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Panipat News: कागजों में ही दफन हो जाती माही, कोर्ट की नाराजगी के बाद पुलिस आरोपी की खोज को निकली
Sat, 25 Oct 2025 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sat, 25 Oct 2025 11:46 PM IST
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हत्या के आरोपी सचिन की हथियार के साथ फोटो दिखाते पीड़िता के परिजन। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। मुलाना के धीन गांव की निवासी माही का मामला कोर्ट नहीं पहुंचता तो वह हमेशा के लिए कागजों में ही दफन होकर रह जाती। उसको खोजने के लिए मां ऊषा काफी संघर्ष कर रहीं थी मगर पुलिस ने एक नहीं सुनी। ऐसे में थक हार कर एक बार को तो वह बैठ ही गईं। इसके बाद उन्हें अधिवक्ता अंजू शर्मा का साथ मिला। अंजू शर्मा ने मामले को ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास अभिनव गर्ग की अदालत तक पहुंचा दिया। अदालत में जब मामले की सुनवाई हुई तो न्यायाधीश ने मुलाना थाना प्रबंधक को मौके पर बुलाकर कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद कोर्ट ने समयबद्ध करते हुए पुलिस को बच्ची को खोजने और आरोपी को पकड़ने के निर्देश दिए, इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और आरोपी के ठिकानों पर दबिश देनी शुरू की। इसके बाद यह माही की मौत की जानकारी मिली। शनिवार को जैसे ही माही की मां को यह जानकारी मिली वह टूट गईं और थाने में ही विलाप करने लगीं। इस दौरान अधिवक्ता उन्हें संभालती दिखीं।
जुलाई में अपहरण का कराया था केस
मृतका माही की मां ऊषा ने बताया कि करीब ढ़ाई वर्ष पहले बच्ची, सोहाना गांव के सचिन के साथ शादी के इरादे से चली गई थी। बच्ची की उम्र 15 वर्ष थी। बच्ची के जाने के बाद मां की तरफ से मुलाना थाने में शिकायत दी गई और पुलिस ने केस दर्ज कर लिया, इसके बाद बच्ची बरामद हो गई और पुलिस ने आरोपी के साथ ही उसे भेज दिया। कुछ समय बाद आरोपी सचिन ने जब मां ऊषा की बात बेटी माही से करानी बंद कर दी तो उन्होंने 11 जुलाई 2025 को मुलाना थाने में अपहरण का केस दर्ज करा दिया। तब से माही की मां न्याय के लिए पुलिस के पास भटक रहीं थीं। पीड़िता की मां का कहना था कि जो महिला युवक के साथ बाइक पर मिली थी उसे भी पुलिस ने बाद में रेस्क्यू किया था। मगर उनकी बेटी को नहीं खोजा।
कोर्ट तक ऐसे पहुंचा मामला
अधिवक्ता ने बताया कि जब बच्ची की मां उनसे मिली और दर्द बताया तो उन्होंने नि:शुल्क यह केस लड़ने का फैसला लिया। उन्होंने अदालत में बीएनएस की धारा 100 के तहत एप्लीकेशन दी। जिस पर 26 सितंबर को ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास अभिनव गर्ग की अदालत ने सुनवाई की थी। पहली ही सुनवाई में अदालत ने केस के जांच अधिकारी से बच्ची के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि ट्रेस नहीं हुई है, इश्तेहार भी निकलवा दिया था। ऐसे में उन्होंने तत्काल मुलाना एसएचओ को तलब किया। एसएचओ कुछ देर में पहुंचे तो अदालत ने मामले की गंभीरता बताई और बच्ची को सर्च करने के निर्देश दिए। इसके बाद शनिवार को पुलिस ने आरोपी युवक के घर पर तलाशी ली मगर कोई नहीं मिला। कोर्ट ने इसके बाद की सुनवाई के दौरान पुलिस को कहा था कि खोज जारी रखें।
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आरोपी को हथियारों का शौक, सोशल मीडिया पर डालता था पोस्ट
बताया जाता है कि इस मामले में आरोपी सचिन को हथियारों को शौक था। वह सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ पोस्ट डालकर अपनी धमक इलाके में दिखाता रहता था। इस पर भी पुलिस को ध्यान नहीं गया।
