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हड़ताल का मिला जुला असर : रोडवेज की सुस्त रही चाल, प्राइवेट बसें भरतीं रहीं रफ्तार
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Mixed effect of strike: Roadways slowed down, private buses kept filling up
- फोटो : Panipat
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पानीपत। रोडवेज की हड़ताल का सोमवार को मिलाजुला असर देखने को मिला। रोडवेज प्रबंधन ने सुबह डिपो से बस रवाना करने का प्रयास किया, जिस पर हंगामा हो गया। हालांकि बाद में बसें रवाना की गईं। सोमवार को दिनभर सरकारी बसें भले ही कम दिखीं लेकिन निजी बसों की कोई कमी नहीं रही। रोडवेज ने किलोमीटर स्कीम के तहत बसें चलाने का प्रयास किया। रेलवे स्टेशन पर दिल्ली जाने वाली पैसेंजर ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली।
रोडवेज प्रबंधन बोला- 50 फीसदी बसें चलीं, कर्मचारी संघ बोला- 13 बसें चलीं, सात लौटीं
रोडवेज कर्मचारी संघ ने हड़ताल को सफल बताते हुए दावा किया कि पानीपत डिपो की 120 बसों में से मात्र 13 बसें ही चलाई जा सकीं। इनमें से भी सात बसें आधे रास्ते से लौट आईं। उधर, रोडवेज प्रबंधन का दावा है कि 50 प्रतिशत बसों का संचालन किया गया। सिर्फ 70 प्रतिशत कर्मचारी ही हड़ताल पर रहे। कर्मचारी संघ ने डिपो प्रबंधन पर आरोप लगाया कि अनट्रेंड चालकों से बसों का संचालन कराकर यात्रियों की जान को जोखिम में डाला गया।
रोडवेज डिपो के अंदर से चलीं निजी बसें, वसूला अधिक किराया
रोडवेज कर्मचारियों ने रविवार की रात 12 बजे से दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू कर दी थी। निजी बसों को रोडवेज डिपो के अंदर जाने की मनाही होती है लेकिन सोमवार को डिपो के अंदर ही निजी बस चालकों ने सवारी बैठाईं। यह बसें शामली, दिल्ली, सोनीपत, हरिद्वार और यूपी के लिए गईं। करनाल, चंडीगढ़ और हिमाचल के रूट पर भी निजी बस चालकों ने सवारियां भरीं। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए उनसे अधिक किराया वसूला गया। पानीपत से समालखा जाने के लिए बस का किराया 25 रुपये है, जबकि यात्रियों से 30 रुपये वसूले गए। इसके साथ ही कैब संचालकों ने इस रूट पर 10 रुपये अधिक वसूले।
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पुलिस की मदद से रवाना की जा सकी पहली बस, आगे लेट गए कर्मचारी
पानीपत डिपो से सोमवार को पहली बस निकालने के दौरान एक घंटे तक हंगामा चला। डिपो प्रबंधन और कर्मचारी आमने-सामने आ गए। कर्मचारी बसों के आगे लेट गए और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। जिस पर पुलिस बुलानी पड़ी। सुबह साढ़े चार बजे रवाना होने वाली बस साढ़े पांच बजे रवाना हो सकी। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने कर्मचारियों को हटाया और बस रवाना की।
रेलवे के टिकट काउंटर पर दिनभर रही भीड़, यात्री रहे परेशान
पानीपत रेलवे स्टेशन पर सुबह आठ बजे से ही सैकड़ों की संख्या में यात्री टिकट के लिए लाइन में मारामारी करते दिखे। बस न मिलने के बाद हर कोई दिल्ली, चंडीगढ़ एवं अन्य रूट पर जाने के लिए परेशान होता रहा। दिल्ली पैसेंजर में यात्रियों की सबसे ज्यादा संख्या देखने को मिली। रेलवे स्टेशन टिकट काउंटर और पूछताछ खिड़की पर दिनभर भीड़ रही।
- रात 12 बजे से बड़ी संख्या में पुलिस बस डिपो पर रही तैनात
बस डिपो पर रात 12 बजे से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। डिपो के सामने रविवार की रात से ही दो दो व्हीकल, फायर ब्रिगेड और पुलिस बस मौजूद रही। बसों को निकालने के लिए दिनभर पुलिस की मदद ली गई।
बस के ऊपर बैठकर जाने पर हुए मजबूर
बस डिपो के बाहर महिलाएं, बच्चे और कॉलेज के विद्यार्थी परेशान होते दिखे। काफी इंतजार के बाद भी जब बस नहीं मिली तो निजी बसों का सहारा लिया। निजी बसों की छत पर बैठकर सफर करने के लिए यात्री मजबूर हुए। निजी बस चालकों ने 55 की बजाय 90 से 100 सवारियों बैठाया।
डिपो गेट पर प्रदर्शन, दिनभर की रागनी
