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पानीपत: स्वास्थ्य विभाग के पास दवाओं की कमी, एनीमिया मुक्त अभियान इस माह नहीं चला
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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग के पास पिछले काफी समय से दवाओं का अभाव है। दवाओं की कमी के कारण जहां रोगियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं विभाग के बीमारियों के खिलाफ अभियान भी प्रभावित हो रहे हैं। अब अगस्त में चलने वाला एनीमियामुक्त अभियान भी दवाओं की कमी के कारण स्थगित हो गया है। वेयर हाउस में दवाओं की कमी है, इसलिए प्रदेश भर इस माह से अभियान का स्थगित करना पड़ा है। अब एक सितंबर से सात सितंबर तक एनीमिया मुक्त अभियान चलेगा। स्वास्थ्य विभाग हर तीन माह में एक बाद ये अभियान चलाता है। सभी अस्पतालों से वेयरहाउस में एनीमिया मुक्त अभियान के दौरान जरूरी दवाओं की डिमांड भेज दी गई है।
मई में चले एनीमिया मुक्त अभियान के तहत तीन अलग अलग कैटेगरी में 8757 महिलाओं की जांच हुई थी। इनमें 7451 महिलाएं एनीमिया ग्रस्त मिली थी यानि 85 प्रतिशत महिलाओं मं 12 ग्राम से कम खून मिला था। 55 प्रतिशत बच्चों में खून की मात्रा कम मिली थी।
एनीमिया मुक्त अभियान में आयु वर्ग के हिसाब से बच्चों को गोलियां दी जाती हैं। छह माह से पांच साल तक के बच्चों को आयरन सिरप दिया जाता है। छह से नौ साल के बच्चों को गुलाबी गोली, 10 साल के बच्चे से 19 साल तक के युवक को नीली गोली व गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिला को लाल गोली दी जाती है।
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वेयरहाउस में दवाओं की कमी के कारण इस बार सभी जगहों पर एनीमिया मुक्त अभियान स्थगित कर दिया गया था। अब यह अभियान एक सितंबर से शुरू होगा। हर तीन माह बाद अभियन एक सप्ताह चलता है।
- डॉ. ललित वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन
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मई में चले एनीमिया मुक्त अभियान के तहत तीन अलग अलग कैटेगरी में 8757 महिलाओं की जांच हुई थी। इनमें 7451 महिलाएं एनीमिया ग्रस्त मिली थी यानि 85 प्रतिशत महिलाओं मं 12 ग्राम से कम खून मिला था। 55 प्रतिशत बच्चों में खून की मात्रा कम मिली थी।
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एनीमिया मुक्त अभियान में आयु वर्ग के हिसाब से बच्चों को गोलियां दी जाती हैं। छह माह से पांच साल तक के बच्चों को आयरन सिरप दिया जाता है। छह से नौ साल के बच्चों को गुलाबी गोली, 10 साल के बच्चे से 19 साल तक के युवक को नीली गोली व गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिला को लाल गोली दी जाती है।
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वेयरहाउस में दवाओं की कमी के कारण इस बार सभी जगहों पर एनीमिया मुक्त अभियान स्थगित कर दिया गया था। अब यह अभियान एक सितंबर से शुरू होगा। हर तीन माह बाद अभियन एक सप्ताह चलता है।
- डॉ. ललित वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन