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निगमकर्मी हड़ताल पर, बिजली संकट भी गहराया
अमर उजाला, पानीपत
Updated Tue, 21 Jan 2014 11:56 PM IST
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हरियाणा रोडवेज के बाद हरियाणा कर्मचारी तालमेल कमेटी हड़ताल शुरू होने पर
लगातार दूसरे दिन जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। बिजलीकर्मियों के हड़ताल पर
जाने से सर्कल के छह पॉवर हाउस और 30 फीडर ब्रैक डाउन हो गए।
इससे गांवों के साथ-साथ शहर के कई हिस्सों में ब्लैकआउट हो गया। रोडवेज की हड़ताल वापस लेने पर बस तो सड़क पर चलीं, लेकिन बिजली और नगर निगम की हड़ताल से परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि निगम अधिकारियों ने आपूर्ति सुचारु करने का प्रयास किया। लेकिन वे लोगों को पर्याप्त सुविधा नहीं दे सके।
हरियाणा कर्मचारी तालमेट कमेटी के आह्वान पर बिजली और निगम के कर्मचारी मंगलवार को तीन दिन की हड़ताल पर चले गए। यूनियन नेताओं ने सुबह ही सर्कल कार्यालय के गेट पर ताला जड़ दिया और सरकार विरोधी नारेबाजी की।
कमेटी के सदस्य महावीर सहरावत और यूनियन के जिला प्रधान तेजपाल सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की जायज मांगाें को पूरा नहीं कर रही है। सरकार थ्री पी की नीति लागू कर विभागों को लगातार तोड़ रही है।
ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में किसी भी विभाग का अस्तित्व नहीं बचेगा। पैक्स लिपिक, एमपीएचडब्ल्यू और आरसीएच लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। यूनियन की मांग है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान वेतन दिया जाए, निगम मेें फ्रैंचाइजी, भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए, कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
सरकार ऐसा नहीं करती है तो यूनियन लगातार संघर्ष जारी रखेगी। इस मौके पर यशपाल, तेजबीर मान, महेंद्र सिंह, अरविंद यादव, धर्मबीर, राजपाल, शमशेर, महाबीर शर्मा, जितेंद्र सैनी, मोती राम शर्मा, कर्मसिंह, सतबीर खंडरा, राजिंद्र, अविनाश कालड़ा, राजसिंह कटारिया, दयानंद, परमजीत कौर केदार सिंह और रामफल मौजूद रहे।
हड़ताल के चलते कार्यालय में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा।
निगम के सभी कर्मचारियों ने हड़ताल को पूरा समर्थन दिया। कार्यालयों में रखी कुर्सियां दिनभर आने वालाें का इंतजार करती रही। हड़ताल से अनभिज्ञ इक्का-दुक्का ही उपभोक्ता कार्यालय में पहुंचे। उनको भी हड़ताल के चलते वापस लौटना पड़ा।
हड़ताल के पहले ही दिन निगम को करोड़ों रुपये अटक गए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि निगम के सभी बिल काउंटर बंद रहे। इससे बिल जमा नहीं हो सके। इसके अलावा दिनभर बिजली कर्मी रिकवरी में भी जुटे रहते थे वह भी नहीं हो सकी। ओवर ऑल करोड़ों का नुकसान हुआ।
हड़ताल के चलते जहां एक बार फीडर बंद हो गया वह दोबारा शुरू नहीं हो सका। इसके विपरीत निगम अधिकारी बेहतर सप्लाई का दावा करते रहे। क्षेत्र मेें 33 केवी के छह पॉवर हाउस और करीब 30 फीडरों ब्रेक डाउन हो गए।
बंद होने वाले पावर हाउस काबड़ी रोड, सिटी-टू, असंध रोड मॉडल टाउन, जाटल रोड, समालखा, इसराना, चंदौली, गोहाना रोड, श्रीराम मंदिर और शिव मंदिर के अलावा 30 अन्य फीडर ब्रेक डाउन रहे। इनमें से कुछ फीडरों को चला भी दिया। इनके अलावा 33 केवीए बाबरपुर फीडर बीती रात 10:30 बजे, अहर सुबह 5:05 और ब्राह्मण माजरा फीडर भी रात करीब 10 बजे से ही ब्रेक डाउन चल रहा है।
हड़ताल के दौरान जहां-जहां क्षेत्रोें मेें बिजली सप्लाई बंद रही, वहां पर बिजली पानी का संकट गहरा गया। बिजली अधिकारी अपनी विशेष टीम के साथ बंद होने वाले फीडरों को चलाने के लिए दिनभर दौड़ते रहे। बिजली नहीं आने से पानी की सप्लाई भी नहीं आ पाई। इससे जनजीवन अस्त व्यस्त रहा।
