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Panipat News: सीएम के समक्ष छलका शहीद मेजर की मां का दर्द, बयां कर फफक पड़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2024 07:24 AM IST
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Martyr Major's mother's pain expressed in front of CM, she burst into tears after expressing it
पानीपत। इकलौते बेटे को पढ़ा लिखाकर देश को सौंप दिया था। बीते वर्ष जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए वह देश के लिए ही शहीद हो गया। इसके बाद बहू से उम्मीद थी, लेकिन वह भी साथ छोड़ गई। हमें अपनी पोती से भी बात नहीं करने देती। सरकार ने बेटे आशीष के नाम पर स्मारक बनाने की घोषणा की थी, लेकिन वो भी सिरे नहीं चढ़ सकी। बेटे की अस्थियां आज भी गांव के पेड़ पर टंगी हैं। सीएम नायब सिंह सैनी के समक्ष यह दर्द बयां कर शहीद मेजर आशीष धौंचक की मां फफक पड़ी। उन्होंने सीएम से न्याय की गुहार लगाई।
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पानीपत के सेक्टर-12 स्थित एसडी विद्या मंदिर स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में भरे सभागार में बिंझौल गांव निवासी शहीद मेजर आशीष धौंचक की मां कमला ने अपना दुखड़ा रोया। उन्होंने बताया कि बेटा आशीष 13 सितंबर 2023 को कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया था। जवान बेटे के शहादत पर भी उसने हौसला नहीं खोया, लेकिन समाज और सिस्टम के आगे वह बेबस और लाचार होकर टूट चुकी है। यही कारण है कि आज वह अपने आंसू और दर्द को रोक नहीं पा रही है। उसने बताया कि इकलौते बेटे आशीष की मौत के बाद बहू ज्योति से उसे उम्मीद थी, लेकिन उसकी बेरुखी से निराशा हाथ लगी। बेटे आशीष की तेरहवीं के बाद ही बहू मायके चली गई। पोती से वीडियो कॉल कर कर वह मन बहला लेती थी, लेकिन न जाने क्यों उसने भी मुंह फेर लिया। दूसरी ओर सरकार से भी मां को निराशा ही हाथ लगी है। कमला ने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आशीष के नाम पर बिंझौल गांव में स्मारक बनाने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक वो पूरी नहीं हो सकी। नतीजतन मां ने बेटे आशीष की अस्थियां आज भी गांव के पेड़ पर संभाल रखी है।
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मां का दुखड़ा सुन सहकारिता मंत्री बोले-सरकार खारिज करे बहू की नौकरी का प्रस्ताव
शहीद मेजर की मां का दुखड़ा सुनकर हर किसी का दिल पसीज गया। मंच से ही पंचायत एवं सहकारिता मंत्री महिपाल ढांडा ने सीएम के सामने इस मामले को रखा। उन्होंने शहीद मेजर की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव खारिज कर बहन को देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मां की इच्छानुसार मेजर की तीन बहनों में से किसी एक को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। सीएम नायब सिंह सैनी ने भी इस मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।
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सेना से भी नहीं मिला लाभ, बेटे की मौत के बाद पिता मानसिक रूप से परेशान
कमला ने बताया कि आशीष के पिता लालचंद नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड पानीपत से सेवानिवृत्त हैं। वे आशीष की मौत के बाद टूट गए हैं और मानसिक रूप से परेशान रहने लगे हैं। उन्होंने रेजिमेंट के अधिकारियों को पूरा मामला बताया है। सेना से मेडिकल और कैंटीन कार्ड की सुविधा मांगी है, लेकिन उनको अब तक कोई सुविधा नहीं दी गई है।
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