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मुसीबत में बनाए रखा हौसला और लक्ष्य कर लिया हासिल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Sep 2021 01:44 AM IST
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Maintained courage in trouble and achieved the goal
पानीपत। नितेश सिवाच। - फोटो : Panipat
पानीपत। ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंख से कुछ नहीं होता, हौसले से उड़ान होती है।’ अपनी जीत से इन पंक्तियों को जिया है पानीपत के कई खिलाड़ियों ने।
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जैसे स्लिप डिस्क से परेेशान जहां राधिका ने दर्द निवारक दवा का स्प्रे कर राज्य स्तरीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया वहीं घुटने के ऑपरेशन के बाद नितेश ने कुश्ती की जगह ग्रीको रोमन में हाथ आजमाया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इसी प्रकार रूढ़िवादी मानसिकता को दरकिनार कर निशा अपने पिता के सपने को साकार करने में जुटी हुई है।
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स्लिप डिस्क से परेशान राधिका ने स्प्रे कर मारा दांव, स्वर्ण किया नाम
राधिका चार साल से स्लिप डिस्क की वजह से कमर दर्द से जूझ रहीं हैं, लेकिन कभी भी खेल बंद नहीं किया। उन्हें करीब चार साल पहले कुश्ती का अभ्यास करने के दौरान रीढ़ की हड्डी पर चोट लग गई थी। इसका इलाज चल रहा है। राधिका ने बताया कि हर चैंपियनशिप उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। अभ्यास करना कभी बंद नहीं करती हूं। मुकाबले के दिन दर्द निवारक स्प्रे कर खेलती हैं। ऐसे ही राज्य स्तरीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। फिलहाल वह अभी 17 सितंबर को होने वाली नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप के लिए साई जींद में अभ्यास कर रहीं हैं।
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निशा को कुश्ती में आगे बढ़ाने के लिए पिता ने नहीं छोड़ी कोई कसर
राज्य स्तरीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली निशा ने बताया कि वह अपने पिता के लिए बेटा हैं। पिता ने उन्हें कुश्ती का खेल खिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्हें खेल की बारीकियां सीखने के लिए जींद के निदानी स्पोर्ट्स स्कूल में भेजा। निशा ने बताया कि कुछ गांव वाले पिता से कहते थे कि बेटी पर इतने पैसे खर्च कर रहे हों, बुढ़ापे में लड़कियां साथ नहीं रहती। ऐसी रूढ़िवादी बातों पर पिता ने कभी ध्यान नहीं दिया। हमेशा खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। इसकी बदौलत निशा अब तक पांच राष्ट्र स्तरीय मेडल जीत चुकी हैं। इसके साथ ही राज्य स्तरीय कई पदक उनके नाम हैं। निशा ने वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में भी तीन बार भाग लिया है। वह अब एशियन गेम्स की तैयारी के लिए रोहतक के सत्यावान अखाड़े में तैयारी कर रहीं हैं।

घुटने में चोट पर छोड़नी पड़ी कुश्ती, अब ग्रीको रोमन में कमा रहे नाम
राज्य स्तरीय कुश्ती चैंपियनशिप की ग्रीको रोमन श्रेणी में गोल्ड जीतने वाले नितेश सिवाच ने 2012 में कुश्ती खेलना शुरू किया था, लेकिन 2015 में घुटने पर चोट लग गई। घुटने का ऑपरेशन हुआ, जिससे उबरने में नितेश को दो साल लग गए। इसके बाद भी नितेश ने खेलना नहीं छोड़ा, उन्होंने कुश्ती की जगह ग्रीको रोमन खेलना शुरू दिया। इस खेल में प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी कमर से नीचे के हिस्सों पर प्रहार नहीं कर सकता है। ग्रीको रोमन में शुरुआत के कुछ महीने बाद से ही नितेश ने राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने शुरू कर दिए जबकि कुश्ती में नितेश एक भी मेडल नहीं जीत पाए थे। नितेश ने जूनियर नेशनल चैंपियनशिप और खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ कुल पांच राष्ट्र स्तरीय मेडल जीते हैं। एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक भी जीता है। नितेश का सपना है कि वह तीन साल और अभ्यास करके 2024 के ओलंपिक में ग्रीको रोमन में स्वर्ण पदक जीतें और देश का नाम रोशन करें।

पानीपत। राधिका राणा।

पानीपत। राधिका राणा।- फोटो : Panipat

पानीपत। निशा दहिया अपने पिता के साथ।

पानीपत। निशा दहिया अपने पिता के साथ।- फोटो : Panipat

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