{"_id":"65eb7feffddf96692709d194","slug":"molasses-rate-1200-profit-more-than-ethanol-panipat-news-c-244-1-pnp1004-114923-2024-03-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: शीरे का रेट 1200, मुनाफा हुआ एथनॉल से ज्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: शीरे का रेट 1200, मुनाफा हुआ एथनॉल से ज्यादा
विज्ञापन
पानीपत। कभी 600 से लेकर 800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिकने वाला शुगर मिल का शीरा अब 1200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है। वहीं, गांव डाहर स्थित नई शुगर मिल में मिल की गन्ना पेराई की क्षमता बढ़ने के साथ शीरा उत्पादन की क्षमता भी बढ़ गई है। जिससे अब सरकार और शुगर फेडरेशन ने नई मिल में शीरे से एथनॉल बनाने वाले 150 करोड़ के प्लांट पर फिलहाल के लिए ब्रेक लगा दिया है।
उल्लेखनीय है कि 150 करोड़ खर्च करने के बाद भी सरकार को एथनॉल बेचकर भी वो मुनाफा नहीं होगा जो सीधा शीरा बेचने से हो रहा है। अगर प्लांट लगा भी दिया जाता है तो 150 करोड़ खर्च करने के बाद एक लीटर एथनॉल के उत्पादन पर करीब 90 रुपये का खर्चा आएगा जबकि इसको बेचने पर केवल 50 रुपये ही मिल पाएंगे।
सरकार को इसका ताजा उदाहरण शाहबाद के शुगर मिल के प्लांट से मिला है। जहां प्रदेश का सबसे बड़ा शीरे से एथनॉल बनाने का प्लांट भी लगाकर इसकी लागत तक पूरी नहीं हो पा रही है। शाहबाद में करीब 250 करोड़ की लगात से प्लांट तैयार किया गया है। बावजूद शीरे से एथनॉल बनाने में मिल को नुकसान ही झेलना पड़ा है। जबकि खाली शीरा ज्यादा महंगे रेट पर बिक रहा है। दूसरी ओर पानीपत मिल के शीरे की अब दूसरे प्रदेशों के साथ विदेशों में भी डिमांड बढ़ रही है। अधिकारियों का मानना है कि अब सरकार इस प्लांट को नई तकनीक और संशोधन के साथ बनवाने पर मंथन कर रही है। एथनॉल बनाने में सरकार की ओर से दस प्रतिशत सब्सिडी है जबकि नुकसान ज्यादा है। ऐसा भी हो सकता है कि कई जिलों के शुगर मिल का कलस्टर प्लांट पानीपत में बनाया जाए।
विज्ञापन
बॉक्स
कुल गन्ना पेराई का पांच प्रतिशत बनता है शीरा:
शुगर मिल में जितना गन्ना पेराई होता है उसका पांच प्रतिशत शीरा उत्पादित होता है। पानीपत शुगर मिल प्लांट की क्षमता 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन की है। सीजन का लक्ष्य 60 से 70 लाख क्विंटल तक पहुंच जाता है। 60 लाख क्विंटल के हिसाब से पांच प्रतिशत शीरा करीब तीन लाख क्विंटल बनता है। जिसकी फिलहाल मार्केट वैल्यू करीब 36 करोड़ के आसपास बनती है। पिछले साल भी मिल प्रबंधन ने प्रदेश में सबसे महंगे रेट 782 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर शीरा बेचा था। इस शीरे का इस्तेमाल शराब, एथनॉल और पशुओं के आहार बनाने में किया जाता है।
बॉक्स
3.5 लाख क्विंटल की क्षमता
पानीपत शुगर मिल में शीरे की क्षमता 3.5 लाख क्विंटल की है। ऑफ सीजन में मिल बंद होने से शीरे की डिमांड बढ़ जाती है। मिल में शीरे को स्टोर करने के लिए एक अन्य 60 हजार क्विंटल के शीरे का अतिरिक्त टैंक भी तैयार करवाया जाना है। शीरे को मंहगे भाव पर बेचने के लिए अंतराराष्ट्रीय मार्केट का अध्ययन किया जाता है। पहले मिल से लोकल स्पलायर शीरे के लिए संपर्क करते थे। अब मिल का शीरा विदेशों में भी एक्सपोर्ट होता है। इसको सीधे दूसरे देशों में भी एक्सपोर्ट करने पर मंथन किया जा रहा है।
वर्जन:
शीरे का रेट ज्यादा बढ़ने की वजह से फिलहाल इस प्रोजेक्ट को होल्ड किया गया है। अब मिल को एथनॉल की बजाए सीधा शीरा बेचकर ज्यादा मुनाफा मिल रहा है। इसे देख अब प्रोजेक्ट में कुछ संशोधन किए जा सकते हैं। इसके लिए सरकार और शुगर फेडरेशन की ओर से जारी निर्देशों का पालन किया जाएगा।
जगदीप सिंह, एमडी, शुगर मिल।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि 150 करोड़ खर्च करने के बाद भी सरकार को एथनॉल बेचकर भी वो मुनाफा नहीं होगा जो सीधा शीरा बेचने से हो रहा है। अगर प्लांट लगा भी दिया जाता है तो 150 करोड़ खर्च करने के बाद एक लीटर एथनॉल के उत्पादन पर करीब 90 रुपये का खर्चा आएगा जबकि इसको बेचने पर केवल 50 रुपये ही मिल पाएंगे।
विज्ञापन
सरकार को इसका ताजा उदाहरण शाहबाद के शुगर मिल के प्लांट से मिला है। जहां प्रदेश का सबसे बड़ा शीरे से एथनॉल बनाने का प्लांट भी लगाकर इसकी लागत तक पूरी नहीं हो पा रही है। शाहबाद में करीब 250 करोड़ की लगात से प्लांट तैयार किया गया है। बावजूद शीरे से एथनॉल बनाने में मिल को नुकसान ही झेलना पड़ा है। जबकि खाली शीरा ज्यादा महंगे रेट पर बिक रहा है। दूसरी ओर पानीपत मिल के शीरे की अब दूसरे प्रदेशों के साथ विदेशों में भी डिमांड बढ़ रही है। अधिकारियों का मानना है कि अब सरकार इस प्लांट को नई तकनीक और संशोधन के साथ बनवाने पर मंथन कर रही है। एथनॉल बनाने में सरकार की ओर से दस प्रतिशत सब्सिडी है जबकि नुकसान ज्यादा है। ऐसा भी हो सकता है कि कई जिलों के शुगर मिल का कलस्टर प्लांट पानीपत में बनाया जाए।
विज्ञापन
बॉक्स
कुल गन्ना पेराई का पांच प्रतिशत बनता है शीरा:
शुगर मिल में जितना गन्ना पेराई होता है उसका पांच प्रतिशत शीरा उत्पादित होता है। पानीपत शुगर मिल प्लांट की क्षमता 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन की है। सीजन का लक्ष्य 60 से 70 लाख क्विंटल तक पहुंच जाता है। 60 लाख क्विंटल के हिसाब से पांच प्रतिशत शीरा करीब तीन लाख क्विंटल बनता है। जिसकी फिलहाल मार्केट वैल्यू करीब 36 करोड़ के आसपास बनती है। पिछले साल भी मिल प्रबंधन ने प्रदेश में सबसे महंगे रेट 782 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर शीरा बेचा था। इस शीरे का इस्तेमाल शराब, एथनॉल और पशुओं के आहार बनाने में किया जाता है।
बॉक्स
3.5 लाख क्विंटल की क्षमता
पानीपत शुगर मिल में शीरे की क्षमता 3.5 लाख क्विंटल की है। ऑफ सीजन में मिल बंद होने से शीरे की डिमांड बढ़ जाती है। मिल में शीरे को स्टोर करने के लिए एक अन्य 60 हजार क्विंटल के शीरे का अतिरिक्त टैंक भी तैयार करवाया जाना है। शीरे को मंहगे भाव पर बेचने के लिए अंतराराष्ट्रीय मार्केट का अध्ययन किया जाता है। पहले मिल से लोकल स्पलायर शीरे के लिए संपर्क करते थे। अब मिल का शीरा विदेशों में भी एक्सपोर्ट होता है। इसको सीधे दूसरे देशों में भी एक्सपोर्ट करने पर मंथन किया जा रहा है।
वर्जन:
शीरे का रेट ज्यादा बढ़ने की वजह से फिलहाल इस प्रोजेक्ट को होल्ड किया गया है। अब मिल को एथनॉल की बजाए सीधा शीरा बेचकर ज्यादा मुनाफा मिल रहा है। इसे देख अब प्रोजेक्ट में कुछ संशोधन किए जा सकते हैं। इसके लिए सरकार और शुगर फेडरेशन की ओर से जारी निर्देशों का पालन किया जाएगा।
जगदीप सिंह, एमडी, शुगर मिल।