हड़ताल से कहीं पर भी बिजली सप्लाई बाधित नहीं होने दी गई है। उप-मंडल अधिकारी अपनी विशेष टीम के साथ फीडरों का दौरा करने में जुटे हैं। लाइन फाल्ट या फीडर बंद होने पर तुरंत मौके पर जाकर ठीक किए जा रहे हैं।
एमएस दहिया, एसई, बिजली निगम, पानीपत सर्कल
इससे गांवों के साथ-साथ शहर के कई हिस्सों में ब्लैकआउट हो गया। रोडवेज की हड़ताल वापस लेने पर बस तो सड़क पर चलीं, लेकिन बिजली और नगर निगम की हड़ताल से परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि निगम अधिकारियों ने आपूर्ति सुचारु करने का प्रयास किया। लेकिन वे लोगों को पर्याप्त सुविधा नहीं दे सके।
हरियाणा कर्मचारी तालमेट कमेटी के आह्वान पर बिजली और निगम के कर्मचारी मंगलवार को तीन दिन की हड़ताल पर चले गए। यूनियन नेताओं ने सुबह ही सर्कल कार्यालय के गेट पर ताला जड़ दिया और सरकार विरोधी नारेबाजी की।
कमेटी के सदस्य महावीर सहरावत और यूनियन के जिला प्रधान तेजपाल सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की जायज मांगाें को पूरा नहीं कर रही है। सरकार थ्री पी की नीति लागू कर विभागों को लगातार तोड़ रही है।
ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में किसी भी विभाग का अस्तित्व नहीं बचेगा। पैक्स लिपिक, एमपीएचडब्ल्यू और आरसीएच लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। यूनियन की मांग है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान वेतन दिया जाए, निगम मेें फ्रैंचाइजी, भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए, कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
सरकार ऐसा नहीं करती है तो यूनियन लगातार संघर्ष जारी रखेगी। इस मौके पर यशपाल, तेजबीर मान, महेंद्र सिंह, अरविंद यादव, धर्मबीर, राजपाल, शमशेर, महाबीर शर्मा, जितेंद्र सैनी, मोती राम शर्मा, कर्मसिंह, सतबीर खंडरा, राजिंद्र, अविनाश कालड़ा, राजसिंह कटारिया, दयानंद, परमजीत कौर केदार सिंह और रामफल मौजूद रहे।
हड़ताल के चलते कार्यालय में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा।
निगम के सभी कर्मचारियों ने हड़ताल को पूरा समर्थन दिया। कार्यालयों में रखी कुर्सियां दिनभर आने वालाें का इंतजार करती रही। हड़ताल से अनभिज्ञ इक्का-दुक्का ही उपभोक्ता कार्यालय में पहुंचे। उनको भी हड़ताल के चलते वापस लौटना पड़ा।
हड़ताल के पहले ही दिन निगम को करोड़ों रुपये अटक गए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि निगम के सभी बिल काउंटर बंद रहे। इससे बिल जमा नहीं हो सके। इसके अलावा दिनभर बिजली कर्मी रिकवरी में भी जुटे रहते थे वह भी नहीं हो सकी। ओवर ऑल करोड़ों का नुकसान हुआ।
हड़ताल के चलते जहां एक बार फीडर बंद हो गया वह दोबारा शुरू नहीं हो सका। इसके विपरीत निगम अधिकारी बेहतर सप्लाई का दावा करते रहे। क्षेत्र मेें 33 केवी के छह पॉवर हाउस और करीब 30 फीडरों ब्रेक डाउन हो गए।
बंद होने वाले पावर हाउस काबड़ी रोड, सिटी-टू, असंध रोड मॉडल टाउन, जाटल रोड, समालखा, इसराना, चंदौली, गोहाना रोड, श्रीराम मंदिर और शिव मंदिर के अलावा 30 अन्य फीडर ब्रेक डाउन रहे। इनमें से कुछ फीडरों को चला भी दिया। इनके अलावा 33 केवीए बाबरपुर फीडर बीती रात 10:30 बजे, अहर सुबह 5:05 और ब्राह्मण माजरा फीडर भी रात करीब 10 बजे से ही ब्रेक डाउन चल रहा है।
हड़ताल के दौरान जहां-जहां क्षेत्रोें मेें बिजली सप्लाई बंद रही, वहां पर बिजली पानी का संकट गहरा गया। बिजली अधिकारी अपनी विशेष टीम के साथ बंद होने वाले फीडरों को चलाने के लिए दिनभर दौड़ते रहे। बिजली नहीं आने से पानी की सप्लाई भी नहीं आ पाई। इससे जनजीवन अस्त व्यस्त रहा।
हड़ताल से कहीं पर भी बिजली सप्लाई बाधित नहीं होने दी गई है। उप-मंडल अधिकारी अपनी विशेष टीम के साथ फीडरों का दौरा करने में जुटे हैं। लाइन फाल्ट या फीडर बंद होने पर तुरंत मौके पर जाकर ठीक किए जा रहे हैं।
एमएस दहिया, एसई, बिजली निगम, पानीपत सर्कल