डिपो गेट पर कर्मचारियों ने सुबह 11 बजे से प्रदर्शन किया। इस दौरान दिनभर रागनी चली। सरकार विरोधी रागनी गाकर हड़ताल को सफल बनाया। दिनभर अलग-अलग कर्मचारी संघ के सदस्य एवं पदाधिकारी आते रहे और हड़ताल को समर्थन दिया। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा में रोडवेज कर्मचारी यूनियन महासंघ, जागृति मंच, चालक संघ, बीएमएस यूनियन, इंटक यूनियन, संयुक्त कर्मचारी संघ और मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन समेत अन्य संघों का सहयोग रहा।
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रोडवेज प्रबंधन बोला- 50 फीसदी बसें चलीं, कर्मचारी संघ बोला- 13 बसें चलीं, सात लौटीं
रोडवेज कर्मचारी संघ ने हड़ताल को सफल बताते हुए दावा किया कि पानीपत डिपो की 120 बसों में से मात्र 13 बसें ही चलाई जा सकीं। इनमें से भी सात बसें आधे रास्ते से लौट आईं। उधर, रोडवेज प्रबंधन का दावा है कि 50 प्रतिशत बसों का संचालन किया गया। सिर्फ 70 प्रतिशत कर्मचारी ही हड़ताल पर रहे। कर्मचारी संघ ने डिपो प्रबंधन पर आरोप लगाया कि अनट्रेंड चालकों से बसों का संचालन कराकर यात्रियों की जान को जोखिम में डाला गया।
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रोडवेज डिपो के अंदर से चलीं निजी बसें, वसूला अधिक किराया
रोडवेज कर्मचारियों ने रविवार की रात 12 बजे से दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू कर दी थी। निजी बसों को रोडवेज डिपो के अंदर जाने की मनाही होती है लेकिन सोमवार को डिपो के अंदर ही निजी बस चालकों ने सवारी बैठाईं। यह बसें शामली, दिल्ली, सोनीपत, हरिद्वार और यूपी के लिए गईं। करनाल, चंडीगढ़ और हिमाचल के रूट पर भी निजी बस चालकों ने सवारियां भरीं। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए उनसे अधिक किराया वसूला गया। पानीपत से समालखा जाने के लिए बस का किराया 25 रुपये है, जबकि यात्रियों से 30 रुपये वसूले गए। इसके साथ ही कैब संचालकों ने इस रूट पर 10 रुपये अधिक वसूले।
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पुलिस की मदद से रवाना की जा सकी पहली बस, आगे लेट गए कर्मचारी
पानीपत डिपो से सोमवार को पहली बस निकालने के दौरान एक घंटे तक हंगामा चला। डिपो प्रबंधन और कर्मचारी आमने-सामने आ गए। कर्मचारी बसों के आगे लेट गए और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। जिस पर पुलिस बुलानी पड़ी। सुबह साढ़े चार बजे रवाना होने वाली बस साढ़े पांच बजे रवाना हो सकी। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने कर्मचारियों को हटाया और बस रवाना की।
रेलवे के टिकट काउंटर पर दिनभर रही भीड़, यात्री रहे परेशान
पानीपत रेलवे स्टेशन पर सुबह आठ बजे से ही सैकड़ों की संख्या में यात्री टिकट के लिए लाइन में मारामारी करते दिखे। बस न मिलने के बाद हर कोई दिल्ली, चंडीगढ़ एवं अन्य रूट पर जाने के लिए परेशान होता रहा। दिल्ली पैसेंजर में यात्रियों की सबसे ज्यादा संख्या देखने को मिली। रेलवे स्टेशन टिकट काउंटर और पूछताछ खिड़की पर दिनभर भीड़ रही।
- रात 12 बजे से बड़ी संख्या में पुलिस बस डिपो पर रही तैनात
बस डिपो पर रात 12 बजे से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। डिपो के सामने रविवार की रात से ही दो दो व्हीकल, फायर ब्रिगेड और पुलिस बस मौजूद रही। बसों को निकालने के लिए दिनभर पुलिस की मदद ली गई।
बस के ऊपर बैठकर जाने पर हुए मजबूर
बस डिपो के बाहर महिलाएं, बच्चे और कॉलेज के विद्यार्थी परेशान होते दिखे। काफी इंतजार के बाद भी जब बस नहीं मिली तो निजी बसों का सहारा लिया। निजी बसों की छत पर बैठकर सफर करने के लिए यात्री मजबूर हुए। निजी बस चालकों ने 55 की बजाय 90 से 100 सवारियों बैठाया।
डिपो गेट पर प्रदर्शन, दिनभर की रागनी
डिपो गेट पर कर्मचारियों ने सुबह 11 बजे से प्रदर्शन किया। इस दौरान दिनभर रागनी चली। सरकार विरोधी रागनी गाकर हड़ताल को सफल बनाया। दिनभर अलग-अलग कर्मचारी संघ के सदस्य एवं पदाधिकारी आते रहे और हड़ताल को समर्थन दिया। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा में रोडवेज कर्मचारी यूनियन महासंघ, जागृति मंच, चालक संघ, बीएमएस यूनियन, इंटक यूनियन, संयुक्त कर्मचारी संघ और मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन समेत अन्य संघों का सहयोग रहा।

Mixed effect of strike: Roadways slowed down, private buses kept filling up- फोटो : Panipat

Mixed effect of strike: Roadways slowed down, private buses kept filling up- फोटो : Panipat