवा में धूल के कणों के कारण ही शहर का एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है।
यहां जारी की थी पाबंदी
ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, शिक्षण संस्थान, मॉल आदि में जेनरेटर सेट पर पाबंदी के निर्देश दिए गए थे। ईपीसीए ने पहले ही साफ कर दिया था कि हाउसिंग सोसायटी में सिर्फ लिफ्ट के इस्तेमाल में छूट रहेगी। इन निर्देशों का भी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
प्रदूषण स्तर का कम करने के भरसक प्रयास कर रहे हैं- आरओ
प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। एनजीटी के निर्देशों पर प्रदूषण के कारकों पर कार्रवाई भी की जा रही है। ग्रैप के नियमों का पालन हो रहा है।
कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड