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Panipat News: एक ही दिन अष्टमी-नवमी का महासंयोग, अगले दिन विजयपर्व

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2026 06:24 PM IST
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Mahasandhi of Ashtami-Navami on the same day, Vijay Parva on the next day
माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। इस वर्ष तिथियों के विशिष्ट संयोग से मां के दो सबसे महत्वपूर्ण पर्व एक ही दिन हैं। ज्योतिषाचार्य रामराज कौशिक ने बताया कि 19 अक्तूबर को अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग रहेगा। इस दिन मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व रहेगा। अगले दिन विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह महासंयोग जीवन का बड़ा संदेश देता है। पहले मन की शुद्धता यानी अष्टमी, फिर कर्म की सिद्धि यानी नवमी और तभी जीवन में सच्ची विजय यानी दशहरा मिलती है। यही नवरात्र का वास्तविक अर्थ है।
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इसलिए एक साथ पड़ रही हैं दोनों तिथियां

पंचांग की गणना चंद्रमा की गति पर आधारित है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 19 अक्तूबर सोमवार को सूर्योदय से लेकर दोपहर तक व्याप्त रहेगी और नवमी तिथि उसी दिन सुबह 10:51 बजे प्रारंभ होकर 20 अक्तूबर दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी।
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शास्त्र नियम कहता है

पंडित प्रवीण शास्त्री ने बताया कि उदया तिथि और मध्याह्न व्यापिनी तिथि ही पूजन के लिए मान्य होती है। इसी कारण धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु के अनुसार दोनों तिथियों का पूजन, हवन और कन्या पूजन 19 अक्तूबर सोमवार को ही शास्त्र-सम्मत होगा।

शुद्धि के साथ मिलेगी सिद्धि
19 को मां महागौरी की पूजा होगी। पौराणिक कथा के अनुसार कठोर तपस्या से मां का वर्ण काला पड़ गया था, तब भगवान शिव ने उन्हें गंगाजल से धोकर गौर वर्ण दिया। इसलिए ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और पापों का नाश करती हैं। इस दिन संधि पूजा, जिसमें अष्टमी समाप्त और नवमी शुरू होती है, में मां चामुंडा की उत्पत्ति मानी जाती है।
नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। ये अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व - इन आठों सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र के नौ दिन की साधना की पूर्णता इसी दिन हवन के साथ होती है। एक ही दिन दोनों रूपों की पूजा होने से भक्तों को शुद्धि के साथ-साथ सिद्धि भी प्राप्त होगी।

कन्या पूजन का महापर्व 19 को ही
इस वर्ष कन्या पूजन के लिए 19 अक्तूबर सर्वश्रेष्ठ है। दो तिथियों के एक साथ होने से इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को भोजन कराकर पूजन करने से महागौरी और सिद्धिदात्री दोनों की कृपा प्राप्त होगी। 20 अक्तूबर मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इसी दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था। इस दिन शस्त्र पूजा, वाहन पूजा, शमी वृक्ष की पूजा और नीलकंठ के दर्शन का विशेष महत्व है।



अष्टमी-नवमी पर विशेष पूजा
पंडित प्रवीण शास्त्री ने बताया कि धार्मिक परंपराओं में पूजा के लिए उदया तिथि और तिथि की अवधि का विशेष महत्व है। मां महागौरी को शुद्धता और शांति का प्रतीक माना जाता है, जबकि मां सिद्धिदात्री की पूजा साधना की पूर्णता से जुड़ी है। श्रद्धालु इस दिन हवन और कन्या पूजन कर मां दुर्गा की आराधना करेंगे।
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