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बारिश से हटी प्रदूषण की परत, मिली राहत
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पानीपत। रविवार को हुई तेज बरसात ने प्रदूषण की परत को तोड़ दिया था। परत टूटने से धुआं व हवा के कण ऊपर उठ गए और पर्यावरण साफ हो गया। रविवार को शहर का एक्यूआई 139 से 85 अंक गिरकर सोमवार को महज 54 रहा, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर है। सोमवार को प्रदेश के सभी जिलों का एक्यूआई 80 से कम रहा।
पानीपत का एक्यूआई इस माह दूसरी बार 60 से कम दर्ज किया गया है वहीं दूसरी ओर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू होने के बाद जिले का प्रदूषण स्तर कंट्रोल किया जा रहा है। गौरतलब है कि हर साल 15 अक्तूबर से 15 मार्च के बीच हवा के खराब श्रेणी में पहुंचने पर ‘ग्रैप’ लागू किया जाता है। इसके तहत मुख्य रूप से निर्माण गतिविधियों से जनित धूल उत्सर्जन, पराली, गार्बेज बर्निंग, बिना पीयूसी वाहनों की रोकथाम, उद्योगो से उत्सर्जित हो रहें धुएं आदि को नियंत्रित करने के निर्देश हैं।
जिले में इस दौरान नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, एनएआई पेड़ -पौधों व सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी रात को उद्योगों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। इससे प्रदूषण को कंट्रोल करने में काफी मदद मिली है। पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार, नवंबर के अंत तक प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी होगी जैसे जैसे तापमान गिरेगा प्रदूषण स्तर बढ़ेगा। इसका कारण पुराली जलाने जैसी घटनाएं और त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली वाहनों की संख्या भी है।
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रात को उद्योगों में जल रहा कचरा-कोयले के रेट दोगुना तक महंगे हो चुके हैं। अब कोयला 16-17 रुपये किलोग्राम मिल रहा है। इस शहर के बाहरी क्षेत्रों में बॉयलर चलाने वाले उद्यमी रात को बॉयलर में कचरा झोंक रहे हैं। उद्यमियों को पुराने जूते चप्पल व फटे पुराने कपड़े एक रुपये किलोग्राम के भाव से मिल रहे हैं। इन उद्योगों में ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम नहीं है इसलिए इनको मॉनिटर भी नहीं किया जा रहा। बॉयलर में जलने वाला कचरा भी प्रदूषण स्तर को बढ़ाता है।
पिछले 10 दिन का एक्यूआई-
दिनांक एक्यूआई
16 अक्तूबर 252
17 अक्तूबर 352
18 अक्तूबर 44
19 अक्तूबर 78
20 अक्तूबर 159
21 अक्तूबर 239
22 अक्तूबर 244
23 अक्तूबर 159
24 अक्तूबर 139
25 अक्तूबर 54
बरसात से प्रदूषण की परत टूटी- डॉ. राजेंद्र
प्रदूषण मामलों के एक्सपर्ट डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि मौसम में गिरावट आने के कारण एक परत बन जाती है। ऊपर का तापमान गर्म होता है जबकि नीचे का ठंडा होता है। इसलिए धूल के कण व धुआं ऊपर नहीं जा रहा था। बरसात से वो परत टूट गई है। इसलिए प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। अब दीवाली पर प्रदूषण को कंट्रोल करने की बोर्ड के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। खेतों में हो रहा काम व वाहनों का आवागमन बढ़ना प्रदूषण का बड़ा कारण है।
ग्रैप को सख्ती से लागू होने के बाद प्रदूषण होगा नियंत्रित- आरओ
एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, पुलिस एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ग्रैप सख्ती से लागू करने के निर्देश दिया गया है। सभी विभागों को मिलकर प्रदूषण रोकने की दिशा में काम करना होगा। सभी विभागों की जिम्मेदारी तय है, उसी के अनुसान काम करना है। ग्रैन सख्ती से लागू हुआ तो प्रदूषण स्तर में गिरावट आएगी।
- कमलजीत सिंह, रिजनल ऑफिसर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
पानीपत में तीसरी बार लागू हुआ है ग्रैप
पानीपत में वर्ष 2019, 2020 और 2021 में ग्रैप लागू किया गया है। इस बार तीसरा साल है। इससे पहले नवंबर पहले 2019 में प्रदूषण के लगातार बढ़ते स्तर से लोगों की परेशानियों को देखते हुए ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल ने पानीपत सहित हरियाणा के पांच जिलों में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी लागू की थी। इस आदेश में पानीपत के अलावा सोनीपत, फरीदाबाद, गुड़गांव को शामिल किया गया था।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में नवंबर 2016 में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान की प्रणाली को तैयारी करने का निर्देश केद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिया था। वर्ष 2016 में ही दिवाली के दौरान करीब 15 से अधिक दिन तक दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग छाया रहा था। जनवरी 2017 में पर्यावरण मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण अथॉरिटी को ग्रैप तैयार करने का आदेश दिया। इसके बाद से हर साल 15 अक्तूबर और 15 मार्च से ग्रैप को लागू किया जाता है। इस दौरान वायु प्रदूषण अधिक रहता है। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले उद्यमों आदि पर शिकंजा कसा जाता है।