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अंबाला सिटी। मुलाना के धीन गांव की निवासी माही का मामला कोर्ट नहीं पहुंचता तो वह हमेशा के लिए कागजों में ही दफन होकर रह जाती। उसको खोजने के लिए मां ऊषा काफी संघर्ष कर रहीं थी मगर पुलिस ने एक नहीं सुनी। ऐसे में थक हार कर एक बार को तो वह बैठ ही गईं। इसके बाद उन्हें अधिवक्ता अंजू शर्मा का साथ मिला। अंजू शर्मा ने मामले को ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास अभिनव गर्ग की अदालत तक पहुंचा दिया। अदालत में जब मामले की सुनवाई हुई तो न्यायाधीश ने मुलाना थाना प्रबंधक को मौके पर बुलाकर कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद कोर्ट ने समयबद्ध करते हुए पुलिस को बच्ची को खोजने और आरोपी को पकड़ने के निर्देश दिए, इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और आरोपी के ठिकानों पर दबिश देनी शुरू की। इसके बाद यह माही की मौत की जानकारी मिली। शनिवार को जैसे ही माही की मां को यह जानकारी मिली वह टूट गईं और थाने में ही विलाप करने लगीं। इस दौरान अधिवक्ता उन्हें संभालती दिखीं।
जुलाई में अपहरण का कराया था केस
मृतका माही की मां ऊषा ने बताया कि करीब ढ़ाई वर्ष पहले बच्ची, सोहाना गांव के सचिन के साथ शादी के इरादे से चली गई थी। बच्ची की उम्र 15 वर्ष थी। बच्ची के जाने के बाद मां की तरफ से मुलाना थाने में शिकायत दी गई और पुलिस ने केस दर्ज कर लिया, इसके बाद बच्ची बरामद हो गई और पुलिस ने आरोपी के साथ ही उसे भेज दिया। कुछ समय बाद आरोपी सचिन ने जब मां ऊषा की बात बेटी माही से करानी बंद कर दी तो उन्होंने 11 जुलाई 2025 को मुलाना थाने में अपहरण का केस दर्ज करा दिया। तब से माही की मां न्याय के लिए पुलिस के पास भटक रहीं थीं। पीड़िता की मां का कहना था कि जो महिला युवक के साथ बाइक पर मिली थी उसे भी पुलिस ने बाद में रेस्क्यू किया था। मगर उनकी बेटी को नहीं खोजा।
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कोर्ट तक ऐसे पहुंचा मामला
अधिवक्ता ने बताया कि जब बच्ची की मां उनसे मिली और दर्द बताया तो उन्होंने नि:शुल्क यह केस लड़ने का फैसला लिया। उन्होंने अदालत में बीएनएस की धारा 100 के तहत एप्लीकेशन दी। जिस पर 26 सितंबर को ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास अभिनव गर्ग की अदालत ने सुनवाई की थी। पहली ही सुनवाई में अदालत ने केस के जांच अधिकारी से बच्ची के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि ट्रेस नहीं हुई है, इश्तेहार भी निकलवा दिया था। ऐसे में उन्होंने तत्काल मुलाना एसएचओ को तलब किया। एसएचओ कुछ देर में पहुंचे तो अदालत ने मामले की गंभीरता बताई और बच्ची को सर्च करने के निर्देश दिए। इसके बाद शनिवार को पुलिस ने आरोपी युवक के घर पर तलाशी ली मगर कोई नहीं मिला। कोर्ट ने इसके बाद की सुनवाई के दौरान पुलिस को कहा था कि खोज जारी रखें।
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आरोपी को हथियारों का शौक, सोशल मीडिया पर डालता था पोस्ट
बताया जाता है कि इस मामले में आरोपी सचिन को हथियारों को शौक था। वह सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ पोस्ट डालकर अपनी धमक इलाके में दिखाता रहता था। इस पर भी पुलिस को ध्यान नहीं गया।

हत्या के आरोपी सचिन की हथियार के साथ फोटो दिखाते पीड़िता के परिजन। संवाद

हत्या के आरोपी सचिन की हथियार के साथ फोटो दिखाते पीड़िता के परिजन। संवाद