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Panipat News: लू चलने से दूध उत्पादन में 30 प्रतिशत तक आई कमी
Sat, 30 May 2026 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sat, 30 May 2026 01:25 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान से पशुओं पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। लू चलने से दूध उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसके अलावा पशुओं की खान-पान क्षमता, वजन और प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने कहा कि वर्तमान हीट वेव की स्थिति केवल इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि पशुधन के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने पशुपालकों से अपील करते हुए कहा कि पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। गर्मी के कारण पशु अधिक हांफने लगते हैं और तनाव की स्थिति में चले जाते हैं। इससे उनकी उत्पादकता सीधे प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि यदि समय रहते उचित देखभाल नहीं की गई तो पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं को हमेशा छायादार और हवादार स्थान पर रखा जाए तथा हर समय स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला हरा चारा एवं खनिज लवण नियमित रूप से खिलाए जाएं। दिन के सबसे अधिक गर्म समय में पशुओं को नहलाने और आवश्यक होने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने की भी सलाह दी गई है।
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पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक लोहान ने बताया कि पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर पशुपालकों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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पानीपत। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान से पशुओं पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। लू चलने से दूध उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसके अलावा पशुओं की खान-पान क्षमता, वजन और प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने कहा कि वर्तमान हीट वेव की स्थिति केवल इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि पशुधन के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने पशुपालकों से अपील करते हुए कहा कि पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। गर्मी के कारण पशु अधिक हांफने लगते हैं और तनाव की स्थिति में चले जाते हैं। इससे उनकी उत्पादकता सीधे प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि यदि समय रहते उचित देखभाल नहीं की गई तो पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं को हमेशा छायादार और हवादार स्थान पर रखा जाए तथा हर समय स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला हरा चारा एवं खनिज लवण नियमित रूप से खिलाए जाएं। दिन के सबसे अधिक गर्म समय में पशुओं को नहलाने और आवश्यक होने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने की भी सलाह दी गई है।
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पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक लोहान ने बताया कि पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर पशुपालकों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।