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पानीपत का एक्यूआई इस माह दूसरी बार 60 से कम दर्ज किया गया है वहीं दूसरी ओर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू होने के बाद जिले का प्रदूषण स्तर कंट्रोल किया जा रहा है। गौरतलब है कि हर साल 15 अक्तूबर से 15 मार्च के बीच हवा के खराब श्रेणी में पहुंचने पर ‘ग्रैप’ लागू किया जाता है। इसके तहत मुख्य रूप से निर्माण गतिविधियों से जनित धूल उत्सर्जन, पराली, गार्बेज बर्निंग, बिना पीयूसी वाहनों की रोकथाम, उद्योगो से उत्सर्जित हो रहें धुएं आदि को नियंत्रित करने के निर्देश हैं।
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जिले में इस दौरान नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, एनएआई पेड़ -पौधों व सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी रात को उद्योगों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। इससे प्रदूषण को कंट्रोल करने में काफी मदद मिली है। पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार, नवंबर के अंत तक प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी होगी जैसे जैसे तापमान गिरेगा प्रदूषण स्तर बढ़ेगा। इसका कारण पुराली जलाने जैसी घटनाएं और त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली वाहनों की संख्या भी है।
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रात को उद्योगों में जल रहा कचरा-कोयले के रेट दोगुना तक महंगे हो चुके हैं। अब कोयला 16-17 रुपये किलोग्राम मिल रहा है। इस शहर के बाहरी क्षेत्रों में बॉयलर चलाने वाले उद्यमी रात को बॉयलर में कचरा झोंक रहे हैं। उद्यमियों को पुराने जूते चप्पल व फटे पुराने कपड़े एक रुपये किलोग्राम के भाव से मिल रहे हैं। इन उद्योगों में ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम नहीं है इसलिए इनको मॉनिटर भी नहीं किया जा रहा। बॉयलर में जलने वाला कचरा भी प्रदूषण स्तर को बढ़ाता है।
पिछले 10 दिन का एक्यूआई-
दिनांक एक्यूआई
16 अक्तूबर 252
17 अक्तूबर 352
18 अक्तूबर 44
19 अक्तूबर 78
20 अक्तूबर 159
21 अक्तूबर 239
22 अक्तूबर 244
23 अक्तूबर 159
24 अक्तूबर 139
25 अक्तूबर 54
बरसात से प्रदूषण की परत टूटी- डॉ. राजेंद्र
प्रदूषण मामलों के एक्सपर्ट डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि मौसम में गिरावट आने के कारण एक परत बन जाती है। ऊपर का तापमान गर्म होता है जबकि नीचे का ठंडा होता है। इसलिए धूल के कण व धुआं ऊपर नहीं जा रहा था। बरसात से वो परत टूट गई है। इसलिए प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। अब दीवाली पर प्रदूषण को कंट्रोल करने की बोर्ड के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। खेतों में हो रहा काम व वाहनों का आवागमन बढ़ना प्रदूषण का बड़ा कारण है।
ग्रैप को सख्ती से लागू होने के बाद प्रदूषण होगा नियंत्रित- आरओ
एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, पुलिस एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ग्रैप सख्ती से लागू करने के निर्देश दिया गया है। सभी विभागों को मिलकर प्रदूषण रोकने की दिशा में काम करना होगा। सभी विभागों की जिम्मेदारी तय है, उसी के अनुसान काम करना है। ग्रैन सख्ती से लागू हुआ तो प्रदूषण स्तर में गिरावट आएगी।
- कमलजीत सिंह, रिजनल ऑफिसर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
पानीपत में तीसरी बार लागू हुआ है ग्रैप
पानीपत में वर्ष 2019, 2020 और 2021 में ग्रैप लागू किया गया है। इस बार तीसरा साल है। इससे पहले नवंबर पहले 2019 में प्रदूषण के लगातार बढ़ते स्तर से लोगों की परेशानियों को देखते हुए ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल ने पानीपत सहित हरियाणा के पांच जिलों में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी लागू की थी। इस आदेश में पानीपत के अलावा सोनीपत, फरीदाबाद, गुड़गांव को शामिल किया गया था।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में नवंबर 2016 में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान की प्रणाली को तैयारी करने का निर्देश केद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिया था। वर्ष 2016 में ही दिवाली के दौरान करीब 15 से अधिक दिन तक दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग छाया रहा था। जनवरी 2017 में पर्यावरण मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण अथॉरिटी को ग्रैप तैयार करने का आदेश दिया। इसके बाद से हर साल 15 अक्तूबर और 15 मार्च से ग्रैप को लागू किया जाता है। इस दौरान वायु प्रदूषण अधिक रहता है। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले उद्यमों आदि पर शिकंजा कसा जाता है।