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एनजीटी के आदेश पर अब जिले का बनेगा जैव विविधता रजिस्टर
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जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) महज जंगलों तक ही सीमित नहीं है। यह गांवों और शहरों के साथ ही हर जगह है। जड़ी-बूटियां, पेड़-पौधे, जंगल, पशु-पक्षियों की प्रजातियों से लेकर बैक्टीरिया तक जैविक संपदा के अंतर्गत आते हैं, लेकिन व्यवसायीकरण की वजह से जैव विविधता खतरे में है। इसी के चलते अब हर जिले में लोगों का बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (पीबीआर) तैयार किया जाएगा। यह निर्णय एकाएका नहीं हुआ है, बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद यह हर जिले के लिए अनिवार्य हो गया। इस आदेश के तहत बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी (बीएमसी) बनाकर हर जिले का पीबीआर तैयार करना है और यह कार्य 31 जनवरी 2020 तक पूरा कर लिया जाना है। इसी के तहत जिला प्रशासन ने 18 दिसंबर को बीएमसी का गठन करने के लिए विभागों की बैठक बुलाई है।
- बायोडायवर्सिटी रजिस्टर में यह होगा दर्ज जैव विविधिता रजिस्टर
जिले की हर पंचायत का अपना जैव विविधता रजिस्टर बनाया जाएगा। जिसमें उस इलाके की जड़ी-बूटियां, पेड़-पौधों, प्रजातियों सहित जैव संपदा के साथ ही इनसे जुड़े स्थानीय समुदाय के परंपरागत ज्ञान और जानकारियां भी दर्ज की जाएगी। इसका लाभ यह होगा कि स्थानीय समुदाय की अनुमति के बगैर कोई कंपनी, देश या व्यक्ति जैव विविधता से जुड़ी कोई भी चीज उपयोग में नहीं ला सकेंगे।
- इन विभागों के प्रतिनिधि बीएमसी में होंगे शामिल
वन्य विभाग, बागवानी विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग, पब्लिक हेल्थ विभाग और पार्षद।
- चंद्रभाल सिंह बनान यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के केस में एनजीटी ने दिया आदेश
शिकायकर्ता चंद्रभाल सिंह ने वर्ष 2016 में एनजीटी में अपील की थी कि बायोलॉजिक डायवर्सिटी एक्ट-2002 और बॉयोलॉजिकल डायवर्सिटी रुल्स 2002 का पालन नहीं हो रहा है। एक्ट के सेक्शन 41 के तहत बॉयोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी का गठन नहीं होने और रुल 22(6) के तहत पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर को नहीं बनाया जा रहा है। इस केस की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सभी राज्य सरकारों को बीएमसी का गठन कर पीबीआर तैयार करने का आदेश दिया है।
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- वर्जन
बीएमसी का गठन करने के लिए 18 दिसंबर को बैठक बुलाई गई है। बीएमसी की गठन करने के बाद पीबीआर तैयार करने काम शुरू किया जाएगा। - रमेश बागड़ी, एसई, नगर निगम
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- बायोडायवर्सिटी रजिस्टर में यह होगा दर्ज जैव विविधिता रजिस्टर
जिले की हर पंचायत का अपना जैव विविधता रजिस्टर बनाया जाएगा। जिसमें उस इलाके की जड़ी-बूटियां, पेड़-पौधों, प्रजातियों सहित जैव संपदा के साथ ही इनसे जुड़े स्थानीय समुदाय के परंपरागत ज्ञान और जानकारियां भी दर्ज की जाएगी। इसका लाभ यह होगा कि स्थानीय समुदाय की अनुमति के बगैर कोई कंपनी, देश या व्यक्ति जैव विविधता से जुड़ी कोई भी चीज उपयोग में नहीं ला सकेंगे।
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- इन विभागों के प्रतिनिधि बीएमसी में होंगे शामिल
वन्य विभाग, बागवानी विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग, पब्लिक हेल्थ विभाग और पार्षद।
- चंद्रभाल सिंह बनान यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के केस में एनजीटी ने दिया आदेश
शिकायकर्ता चंद्रभाल सिंह ने वर्ष 2016 में एनजीटी में अपील की थी कि बायोलॉजिक डायवर्सिटी एक्ट-2002 और बॉयोलॉजिकल डायवर्सिटी रुल्स 2002 का पालन नहीं हो रहा है। एक्ट के सेक्शन 41 के तहत बॉयोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी का गठन नहीं होने और रुल 22(6) के तहत पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर को नहीं बनाया जा रहा है। इस केस की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सभी राज्य सरकारों को बीएमसी का गठन कर पीबीआर तैयार करने का आदेश दिया है।
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- वर्जन
बीएमसी का गठन करने के लिए 18 दिसंबर को बैठक बुलाई गई है। बीएमसी की गठन करने के बाद पीबीआर तैयार करने काम शुरू किया जाएगा। - रमेश बागड़ी, एसई, नगर निगम